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बिपिन रावत के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां

बिपिन रावत को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बनाया गया

बिपिन रावत के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां
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थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बनाया गया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का कार्यकाल 3 साल के लिए और बढ़ा दिया है। अब जनरल बिपिन रावत इस पद पर 65 साल की उम्र तक बने रहेंगे। सेना प्रमुख के रावत अभी तक सिर्फ आर्मी को ही नेतृत्व देते थे, पर अब उन्हें वायु और जल सेना के काम काज पर भी नजर रखनी होगी। उनके सामने चुनौती वास्तव में बड़ी है। वे खुद कहते हैं कि भारत के समक्ष नॉन कॉन्टैक्ट युद्ध की चुनौती गंभीर है। कुछ समय पहले ही रावत ने कहा था, 'यह एक गंभीर मुद्दा है। हम नॉन कॉन्टैक्ट युद्ध के लिए अपनी तैयारी कर रहे हैं।Ó नॉन कॉन्टैक्ट युद्ध में किसी भी देश की जीत उसके विरोधी को उसकी ही जमीन पर उसकी सेना को हराने, दुश्मन की आर्थिक क्षमता तथा राजनीतिक प्रणाली को नष्ट करने में ही निहित होती है। इसके लिए देश को अपनी कमान, नियंत्रण, संचार, कंप्यूटर, इंटेलीजेंस (खुफिया तंत्र), सर्विलांस और सैन्य परीक्षण तंत्र को उन्नत और दुरुस्त करने की जरूरत होती है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की जिम्मेदारी तीनों सेनाओं से जुड़े मामलों में रक्षामंत्री को लगातार सलाह देते रहना है। सीडीएस ही रक्षामंत्री का प्रधान सैन्य सलाहकार होगा। हालांकि, सैन्य सेवाओं से जुड़े विशेष मामलों में तीनों सेनाओं के चीफ भी पहले की तरह रक्षामंत्री को सलाह देते रहेंगे। लेकिन, सेना के अनुशासन को देखते हुए अपेक्षा यह की जाती है कि सीडीएस का पद महत्वपूर्ण होने वाला है। शायद ही तीनों सेनाओं के प्रमुख कोई सामरिक महत्त्व का निर्णय बिना सीडीएस की अनुमति के ले लें। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सैन्य अभियान के दौरान तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बैठाने का भी काम करेगा। आपको पता ही है कि कुछ समय पहले ही केंद्र सरकार ने चीफ ऑफ डिपेंस स्टाफ पद को मंजूरी दी थी। वैसे औपचारिकता के नाते चीफ ऑफ डिफेंस बिना रक्षा सचिव की मंजूरी के रक्षा मंत्री से सीधे मुलाकात कर सकेंगे। लेकिन, यह तो मात्र औपचारिकता बहर ही बना रहने वाला है।

अपने बेबाक विचारों के लिए मशहूर बिपिन रावत पहले भी साफ कह चुके हैं कि, 'भारत को अतिरिक्त क्षेत्र की लालसा नहीं है । लेकिन, इसका लक्ष्य आर्थिक प्रगति और सामाजिक-राजनीतिक विकास के लिए एक अनुकूल बाहरी और आंतरिक सुरक्षा का वातावरण सुनिश्चित करना है।Ó रावत की इस घोषणा के बाद हमारे धूर्त पड़ोसी पाकिस्तान सरकार को राहत की सांस लेनी चाहिए थी कि भारत उस पर कभी हमला नहीं बोलेगा। वैसे इतिहास भी गवाह है कि युदध हर बार उसने ही शुरू किया है और हमेशा ही युद्ध को ख़त्म तो भारत ने ही किया है। बहरहाल, यह तो स्पष्ट दिख ही रहा है कि भविष्य की लड़ाई में संपर्क रहित युद्ध प्रणाली हमें दुश्मन पर बढ़त दिला सकती है । ऐसे में तो हमें इस दिशा में तुरंत ही सुरक्षा की दृष्टि से पहले कदम उठाना चाहिए। हमें क्वांटम तकनीक, साइबर स्पेस और सबसे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के फायदों को समझने की जरूरत है।

आर.के. सिन्हा

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