Top
undefined

राष्ट्र की संगठन-चेतना के प्रतीक: सरदार पटेल

वल्लभ भाई पटेल ने अपने पुरुषार्थ से राष्ट्र का भाग्य रचा

राष्ट्र की संगठन-चेतना के प्रतीक: सरदार पटेल
X

ललित गर्ग

नेतृत्व वही सफल होता है जो सबको साथ लेकर, सबका अपना होकर चले। निस्वार्थ भाव से राष्ट्रीयता के हित में निर्णय ले। ऐसे ही कर्मवीर व्यक्तियों का जीवन विलक्षण होता है, वे अपने जीवन काल में तथा उसके बाद प्रेरणास्रोत बने रहते हैं। इतिहास अक्सर ऐसे महान् लोगों से ऐसा काम करवा देता है जिसकी उम्मीद नहीं होती। और जब राष्ट्र की आवश्यकता का प्रतीक ऐसे महान् इंसान बनते हैं तो उसका कद सहज ही बड़ा बन जाता है। सरदार वल्लभ भाई पटेल ऐसे ही विराट व्यक्तित्व के धनी थे। वे एक राजनेता ही नहीं, एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं बल्कि इस देश की आत्मा थे। राष्ट्रीय एकता, भारतीयता एवं राजनीति में नैतिकता की वे अद्भुत मिसाल थे। आजादी के बाद विभिन्न रियासतों में बिखरे भारत के भू-राजनीतिक एकीकरण में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए पटेल को भारत का बिस्मार्क और लौह पुरूष भी कहा जाता है। उन्हें 1991 में भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है। इस कर्मयौद्धा रूपी आकाश को कैसे मापें, कैसे राष्ट्रीयता के इस महासमन्दर को बांधे, कैसे नैतिक एवं चरित्रमूलक राजनीति की बुंदों को गिने? पटेल की राष्ट्रीयता को संगठित करने की बुलंद एवं विलक्षण उपलब्धियां उम्र के पैमानों में इतनी ज्यादा है कि उनके आलकन में गणित का हर फार्मूला छोटा पड़ जाता है। भले ही वे आज हमारे बीच नहीं है लेकिन वे इस माटी के लिए किये गये उल्लेखनीय अवदानों के लिए सदियों तक याद किये जायेंगे।

सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपने पुरुषार्थ से राष्ट्र का भाग्य रचा, उनका जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाड में हुआ। वे कृषक परिवार से थे। उनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल एवं माता का नाम लाडबा देवी है। वे उनकी चैथी संतान हैं। लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढ़ाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया। सरदार पटेल जन्म जयन्ती हमारे लिये प्रेरणा दिवस है। उनकी शिक्षाएं, जीवन-आदर्श एवं राष्ट्र को प्रदत्त अवदान हमें प्रेरणा देते रहेंगे। उनके विचार एवं सोच हमारे लिये जीवन को सफल एवं सार्थक बनाने का आधार है। वे कहते थे कि अगर कोई चीज मुफ्त मिलती है तो उसकी कीमत कम हो जाती है जबकि परिश्रम से पाई हुई चीज की कीमत ठीक तरीके से लगाई जाती है। लोगों को मेहनत और कर्म के लिए प्रेरित करते हुए वे कहा करते थे कि यह सच है कि पानी में तैरने वाले ही डूबते हैं, किनारे पर ख?े रहने वाले नहीं लेकिन इससे भी बड़ा सच यह है कि किनारे पर ही ख?े रहने वाले लोग तैरना भी नहीं सीखते।

अहिंसा का समर्थन करते हुए सरदार पटेल का कहना था कि कायरों की अहिंसा का कोई मूल्य नहीं है। जो तलवार चलाना जानते हुए भी तलवार को म्यान में रखता है, उसकी अहिंसा सच्ची अहिंसा होती है। वह कहते थे कि आपकी अच्छाई आपके मार्ग में बाधक है, इसलिए अपनी आंखों को क्रोध से लाल होने दीजिए और अपने मजबूत हाथों से अन्याय का डटकर सामना कीजिए। पटेल सदैव कहते थे कि गरीबों की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। उनका कहना था कि हमारा सिर कभी न झुकने वाला होना चाहिए। हमें केवल भगवान के आगे झुकना चाहिए, दूसरों के आगे नहीं।

जीवन कैसे जीना चाहिए, इसका भी सरदार पटेल ने सम्पूर्ण दर्शन प्रस्तुत किया। उनका मानना था कि जो कोई भी सुख और दु:ख का समान रूप से स्वागत करता है, वास्तव में वही सबसे अच्छी तरह से जीवन जीता है। हमें सदैव ईश्वर और सत्य में विश्वास रखकर प्रसन्न रहना चाहिए। यहां तक कि अगर हम हजारों की दौलत भी गंवा दें और हमारा जीवन बलिदान हो जाए तो भी हमें मुस्कुराते रहना चाहिए। बहुत बोलने से कोई लाभ नहीं होता बल्कि हानि ही होती है। उन्हें देश के छोटे से छोटे स्तर के व्यक्ति की भी कितनी चिंता थी, उसी को व्यक्त करते हुए उन्होंने एकबार कहा था कि उनकी एक ही इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक हो और इस देश में कोई भी व्यक्ति अन्न के लिए आंसू बहाता हुआ भूखा न रहे।

Next Story
Share it
Top