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प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ गौ-प्रबंधन लागू होगा

गौ संरक्षण की अभिनव पहल

प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ गौ-प्रबंधन लागू होगा
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राजन

भारतीय संस्कृति में गाय को माता का स्थान प्राप्त है और शायद ही इस बात में कोई संदेह नहीं कि शायद ही कोई होगा जो इस तथ्य से अनभिज्ञ हो। भारतीय मान्यताओंनुसार गाय में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है और गौ-माता द्वारा प्रद्वत प्रत्येक पदार्थ मानव देह के लिए अमृत तुल्य व औषधियों से भरपूर है फिर चाहे वो गौ-दुग्ध या उससे बने पदार्थ हो या गौ-मूत्र यहां तक की गाय के गोबर से निर्मित कंडे भी वातावरण को शुद्ध व पवित्र करने हेतु अति उत्तम माने जाते हैंं। वहीं गोबर की खाद भी खेती हेतु सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। हमारे गंथ्रों में भी गाय की महिमा का बखान पढऩे को मिलता है भगवान श्री कृष्ण द्वारा गाय चराते हुए लीलाएं दिखाने के अनेक प्रंसगों का उल्लेख है जिन्हें पढ़-सुन कर हम आनंदित होते हैं। गौरतलब है कि हमारे देश में आज भी कई घर ऐसे हैं जहां बनाई जाने वाली पहली रोटी गाय माता के नाम से निकाली जाती है लेकिन यह विडंबना ही है कि आधुनिकता की दौड़ में शामिल होने के चलते हम गाय माता को वो सम्मान प्रदान नहीं कर रहे हैं जिसकी वो हकदार हैं। अत्यंत दुख: की बात है आज हमनें गाय माता को सड़कों पर आवारा पशुओं की भांति विचरण करने को मजबूर कर दिया है अक्सर देखने में आता है कि अपनी उदरपूर्ति हेतु गौ-माता कचरे के ढेर के आसपास मंडराती हैं यह हमारे लिए बेहद शर्मनाक है लेकिन आज का सत्य भी है। एक सुखद अनुभूति इस बात की भी है कि अब हमारे प्रदेश में गौ-माता को उचित संरक्षण व सम्मान दिलवाने हेतु प्रयास आरंभ हो गये है और इन प्रयासों को आरंभ करने की पहल की है मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में श्री चौहान ने प्रदेश में गौ-माता के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु गौ-केबिनेट बनाने की घोषणा की थी इस केबिनेट में कृषि, पशुपालन, वन, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, गृह विभाग की प्रमुख सहभागिता निश्चित की गई हैं और स्वयं मुख्यमंत्री श्री चौहान इसके अध्यक्ष होगें साथ ही अन्य सदस्यों के रूप में मंत्रीगण डॉ. नरोत्तम मिश्र, श्री कुंवर विजय शाह,श्री कमल पटेल, डॉ. महेन्द्र सिंह सिसोदिया और श्री प्रेम सिंह पटेल शामिल हैं। साथ ही अपर मुख्य सचिव पशुपालन विभाग समिति के भार-साधक सचिव के रूप में कार्य करेगें। यहां इस बात का जिक्र आवश्यक है कि गौ-केबिनेट की पहली मीटिंग भी गोपाअष्टमी के दिन रखी गई इस दिन की विशेषता है कि महर्षि शांडिल्य द्वारा निकाले गये शुभ मुहूर्त में भगवान श्री कृष्ण द्वारा इसी दिन प्रथम बार गाय चराई गई थी। यह मुहूर्त महर्षि शांडिल्य द्वारा निकाला गया था। तभी से इस दिन गौ पूजन का विशेष महत्व माना गया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा प्रदेश में गौ संरक्षण एवं संवर्धन हेतु भविष्य की योजना साझा करते हुए बताया कि राज्य सरकार गौ-संरक्षण और संवर्धन के साथ दूध, गोबर और गौ-मूत्र का उपयोग पूरी गम्भीरता के साथ मानव कल्याण के लिए करेगी। गौ माता की सेवा और इससे आज की नयी पीढ़ी को जोडऩे के लिए प्रदेश में गौ पर्यटन की नीति बनायी जाएंगी व गौ-शालाओं के संचालन और नवीन निर्माण के लिए पंच-परमेश्वर और अन्य संबंधित विभागों के विभिन्न योजनाओं का भी सहारा लिया जाएगा। गौ-केबिनेट में लिए गये निर्णयों में प्रदेश की मुख्यत: चार गौवंश नस्ले मालवी, निमाड़ी, केनकथा और गओलों हैं इनके संरक्षण-संवर्धन की कार्ययोजना बनाये जाने का प्रावधान है इसके लिए मुख्यमंत्री गौ-सेवा योजना अंतर्गत स्वीकृत गौ-शालाओं का संचालन शासन द्वारा सक्षम और इच्छुक समाजसेवी संस्थाओं तथा स्व-सहायता समूह के सहयोग से किये जाने व गौ-शालाओं के संचालन में जनसहयोग लिया जाएगा। प्रदेश में गौ-शालाओं के संचालन और गौ-संरक्षण एवं संवर्धन के लिये आवश्यक होने पर वित्तीय संसाधन जुटाने के लिये उपकर 'काऊ सैस' (गो-सेवा कर) लगाये जाने का मंथन भी किया जा रहा है गौरतलब है कि देश के अन्य राज्यों में वर्तमान में यह कर लागू है श्री चौहान ने बताया कि हालांकि इस उपकर को लगाने में यह विशेष रूप से ध्यान रखा जाएगा कि आमजन पर आर्थिक भार नहीं बढ़े।

गौ-केबिनेट की पहली बैठक में गौ-केबिनेट के कार्यो मुख्य कार्य बताते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि गौ-केबिनेट देश-विदेश में गौ-प्रबंधन का अध्ययन कर प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ गौ-प्रबंधन लागू करेगी, जिससे यहां गायों की अच्छी से अच्छी देखभाल हो तथा गौ-उत्पादों का व्यापक स्तर पर उत्पादन एवं विक्रय हो सके। प्रदेश सरकार तो अपने स्तर पर गौ-संरक्षण एवं संवर्धन हेतु कार्य कर रही है ऐसे में हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि हम गौ-माता का सम्मान करें व उनकी उचित देखभाल करें वैसे तो प्रदेश सरकार द्वारा की गई पहल को देखते हुए यह गर्व से कहा जा सकता है कि हमारे प्रदेश में आरंभ हुई गौ-संरक्षण की अभिनव पहल।

-सकारात्मक

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