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गुरुवार और एकादशी के योग में विष्णुजी के साथ शिवजी की भी करें पूजा, दक्षिणावर्ती शंख से करें श्रीकृष्ण का अभिषेक

गुरुवार और एकादशी के योग में विष्णुजी के साथ शिवजी की भी करें पूजा, दक्षिणावर्ती शंख से करें श्रीकृष्ण का अभिषेक

सावन माह के शुक्ल पक्ष में पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाता है। इस तिथि पर संतान के सुखद भविष्य की कामना से महिलाएं व्रत करती हैं। सावन, गुरुवार और एकादशी के योग में शिवजी, विष्णुजी के साथ ही श्रीकृष्ण की भी पूजा करें। जरूरतमंद लोगों को दान करें।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार गणेश पूजन के बाद भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करना चाहिए। इसके लिए शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और भगवान को अर्पित करें। मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय और कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जाप करें। साथ ही, देवी लक्ष्मी की भी पूजा करें। देवी-देवताओं को पीले चमकीले वस्त्र अर्पित करें। तुलसी के पत्तों के साथ माखन-मिश्री, केले और पीली मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। पूजा के बाद प्रसाद वितरीत करें।

स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य नाम का अध्याय है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सालभर की सभी एकादशियों का महत्व बताया था। एकादशी व्रत करने से सुख-समृद्धि और शांति मिल सकती है। सावन माह की एकादशी पर शिवलिंग को गंगाजल से और फिर पंचामृत से स्नान कराएं। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और मिश्री मिलाकर बनाना चाहिए। पंचामृत स्नान के बाद एक बार फिर से शुद्ध जल से स्नान कराएं।

शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल चढ़ाएं। अबीर, गुलाल, इत्र आदि सुगंधित चीजें चढ़ाएं। चावल और फूल अर्पित करें। धूप, दीप जलाकर आरती करें।

नौ ग्रहों में से एक गुरु ग्रह की पूजा भी शिवलिंग रूप में ही की जाती है। गुरु ग्रह के लिए शिवजी को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। चने की दाल का दान करें।

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