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सदी की गायिका लता मंगेशकर

लता ताई गाने को हमेशा पूजा ही समझती हैं

सदी की गायिका लता मंगेशकर
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अशोक मनवानी कला लेखक

आज 28 सितंबर लता मंगेशकर की जन्म वर्षगांठ है। देश विदेश में करोड़ों और मध्यप्रदेश में उनके लाखों प्रशंसक हैं। ये सभी प्रशंसक लता जी को कुदरत का कोई करिश्मा मंत्र हैं। पर एक ऐसा भक्त जो लता जी की एक देवी की तरह आराधना करता है, मंदिर बनाकर और उनके सभी रिकॉर्ड एकत्र कर संगीत प्रेमियों को विजिट करवाता है, वो है सुमन। इन्होंने लता जी के गाए गीतों के सभी रिकॉर्ड अपने घर को संग्रहालय ने तब्दील कर संजोए हैं । इंदौर शहर से कुछ दूरी पर पिगडम्बर ग्राम में लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफोन रिकॉर्ड संग्रहालय को श्री सुमन चौरसिया ने आकर्षक शक्ल दी है। लता जी के गाये गीतों के सभी रिकार्ड्स यहां मिल जाएंगे। बहुत से रिकॉर्ड तो दुर्लभ श्रेणी के हैं। यहाँ अनेक पुस्तकें भी संग्रहीत हैं। चौरसिया परिवार की संगीत के प्रति आत्मीय अभिरुचि का प्रतीक है ये संग्रहालय। यहाँ फिल्म लेखक, गीतकार, संगीतकार, कलाकार आदि अक्सर आते रहते हैं। यह एक शोध केंद्र भी बन चुका है। लता जी के साथ ही आशा भोसले जी और हृदयनाथ मंगेशकर भी इस संग्रहालय को बहुत पसंद करते हैं।

अनूठा अंदाज, सार्थक जीवन

लता जी का जीवन अध्ययन का विषय है। एक सार्थक भूमिका के नौ दशक ये जमाना देख चुका है। लता जी के गायन का अनूठा अंदाज है। लता ताई गाने को पूजा ही समझती हैं। उन्होंने कभी भी चप्पल पहनकर गाना नहीं गाया। हमेशा नंगे पैर ही वे गीत की रिकार्डिंग करवाती हैं। लता मंगेशकर जी खास अवसरों पर विशिष्ट समारोहों के लिए भी गाती रही हैं। लता जी अपने गीत-गायन में शास्त्रीय शैली को अपनाने के साथ-साथ विशेष अंदाज में गाने वाली गायिका मानी जाती हैं और वे अनेक भाषाओं में गाने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं।इस अवस्था में भी उनका जज्बा कायम है। लता जी के प्रति न सिर्फ करोड़ों गीत- संगीत प्रेमियों बल्कि आम लोगों के मन में एक समर्पित गायिका ही नहीं एक आत्मनिर्भर, स्वाभिमानी भारतीय स्त्री की छवि के साथ विशेष आदर भाव है। चूँकि लता जी का जन्म इंदौर का है, इसलिए लता जी का मध्यप्रदेश में काफी आदर किया जाता है लेकिन लता जी के साथ ही उनकी छोटी बहन के नाते आशा जी को भी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान से लेकर आम नागरिक अति सम्मानीय मानते हैं। मध्यप्रदेश के बाशिंदे लता जी और आशा जी सहित उनकी और बहनों उषा जी, मीना जी और भाई हृदयनाथ मंगेशकर के लिए सेहतमंद बने रहने और सवा सौ साल जीने की कामना करते हैं। लता जी के व्यक्तित्व और कृत्तिव पर हाल ही में सुरगाथा पुस्तक भी प्रकाशित की गई है। इसके पहले इंदौर और मुम्बई से लता जी पर केन्द्रित कई पुस्तकें आई हैं। लता मंगेशकर जी भारत या एशिया की धरोहर नहीं बल्कि विश्व स्तरीय शख्सियत हैं। ये शब्द गीतकार हसरत जयपुरी के हैं। संगीतकार ओ.पी नैयर ने भी लता जी को मेलोडी क्वीन कहा था। लता जी मध्य प्रदेश की इस धरती पर जरूर जल्द आएँगी और गाएंगी, ये उनके चाहने वालों का यकीन है।

यह मध्यप्रदेश का सौभाग्य है कि लता जी इंदौर में जन्मी हैं। तारीख थी 28 सितम्बर 1929 जब इस धरती पर उनका आतरण हुआ। लता मंगेशकर के प्रशंसक पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। लता जी की विशेषता है कि इन्होंने शास्त्रीय संगीत, गजल और पॉप संगीत हर क्षेत्र में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा और एक समान सफलता पाई ।

लता मंगेशकर जी हर दिन नई ताजगी से गाती हैं। कुछ बरस पहले उन्होंने एक पंजाबी एल्बम के लिए भी गाया है। कुछ बरस पहले फिल्म पेज थ्री के लिए गाया गया उनका एक सुमधुर गीत-'कितने अजीब रिश्ते हैं यहाँ पर... यह सिद्ध करता है कि बढ़ती आयु का उनके गायन पर कोई अधिक प्रभाव नहीं पड़ा। भारतीय सिनेमा की एक सदी पूरी होने पर उनका मन उल्लास से भर उठा और वे गीत गाने के अनुरोध ठुकरा नहीं पातीं। एक तरफ हम देखते हैं कि अभिनय से जुड़ी वे अनेक नायिकाएं जिनके लिए ताई ने गाया, अब जिन्दगी को अपने घर की चार दीवारी में समेट चुकी हैं, लेकिन लता जी कर्म में यकीन रखते हुए नित नई उंचाईयों के साथ अपनी आराधना में तल्लीन हैं। आज भी मानो वे गा रही हों-अल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नामज् या फिर प्रभु तेरो नाम, जो ध्याये,फल पायेज् लता जी सर्वाधिक गीत गाने वाली गायिका और सबसे अधिक भाषाओं में गाने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं। यह कितनी सुखद और संतोष देने वाली बात है कि उनका जज्बा आज भी कायम है। चार-पांच दशक तक लगातार हिंदी सिनेमा के लिए पार्श्व गायन कर अलग पहचान बनाने वाली प्रसिद्ध पार्श्व गायिका लता जी के लिए गाना एक इबादत हैं। इसलिए वे जब गीत गाती हैं तब मन से एकाग्र और सिर्फ अपने गायन पर ध्यान देती हैं। अपने पिता दीना नाथ मंगेशकर का दिया आशीर्वाद उनके साथ रहता है। लता जी ने गायन के लिए शब्दों के सही उच्चारण के लिए अनेक भारतीय भाषाओं में खुद को जानकार और पारंगत बनाया। उन्होंने बंगाली, पंजाबी, उर्दू, सिंधी, गुजराती और मराठी भाषाओं की तालीम भी हासिल की।

अनूठी गीत श्रृंखला

हिंदी सिनेमा के अनेक लोकप्रिय गीतों के लिए लता जी को जाना जाता है। लता जी के गाए गीतों की श्रृंखला बहुत लम्बी है। हर श्रोता गीत के बोल और गायिका के गाने के अंदाज के अनुसार गीत को अनूठा मानता है। लता जी के गाए कुछ गीत तो इतने अधिक कर्णप्रिय हैं कि उन्हें बार-बार सुनने की इच्छा होती है। ऐसे गीतों में 'तेरे सुर और मेरे गीत, 'घर आया मेरा परदेसी, 'यूं हसरतों के दाग, 'ये जिन्दगी उसी की है, 'धीरे धीरे मचल ऐ दिले, 'ना कोई उमंग है, 'ओ मेरे सनम ओ मेरे सनम, 'आज हम अपनी दुआओं का असर, 'दिल अपना और प्रीत परायी, 'लाख छुपाओ छुप न सकेगा, 'ये हरियाली और ये रास्ता, 'ढूंढो-ढूंढो रे साजना 'झिलमिल सितारों का आंगन होगा, 'मुझको इस रात की तन्हाई में आवाज न दो 'फूल तुम्हें भेजा है खत में, 'मेरे महबूब तुझे मेरी मोहब्बत की कसम 'तू जहाँ-जहाँ चलेगा मेरा साया साथ होगा, आएगा, आने वाला, मोहब्बत की झूठी कहानी पर, जाने क्यों लोग मोहब्बत किया, जोत से जोत जगाते,, हवा में उड़ता जाये, हँसता हुआ नूरानी चेहरा,, जिन्दगी भर नहीं भूलेंगे, मोहे भूल गए सांवरिया, ज्योति कलश छलके, नगरी नगरी, गाता जाये बंजारा, कहीं दीप जले कहीं दिल, ओ सजना बरखा बहार आई, लो आ गयी उनकी याद, अजीब दास्ताँ है ये, शामिल हैं।

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