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अविस्मणीय कैलाशजी सारंग

अविस्मणीय कैलाशजी सारंग
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राजेंद्र शर्मा

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री कैलाशनारायण सारंग के निधन से प्रदेश में जनसंघ-भाजपा की स्थापना के समय के जुड़े नेताओं की पीढ़ी का एक और महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हम सबके बीच से चला गया। जिन लोगों ने इस प्रदेश में जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस के समर्थ विकल्प के रूप में खड़ा करने में अपने पूरे जीवन को समर्पित कर दिया था, उनमें श्री सारंग जी गणना की जा सकती है। तिनके-तिनके जोड़कर नीड़ का निर्माण करने की रचनात्मकता से लेकर, ईंट का जवाब पत्थर के देने की आक्रामकता भी संगठन में पैदा करने का जुझारुपन उनमें विद्यमान था। उनका अवसान दीपावली के दिन हुआ। एक जीवनदीप का विसर्जन यदि अपने जैसे अनेक दीपकों के प्रज्ज्वलन के पश्चात हो, तो जीवन धन्य हो जाता है, जीवन की यही धन्यता उन्होंने प्राप्त की है। आज मध्यप्रदेश की विधानसभा से लेकर देश की संसद तक भारतीय जनता पार्टी की जो विजय पताका फहरा रही है, तो उसका रहस्य इसी में छिपा है कि भारतीय जनता पार्टी देश का एक मात्र ऐसा दल है, जिसे ऐसे असंख्य कार्यकत्र्ताओं की अटूट शृंखला उपलब्ध रही है, जिन्होंने एक दीपक की तरह ही अपने जीवन का उत्सर्ग, संगठन के निर्माण के लिये किया है। स्व. कुशाभाऊ ठाकरे से प्रारंभ हुई नंदादीपों की यह दिव्य पंक्ति स्वर्गीय श्री मोरू भैया गदे्र, प्यारेलाल खण्डेलवाल, मनोहरराव सहस्त्रबुद्धे, नारायण प्रसाद जी गुप्ता, विभाष बनर्जी, गोविन्द सारंग, केशव दवे जैसे जीवन दानियों के उत्सर्ग और श्रद्धेय राजमाता सिंधिया, रामचंद्र विट्ठल बड़े, गिरिराज किशोर कपूर, नारायणकृष्ण शेजवलकर, डॉ. लक्ष्मीनारायण पाण्डे, विमल कुमार चौरडिया, राजेन्द्र धारकर, वीरेन्द्र कुमार सखलेचा, सुन्दरलाल पटवा, कैलाश जोशी, बाबूलाल गौर, दादा सुखेन्द सिंह, दादा परांजपे, पंडरीराव कृदत्त, लखीराम अग्रवाल, श्री नेवालकर, रामहित गुप्त जैसे अनेक गृहस्थ कार्यकर्ताओं द्वारा अपनी जिन्दगी और गृहस्थी दोनों को ही संगठन के लिये समर्पित कर देने के कारण ही आज दिखाई दे रहे , अद्वितीय संगठन की रचना में हुई है। इसी पीढ़ी की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी श्री कैलाश नारायण सारंग भी थे। अपने 85 वर्षीय जीवन के 55-60 से भी अधिक वर्ष उन्होंने संगठन के लिये शक्ति जुटाने, उसे मजबूत बनाने में ही समर्पित किये हैं। उन्होंने अनेक कार्यकर्ताओं को संगठन से जोड़ा निर्माण किया। उन्हें सक्रिय और प्रेरित किया, इससे ही संगठन की यह विराट शक्ति दिखाई देती है।

देश राष्ट्रीय नेतृत्व के अतिरिक्त पार्टी के जिन वरिष्ठ नेताओं का ऊपर उल्लेख किया गया है, उनमें से लगभग सभी के साथ सहयोगी की भूमिका निभाने का अद्वितीय गौरव उन्हेंं प्राप्त हुआ है। यदि किसी एक मात्र व्यक्ति को यह सौभाग्य प्रदेश में मिला है, तो वे श्री कैलाश नारायण सारंग ही थे। इतने लंबे सार्वजनिक जीवन में सामान्य कार्यकर्ता से लेकर बड़े से बड़े नेता तक यदि किसी एक व्यक्ति का सीधा संपर्क रहता था, तो वह श्री सारंग ही थे। श्री सारंग प्रदेश की राजनीति के सभी क्षेत्रों में, सभी दलों में, पत्रकारिता और प्रशासन से जुड़े अधिकांश लोगों निकटता से जुड़े थे, उनकी यह विलक्षण क्षमता और सामथ्र्य उन्हें अति विशिष्ट बनाती है। अपने संपर्कों का इतना व्यापक विस्तार और उसकी गहरी समझ रखने वाले संगठन वे एकमात्र नेता थे। पार्टी को शून्य से शिखर तक ले जाने की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कराने में जिन लोगों के योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा, उनमें श्री सारंग की गणना अनुपम एवं अविस्मरणीय व्यक्तियों में ही की जायेगी। संगठन के निर्माण से लेकर उसे शिखर तक पहुंचाने का सौभाग्य बिरलों को ही मिलता है, इसके लिये जिन्हें भी स्मरण किया जावेगा, उनमें श्री सारंगजी सदैव अविस्मरणीय रहेंगे। उन्होंने केवल संगठन को ही ऊंचाईयां नहीं दी, वे स्वयं भी इसी तरह शून्य से शिखर तक पहुंचे। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

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