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क्या अमेरिका में भी कमला हैरिस के रूप में खिलेगा भारतीय कमल?

कमला हैरिस अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को पहली बार संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें भारत से जुड़ाव का गर्व है

क्या अमेरिका में भी कमला हैरिस के रूप में खिलेगा भारतीय कमल?
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प्रोफेसर विवेक सिंह

भारतीय - जमैकन मूल की अमेरिका में जन्मी और पली- बढ़ी कमला हैरिस अमेरिकी उपराष्ट्रपति पद के चुनाव की दौड़ में एक प्रमुख चेहरा हैं। अमेरिकी आम चुनाव में अब चंद दिन ही बचे हैं। अगर कोरोना की वजह से कोई बदलाव नहीं हुआ तो 3 नवंबर को अमेरिकी आम चुनाव संपन्न हो जाएंगे। वर्तमान राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से मैदान में हैं वहीं विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार पूर्व उपराष्ट्रपति जोसेफ वाइडन हैं। उपराष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से वर्तमान उपराष्ट्रपति माइक पेंस को उतारा गया है जिनको डेमोक्रेटिक पार्टी की कमला हैरिस से कड़ी चुनौती मिल रही है।

कमला हैरिस को लेकर पूरी दुनिया में चर्चा है। कमला हैरिस का जन्म 20 अक्टूबर 1964 को अमेरिका के कैलिफोर्निया में हुआ। इनकी माता का नाम श्यामला गोपालन है जो कि एक कैंसर शोधकर्ता थी और पिता का नाम डॉनल्ड हैरिस है जो एक प्रोफेसर थे।

उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में कमला हैरिस अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को पहली बार संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें भारत से जुड़ाव का गर्व है। भारत के 74 में स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने भारतीयों को बधाई दी। उन्होंने बताया कि जब उनकी मां श्यामला गोपालन तमिलनाडु से महज 19 साल की उम्र में पहली बार कैलिफोर्निया पहुंची तो उनके पास उनकी माता राजन और पिता पीवी गोपालन के द्वारा दी गई शिक्षाओं के अतिरिक्त और कुछ नहीं था। कमला हैरिस की माता एक कैंसर शोधकर्ता थी जो बात के दिनों में अमेरिकी मानवाधिकार आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़ गई। इसका असर उनकी पुत्री कमला हैरिस पर भी पड़ा। महज 7 साल की उम्र में कमला हैरिस ने अपने माता पिता के अलगाव को भी देखा। इसका भी उनके अंतर्मन पर गहरा असर पड़ा। कमला हैरिस 2004 से 2011 तक सैन फ्रांसिस्को की डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी रहीं, 2011 से 2017 तक कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रहीं, 2016 में उन्हें कैलिफोर्निया से सीनेटर चुना गया।

अगर कमला हैरिस अमेरिकी उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत जाती हैं और उपराष्ट्रपति बनती हैं तो ऐसा करने वाली वे देश की पहली महिला होंगी। अमेरिका में आज तक कोई महिला उपराष्ट्रपति नहीं बनी है। अमरीका के लिए यह फक्र की बात होगी। अगर कमला हैरिस अमेरिकी उपराष्ट्रपति चुनाव जीत जाती हैं तो यह भारत के लिए भी फक्र की बात होगी क्योंकि कमला हैरिस की माता भारतीय थीं।

अमेरिका के आम चुनाव में गैर अमेरिकी वोटरों का मत बहुत मायने रखता है। भारतीय मूल के अमेरिका में बसने वाले लोगों का अधिकतर वोट डेमोक्रेटिक पार्टी को ही जाता है, इससे उम्मीद कमला हैरिस के लिए अधिक बढ़ गई है। उन्हें अश्वेतों का भी समर्थन प्राप्त है क्योंकि उनका और उनकी माता का इतिहास मानवाधिकार से जुड़ा हुआ है। कमला हैरिस को एक महिला प्रत्याशी के रूप में उन्हें महिलाओं से अधिक समर्थन मिलने की भी उम्मीदें हैं। राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जोसेफ वाइडन ने पहले ही भारत के साथ खड़ा रहने की बात कह दी है। उन्होंने भारत के साथ व्यापारिक और गैर व्यापारिक रिश्ते और सुधारने की बात कही है।

मेरे अपने अनुभव से मैं स्पष्ट रूप से बोल सकता हूं कि अमेरिका में सरकार किसी भी पार्टी की बने, राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति चाहे कोई बनें, अमेरिका के हितों के बारे में ही सोचेंगे। भारत को दोनों पार्टियां चाहे डेमोक्रेटिक पार्टी हो या रिपब्लिकन पार्टी, दोनों से पूरा सहयोग मिलने की उम्मीद है। कमला हैरिस एक अमरीकी नागरिक हैं इस बात का हमें ध्यान रखना चाहिए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति का देश की नीति निर्धारण में कोई बहुत बड़ा योगदान नहीं होता है। भारत को प्रगति और आत्मनिर्भरता बिना किसी बाहरी सहयोग के स्वयं प्राप्त करना होगा जिसमें हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल एवं सक्षम नेतृत्व में अवश्य सफल होंगे।

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