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शनि और शुक्र के बाद अब देव गुरु बृहस्पति होने जा रहे हैं वक्री, जानें उपाय

शनि और शुक्र के बाद अब देव गुरु बृहस्पति होने जा रहे हैं वक्री, जानें उपाय
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भोपाल। ग्रहों का व्रकी होना बहुत शुभ नहीं माना गया है. वक्री से अर्थ ग्रह की उल्टी चाल से होता है. सभी ग्रहों में शनि वक्री होना अत्यंत अशुभ फलदायी माना गया है. मई के महीने में आने वाले चार दिनों में तीन प्रभावशाली ग्रह वक्री हो रहे हैं.

11 मई को शनि के वक्री होने के बाद 13 मई को शुक्र वकी हो गए और अब यानि 14 मई को देव गुरु बृहस्पति वक्री होने जा रहे हैं. इसके बाद बुध भी वक्री होगें. 9 में से 6 ग्रहों का वक्री होना ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक बहुत दुर्लभ है. इसका प्रभाव सभी राशियों पर देखा जाएगा.

शनि, बृहस्पति और शुक्र के वक्री होने पर सभी क्षेत्रों पर इसका असर पड़ेगा. राहु-केतु वक्री रहते हैं. ऐसे में एक साथ इन ग्रहों का वक्री हो जाना व्यक्ति की परेशानियों में इजाफा कर सकता है. जिन लोगों की जन्म कुंडली में शनि, गुरु और शुक्र कमजोर और अशुभ हैं उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. वहीं जिन लोगों की कुंडली में ये ग्रह शुभ हैं उन्हें कोई खास परेशानी नहीं होगी.

ग्रहों की शांति के उपाय

ये ग्रह वक्री होने पर जीवन में कोई अशुभ प्रभाव न डालें इसके लिए इन ग्रहों की शांति का उपाय करना बहुत जरूरी है. नित्य इन ग्रहों की शांति के लिए मंत्रों का जाप श्रेयष्कर हो सकता है.

गुरु का मंत्र

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:

ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:

शनि का मंत्र

ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:

ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:

शुक्र का मंत्र

ऊँ शुं शुक्राय नम:

ॐ हृीं श्रीं शुक्राय नमः

बुध का मंत्र

ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय् नम:

ॐ त्रैलोक्य मोहनाय विद्महे स्मरजन काय धीमहि तन्नो विणु: प्रचोदयात्

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