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रिफ्यूजियों को बसाने का विरोध कर रही भीड़ ने जलाईं गाड़ियां, पुलिस फायरिंग में एक की मौत

गुवाहाटी। त्रिपुरा में शनिवार को ब्रू समुदाय के रिफ्यूजी परिवारों को बसाने के विरोध में प्रदर्शन कर रही भीड़ को संभालने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। इसमें एक शख्स की मौत हो गई। 5 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। सरकार के इस फैसले के विरोध में उत्तरी त्रिपुरा में स्थानीय लोग पिछले 6 दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार प्रदर्शन हिंसक हो गया और भीड़ ने हाइवे पर वाहनों में आग लगा दी।

पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की ओर से बुलाए गए बंद के दौरान हिंसक भीड़ ने पनी सागर में सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया था। उन्हें रोकने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी। इसमें 45 साल के श्रीकांता दास की गोली लगने से मौत हो गई।

एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर न्यूज एजेंसी को बताया कि उत्तरी त्रिपुरा के पनी सागर और कंचनपुर सब-डिविजन में बनी विस्फोटक स्थिति से निपटने के लिए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के जवानों की टुकड़ी तैनात की गई है।

सरकारी दफ्तर, बाजार बंद

पुलिस के अनुसार, एक रिफ्यूजी ने एक स्थानीय पंप संचालक पर हमला कर दिया था। इसके बाद मिश्रित आबादी वाले सब डिविजन में हालात बिगड़ गए। कंचनपुर के सब डिविजनल पुलिस ऑफिसर बिक्रमजीत सुकला दास ने बताया कि प्रदर्शन के कारण सरकारी ऑफिस, बाजार, दुकानें बंद हैं। सिक्योरिटी फोर्स, मेडिकल और मीडिया को छोड़कर सभी तरह के वाहनों को इजाजत नहीं है।

कंचनपुर के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट चांदनी चंद्रन ने बताया कि सरकार अब भी रिफ्यूजी परिवारों की संख्या और उनकी लोकेशन की जानकारी जुटा रही है, ताकि उन्हें बसाने की प्रोसेस शुरू की जा सके।

मिजोरम से भागकर त्रिपुरा आए थे ब्रू समुदाय के 35 हजार शरणार्थी

ब्रू समुदाय के करीब 35 हजार शरणार्थी 23 साल पहले जातीय संघर्ष के बाद मिजोरम से भागकर त्रिपुरा आए थे। तभी से ये सभी स्थायी शिविरों में रह रहे थे। अब केंद्र सरकार ने इन्हें त्रिपुरा में ही बसाने का फैसला किया है। इसके तहत इन्हें स्थानीय नागरिकों की तरह सुविधाएं दी जाएंगी।

इसके लिए इस साल जनवरी में केंद्र सरकार, त्रिपुरा, मिजोरम की राज्य सरकार और ब्रू समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच समझौता हुआ है। स्थानीय लोग इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की पहल नहीं की। इससे उनका गुस्सा भड़क गया।

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