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आंध्रप्रदेश के लेपाक्षी मंदिर में है करीब 450 साल पुराना नागलिंग, रामायण काल से जुड़ा है इस मंदिर का इतिहास

आंध्रप्रदेश के लेपाक्षी मंदिर में है करीब 450 साल पुराना नागलिंग, रामायण काल से जुड़ा है इस मंदिर का इतिहास

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में लेपाक्षी मंदिर है। यह मंदिर दक्षिण भारत में आस्था का मुख्य केंद्र है। जहां रोज हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इस रहस्यमय मंदिर का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के काल में पहाड़ी पर होने के कारण इसे कूर्म शैला भी कहा जाता है। अगर पौराणिक मान्यता को मानें तो इस मंदिर का निर्माण ऋषि अगस्त्य ने करवाया था।

नागपंचमी पर होती है विशेष पूजा

मंदिर में नंदी जी की एक पत्थर से बनी बहुत बड़ी मूर्ति है। जो 27 फीट लम्बी और करीब साढ़े 4 फीट ऊंची है। मंदिर में एक बड़ा नाग लिंग भी है, जो कि करीब 450 साल पुराना है। इसके ऊपर एक विशाल सात फीट वाले शेषनाग की मूर्ति है। शेषनाग और नंदी का एक साथ स्थापित होना अपने आप में दुर्लभ संयोग है। सावन महीने में नागपंचमी पर यहां विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। यहां रामलिंगेश्वर नाम का अद्भुत शिवलिंग है। कहा जाता है कि भगवान राम ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। यहां पास में एक और शिवलिंग स्थापित है, जिसकी स्थापना हनुमानजी ने की थी।।

भगवान राम ने किया था स्थापित

इस धाम में मौजूद एक स्वयंभू शिवलिंग भी है जिसे शिव का रौद्र अवतार यानी वीरभद्र अवतार माना जाता है। 15वीं शताब्दी तक ये शिवलिंग खुले आसमान के नीचे विराजमान था, लेकिन विजयनगर रियासत में इस मंदिर का निर्माण शुरू किया गया था। यहां मौजूद एक अद्भुत शिवलिंग रामलिंगेश्वर को लेकर ऐसी मान्यता है कि जिसे जटायु के अंतिम संस्कार के बाद भगवान राम ने खुद स्थापित किया था। पास में ही एक और शिवलिंग है हनुमालिंगेश्वर। बताया जाता है कि श्री राम के बाद महाबलि हनुमान ने भी यहां भगवान शिव की स्थापना की थी।

हवा में लटकता है स्तंभ

मंदिर 16 वीं सदी में बनाया गया और एक पत्थर की संरचना है। इस मंदिर का सबसे दिलचस्प पहलू एक पत्थर का खंभा है। यह स्तंभ लंबाई में 27 फीट और ऊंचाई 15 फीट है। यह एक नक्काशीदार स्तंभ है। यह स्तंभ जमीन को छूता नहीं है। इसे लटकता हुआ स्तंभ भी कहते हैं।

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