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भूतकाल के बंधनों से मुक्त होकर नये जीवन का संकल्प लें

भूतकाल के बंधनों से मुक्त होकर नये जीवन का संकल्प लें
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गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर आध्यात्मिक गुरु

हरवर्ष हम नववर्ष की शुरुआत दूसरों को खुशी और समृद्धि की शुभकामनाएं देकर करते हैं। समृद्धि का सही लक्षण क्या है? समृद्धि का लक्षण मुस्कराहट है। समृद्धि का लक्षण संतोष है। समृद्धि का चिन्ह है मुक्ति, मुस्कान तथा जो कुछ भी अपने पास है, उसे निर्भय होकर आस-पास के लोगों के साथ बांटने की मन:स्थिति। समृद्धि का लक्षण यह आस्था और आत्मविश्वास है कि जो कुछ भी मेरी आवश्यकता है, वह मुझे मिल जायेगा।

आप लोभ, घृणा, द्वेष, तथा ऐसे अन्य सभी दोषों से मुक्त होना चाहते हो। यदि मन इन सभी नकरात्मकताओं में लिप्त है, तो वह खुश तथा शांत नहीं रह सकता। आप अपना जीवन आनंदपूर्वक नहीं बिता सकते। समझें कि नकारात्मक भावनाएं भूतकाल की वजह से हैं। वर्तमान जीवन के अनुभव को आपका भूतकाल नष्ट न करने पाये। भूतकाल को क्षमा कर दें। यदि आप अपने बीते हुए समय को क्षमा नहीं कर पायेंगे तो आप का भविष्य दु:खपूर्ण हो जायेगा। पिछले साल, जिनके साथ आप की अनबन रही, इस साल उनके साथ सुलह कर लें। भूत को छोड़ नया जीवन शुरू करने का संकल्प करें।

इस बार नववर्ष के आगमन पर हम इस पृथ्वी के लिए शांति तथा संपन्नता के संकल्प के साथ सभी को शुभकामनाएं दें। आर्थिक मंदी, महामारी की छाया तथा बाढ़, अकाल के इस समय में और अधिक नि:स्वार्थ सेवा करें। जानें कि इस संसार में हिंसा को रोकना ही हमारा प्राथमिक उद्देश्य है तथा विश्व को सभी प्रकार की सामाजिक तथा पारिवारिक हिंसा से हमें मुक्त करना है। समाज के लिए कुछ अच्छा करने का संकल्प लें। जो पीडि़त हैं, उन्हें धीरज दें। जब भी आप लोगों के लिए उपयोगी हुए, तो उसका पुण्य भी आपको मिला, जो लुप्त नहीं होता। आपके द्वारा किये गये अच्छे कर्म हमेशा पलट कर आपके पास वापस आयेंगे। आज आपके पास यह पूरा विश्व एक परिवार जैसा है। यह हमें महसूस करना है कि हर कोई आपके ही परिवार का हिस्सा है। पूरे राष्ट्र के लिए जिम्मेदारी लें, फिर कोई दु:ख नहीं होगा।

जीवन का आध्यात्मिक पहलू हममें संपूर्ण विश्व और संपूर्ण मानवता के प्रति और अधिक अपनापन, उत्तरदायित्व, संवेदना तथा सेवा का भाव विकसित करता है। सच्चा आध्यात्मिक पहलू जाति, धर्म, तथा राष्ट्रीयता की संकुचित सीमाओं को तोड़ देता है तथा सभी में व्याप्त जीवन ऊर्जा से अवगत कराता है।

अपनी आंखें खोलें और देखें कि आपको कितना कुछ मिला हुआ है। नववर्ष पर यह ध्यान न दें कि

आपको क्या नहीं मिला है। यह कृतज्ञता लाता है। आप जितने कृतज्ञ होंगे, उतना अधिक आपको मिलेगा। इसके विपरीत आप जितनी शिकायत करेंगे, उतना ही आपसे ले लिया जायेगा। यीशु मसीह ने भी यही कहा था- 'जिसके पास है, उनको और अधिक मिलेगा और जिसके पास नहीं है, उनके पास जो भी है, वह उनसे ले लिया जायेगा।' इसका यही अर्थ है।

जो हमसे कम संपन्न हैं, उनके पास पहुंचे और आभार की भावना के साथ उनकी सहायता करें। आप यह अनुभव करेंगे कि जब आप नि:स्वार्थ सेवा करते हैं, तो आपको कितना अधिक संतोष मिलता है। इससे आपको यह भी पता चलेगा कि आपकी अपनी समस्याएं बहुत छोटी हैं। बार-बार मन में कहना कि 'मुझे क्या मिलेगा?' मानसिक अवसाद का सबसे बड़ा कारण है। 'मुझे क्या मिलेगा?' समृद्धि की कमी का लक्षण है।

इस वर्ष पंछी की तरह मुक्त हो जाएं। अपने पंखों को खोलें और उडऩा सीखें। यह आपको स्वयं अपने भीतर अनुभव करना है, और कुछ भी नहीं है। यदि आप अपने को बंधन में महसूस करते हो तो फिर आप बंधन में ही रहोगे। आप अपनी स्वतंत्रता को कब महसूस करेंगे, मरने के बाद? अभी इसी क्षण मुक्त हो जाएं। बैठ कर तृप्त हो जाएं। कुछ समय ध्यान और सत्संग में बैठे। यह आपके मन को शांत तो करता ही है और साथ ही संसार की चुनौतियों का सामना करने के लिए आपकी चेतना को आंतरिक बल देता है।

जब मन विश्राम करता है...

जब मन विश्राम करता है तब बुद्धि तीक्ष्ण हो जाती है। जब मन आकांक्षा, ज्वर या इच्छा जैसी छोटी-छोटी चीजों से भरा हो तब बुद्धि क्षीण हो जाती है और जब बुद्धि तथा ग्रहण क्षमता तीक्ष्ण नहीं होती तब जीवन को पूर्ण अभिव्यक्ति नहीं मिलती। नये विचार नहीं आते तथा हमारा सामर्थ्य दिन-प्रतिदिन कम होने लगता है। इस ज्ञान से हम अपने छोटे मन के दायरे से बाहर कदम निकाल सकते हैं और यह कदम जीवन की कई समस्याओं का समाधान देगा। केंद्रित रहने से हमेशा खुशी पास रहती है।

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