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मुस्लिम राष्ट्रीय मंच - एक सिंहावलोकन

विराग पाचपोर

24 दिसंबर 2002, दिल्ली के चाणक्यपुरी में देश के 14 राज्यों से मुस्लिम बुद्धिजीवी, आलीम, मौलाना और सामाजिक कार्यकर्ता ईद मिलन के निमित्त एकत्रित आये थे। उन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक श्री कुप्प. सी. सुदर्शन जी और आदरणीय श्री इन्द्रेश कुमार जी भी थे। साथ में ऑल इंडिया इमाम कौंसिल के अध्यक्ष मौलाना जमील अहमद इलियासी, इस्लामिक विद्वान मौलाना वहीदुद्दीन खान, मुफ्ती मोहम्मद मुकर्रम आदि दानिश्वर सम्मिलित थे। इस चर्चा में बातचीत के दौरान श्री सुदर्शनजी ने दो सवाल मुस्लिम नेताओं के सामने रखे।

पहला सवाल था, 'भारत के 99.99 प्रतिशत मुसलमान यहीं के हैं, भारत के बाहर से नहीं आये हैं । तब आप स्वयं को 'अल्पसंख्यक' क्यों मानते हैं? वे स्वयं को इस देश के मुख्यधारा का क्यों नहीं समझते?'

और दूसरा सवाल था, 'इस्लाम का सही अर्थ अमन, सलामती, भाईचारा हैं। पर आज दुनिया को जो इस्लाम दिखाई देता हैं वह मजहब के नाम पर बहुत क्रूर, आतंकी, हिंसक और अशांति फैलाने वाला हैं। सही इस्लाम कौन सा हैं? और दुनिया को इस्लाम का सही स्वरुप समझाने की जिम्मेदारी किसकी हैं?'

ये दोनों प्रश्न उस बैठक में उपस्थित मुस्लिम नेताओं के लिए अनपेक्षित और नए थे। मौलाना जमील इलियासी ने सब की ओर से उत्तर देते हुए कहा की, 'ऐसे सवाल हमसे आज तक किसी ने किये नहीं। आप पहले ऐसे शख्स हो जिसे यह सवाल कर हमारे अन्दर एक हलचल पैदा की हैं। पर आज ही हम इस के जबाब आप को दे नहीं सकेंगे। हम इस सवालों को लेकर हमारे लोगों के बीच जायेंगे, उनसे सलाह मशविरा करेंगे और बाद में आप को जबाब देंगे।'

खैर, इन सवालों के जबाब तो बाद में मिले, पर इस बैठक का नतीजा यह हुआ की देश के मुसलमानों के बीच वतनपरस्ती, हुब्बल वतनी, शिक्षा, रोजगार, महिलाओं के प्रति सम्मान आदि विषयों की अलख जगाने दृष्टी से एक राष्ट्रव्यापी संगठन की आवश्यकता पर भरपूर विचार मंथन हुआ और उस मंथन से जन्म हुआ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच नामक तहरीक का।

जिस काल में इस तहरीक की शुरुआत हुई वह बहुत ही उथल-पुथल वाला समय था। स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जे के नेतृत्व में केंद्र में एन. डी. ए. की 24 पार्टियों की सरकार सत्ता में थी। गुजरात में गोधरा कांड की बहुत हिंसक प्रतिक्रिया हुई थी जिसके चलते कांग्रेस और अन्य सेक्युलर और लेफ्ट पार्टियों ने मुसलमानों के मन में हिन्दुओं के और खास कर आरएसएस के बारे में बहुत ही कड़वा जहर घोल दिया था। परन्तु गोधरा कांड और उसकी हिंसक प्रतिक्रिया ने मुस्लिम नेतृत्व में हिन्दू-मुस्लिम संबंधों पर नए सिरे से सोचने की आवश्यकता को भी महसूस करना शुरू किया था।

ऐसे पाश्र्वभूमि पर वरिष्ठ पत्रकार मरहूम पद्मश्री मुजफ्फर हुसेन ने अगुवाई कर आरएसएस के प्रमुख नेता और मुस्लिम दानिश्वरों की इस प्रकार की एक वार्ता का आयोजन किया था जिस में उपर निर्दिष्ट महानुभाव शरीक हुए थे और उन के चिंतन-मनन और विचार मंथन से इस तहरीक का जन्म हुआ।

परन्तु 2004 के चुनावों में एन. डी. ए. की सरकार सत्ता से बाहर हुई और सोनिया गांधी की नेतृत्ववाली कांग्रेस द्वारा गठित यू.पी.ए. की सरकार सत्तासीन हुई। हिन्दू और मुस्लिम समुदायों के बीच मेल-मिलाप बढ़े और देश की तरक्की में दोनों सामान रूप से भागीदार बने इस में कांग्रेस और अन्य सेक्युलर पार्टियों को राजनीतिक नुकसान दिखाई देने लगा और इसलिए इस प्रयास को कैसे विफल किया जाय इस पर षड्यंत्र बुनने शुरू हो गए।

इतने में देश में मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस, मुंबई आदि स्थानों पर आतंकी हमले हुए। इसका फायदा उठाते हुए कांग्रेस ने 'हिन्दू आतंकवाद, 'भगवा आतंकवाद के नाम से देश के उदारमतवादी हिन्दू और मुस्लिम समाज को जहां एक और बहकाने और भड़काने का काम किया वहीं दूसरी और आरएसएस को लक्ष्य बनाकर उसके नेताओं को इस जाल में फंसाने का प्रयास भी किये। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक के दायित्व में इस समय आदरणीय श्री इन्द्रेश कुमारजी थे तो सोनिया कांग्रेस और यूपीए सरकार की रडार पर सब से पहले उनका नाम आना तय था । वैसा हुआ भी ।

मंच का काम शुरू हुआ ही था की यह एक नयी समस्या निर्माण हुई। यूपीए सरकार ने सोनिया गांधी के शह पर मिडिया में आदर्निय्स श्री इन्द्रेश जी के और संघ के खिलाफ जितना जहरीला प्रचार कर सकते थे किया ताकि मुस्लिम समाज इनका साथ ना दे। पर हुआ उल्टा। और जब एन आई ए ने श्री इन्द्रेश जी को पूछताछ के लिए अपने कार्यालय में बुलाया था तो मंच हजारों मुस्लिम कार्यकर्ता पूछताछ पूरी होने तक एनआईए के ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे थे। ऐसे विपरीत स्थिति में मंच का काम आगे बढ़ा और मुस्लिम समुदाय में एक नया विश्वास जगाने में मंच सफल रहा।

आज अठारह साल बाद जब इस तहरीक के इतिहास का अवलोकन करते हैं तो यह ध्यान में आता हैं की, जवानी की दहलीज पर पांव रखते हुए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने बहुत से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किये हैं और बहुत ही संवेदनशील सामाजिक तथा राष्ट्रहितों के मुद्दों पर मुस्लिम समाजमन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सफलता प्राप्त की हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल के सदस्य डॉ. श्री इन्द्रेश कुमारजी के मार्गदर्शन में और मोहमम्द अफजल, सलाबत खान, डॉ. शहीद अख्तर, डॉ. ताहिर, एस. के. मुद्दीन, अबू बकर नकवी, रजा रिजवी, इस्लाम अब्बास, इरफान अली पिरजादे, एड. शिराज कुरैशी, अबू तालिब, डॉ. इमरान चौधरी, बहन सरोज खान, डॉ. लतीफ मगदूम, एड, मुस्तफा खान, नजीर मीर, डॉ. सलीम राज, मरहूम शहजाद अली, सदाकत हुसेन, मुश्ताक अंसारी, बहन रेशमा हुसेन, शहनाज अफजल, एड. शाहीन परवेज, जैसे समर्पित कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में आज मुस्लिम राष्ट्रीय मंच राष्ट्रीय हितों के लिए समर्पित देश के मुसलमानों का एक प्रमुख संगठन बन गया हैं। जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक और गोवा-गुजरात से असम -मणिपुर तक भारत के 25 राज्यों के 350-400 जिलों में 2500 से अधिक इकाइयों के साथ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के हजारों कार्यकर्ताओं ने अपने विविध क्रियाकलापों, एवं अभियानों के द्वारा लाखों मुस्लिमों से संपर्क स्थापित कर उन्हें राष्ट्र की मुख्य धारा से जोडऩे का सफल प्रयास किया हैं।

समाजजीवन के विभिन्न अंगों को स्पर्श करते हुए एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की बयार लाने हेतु मुस्लिम मंच ने शिक्षा, मदरसा, गौसेवा, महिला, बुद्धिजीवी, युवा एवं छात्र, मिडिया, जम्मू-कश्मीर, मौलाना, पर्यावरण जैसे प्रकोष्ठ स्थापन किये हैं जिन के द्वारा विभिन्न संवेदनशील मुद्दों पर जनजागृति करने का काम मंच करता हैं।

हाल ही में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने कोरोना वायरस के संकट में समाजसेवा की अनूठी मिसाल पेश कर लाखों लोगों को भोजन, मास्क और दवाई का वितरण किया। उसी प्रकार प्रधानमंत्री केयर्स फंड में 11 लाख से अधिक राशी का योगदान देकर सरकार का साथ भी दिया।

पाकिस्तान को चेतावनी अभियान जो भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस दिसंबर 6 से प्रारंभ हुआ है और स्वामी विवेकानंद जन्मदिन 12 जनवरी तक चलेगा, के दौरान मंच के कार्यकर्ता स्थान-स्थान पर कार्यक्रम कर पाकिस्तान ने भारत का बल्तिस्तान, पिओजेके, आदि भू प्रदेश कब्जा किया हैं उसे खाली करने की चेतावनी दे रहे हैं। साथ में फारुक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती जैसे अलगाववादी नेताओं को भी सावधानता का इशारा दे रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में हाल ही में संपन्न हुए डीडीसी चुनावों में मंच के कार्यकर्ताओं ने बहुत सक्रिय भूमिका निभाई और वहां की कश्मीरी जनता को मतदान में निर्भीक होकर सामिल होने का हौसला बढ़ाया जिसका परिणाम आज समूचे देश के सामने हैं।

'हम मजबूत - मजबूत भारत शपथ अभियान' के दौरान मंच के कार्यकर्ताओं ने देश भर में लाखों मुस्लिम परिवारों के साथ संपर्क प्रस्थापित कर 8.5 लाख से अधिक हस्ताक्षर एकत्रित किये हैं जिसमें स्वदेशी अपनाने, अमन, भाईचारा कायम करने, हिंसा न करने और हिंदुस्तान को दुनिया का सिरमौर देश बनाने के लिए प्रयत्न करने की शपथ दियी गयी।

मुस्लिम समाज में शिक्षा में महत्व को अधोरेखित करने और बच्चों को शिक्षा देने पर मंच ने प्रारंभ से ही जोर दिया हैं। 'आधी रोटी खायेंगे -बच्चों को पढ़ाएंगे' और 'तालीम जिंदगी के लिए - जिंदगी वतन के लिए' जैसी घोषणाएं देकर शिक्षा का अलख जगाने का प्रयास किया हैं। शिक्षा और मदरसा प्रकोष्ठ के माध्यम से मदरसों में दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम भी मिले इसलिए मदरसा संचालकों के सेमिनार का मंच ने सफल आयोजन किया हैं। इसी प्रकार सद्भावना सप्ताह, रक्षाबंधन ऐसे अनेक सामाजिक कार्यक्रमों के द्वारा मुस्लिम राष्ट्रीय मंच समाज में सकारात्मक वातावरण निर्माण करने का सफल प्रयास कर रहा हैं।

कोई भी भूखा ना रहे इस का ध्यान रखते हुए अनाज बैंक का अनोखा प्रयोग वाराणसी में शुरू किया गया। विशाल भारत संस्थान के माध्यम से प्रारम्भ इस अनोखे प्रयोग का संज्ञान संयुक्त राष्ट्रसंघ ने भी लिया। दुनिया के भूख के संकट पर सफलता पूर्वक मात करने के लिए यह अनाज बैंक का प्रयोग कारगर सिद्ध हो सकता हैं ऐसा संयुक्त राष्ट्रसंघ को प्रतीत हुआ।

इस प्रकार आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक डॉ. इन्द्रेश कुमार जी के मार्गदर्शन में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने अपने 18 वर्ष के प्रवास में देश—विदेश के मुस्लिम जगत में अपनी एक पैठ बनायीं हैं। मुस्लिम समुदाय का मुसलमानों के द्वारा चलाया जा रहा यह एक अनोखा समाज सुधार आन्दोलन हैं जो मुस्लिम समाज में हुब्बल वतनी के साथ बेटी-बचाओ- बेटी पढाओ, शिक्षा का महत्त्व, महिला सम्मान, तीन तलाक, गौरक्षा, अयोध्या जम्मू-कश्मीर जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर समाज का प्रबोधन कर एक नव जागरण लाने का सफल प्रयास कर रहा हैं। रसूल, कुरान और हदीस के दिखाए मार्ग पर चल कर मुस्लिम समाज सच्चा और नेक मुसलमान बने, कट्टरता का रास्ता ना अपनाये इसी उद्देश्य को लेकर मंच काम कर रहा हैं और आगे भी करता रहेगा।

बुद्धिजीवी और उलेमा ओं से संपर्क : मुस्लिम बुद्धिजीवी वर्ग के बीच मंच के काम को पहुँचाने के लिए और उनका समर्थन प्राप्त करने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर, राम जन्मभूमि, तीन तलाक, जैसे मुद्दों पर मंच ने समय-समय पर बुद्धिजीवी सम्मेलनों का आयोजन किया जिस में विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलपति, पुलिस अधिकारी, रिटायर्ड आर्मी, प्रोफेसर, डॉक्टर्स, वकील, जज, शामिल हुए थे। राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर मुस्लिम समाज का सकारात्मक मत परिवर्तन करने में यह सम्मलेन बहुत कारगर सिद्ध हुआ। आरएसएस के वर्तमान सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत, सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल, सह-संपर्क प्रमुख श्री रामलाल, श्री इन्द्रेश कुमार जैसे दिग्गज भी इन सम्मेलनों में सहभागी हुए और बुद्धिजीवियों का मार्गदर्शन किया।

उसी प्रकार उलेमा, मौलाना, और अन्य धार्मिक नेताओं के लिए मंच ने लखनऊ में 2012 में अखिल भारतीय उलेमा सम्मलेन का आयोजन किया था। इस सम्मलेन में देश भर से 1500 धार्मिक नेता उपस्थित हुए थे। देश में हिंसा का वातावरण समाप्त होकर अमन और भाईचारे का माहौल निर्माण करने में सभी ने सहयोग देने का निश्चय किया।

पर्यावरण यह एक महत्व का विषय हैं। मंच ने हर वर्ष रमजान के दौरान मदरसों, मस्जिदों में और घरों के सामने पौधे लगाने का आवहान किया था जिस को मुस्लिम समाज का अच्छा समर्थन मिला। मंच ने अलग से पर्यावरण प्रकोष्ठ बना कर उसके माध्यम से इस वर्ष पांच लाख से भी अधिक पौधे लगा कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया हैं।

रेहान याने तुलसी एक ऐसा पौधा हैं जिस को कुरान में बहुत पाक समझा जाता हैं। उसके दीदार करने से जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं ऐसी इस्लाम में मान्यता हैं। मंच ने एक मुहीम चला कर मुस्लिम घरों में इस रेहान के यानि तुलसी के पौधे लगाने की अपील की जिसे बहुत अच्छा प्रतिसाद मिला हैं।

विश्व के मुस्लिम देशों को इस्लाम का शांति और भाईचारे का सन्देश भारत की भूमि से वितरित करने के उद्देश्य से मंच ने अंतर्राष्ट्रीय रोजा इफ्तार और अंतर्राष्ट्रीय ईद मिलन के कार्यक्रमों का आयोजन दिल्ली और मुंबई में किया। इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते ऑनलाइन ईद मिलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में हजारो की संख्या में मुस्लिम भाई-बहने ऑनलाइन जुडी थी।

गौसेवा और गौरक्षा: गाय यह हिंदुस्तान में बहुत संवेदनशील मुद्दा रहा हैं। पैगम्बर साहब ने भी कहा हैं की गाय का गोश्त बीमारी हैं पर दूध और घी शिफा हैं। रसूल की इस सोच को आगे बढ़ाते हुए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने इस मुद्दे पर मुस्लिम समाज में व्यापक जनजागरण करने का भरसक प्रयास किया। सन् 2006 में विश्व मंगल गौ-ग्राम यात्रा के दौरान मुस्लिम समुदाय के साथ व्यापक संपर्क कर गौरक्षा के समर्थन में मंच ने 10.50 लाख हस्ताक्षर एकत्रित कर सरकार को सौंपे थे। उसी प्रकार प्रकोष्ठ के संयोजक मोहम्मद फैज खान ने 24 जून 201। से लेह-लद्दाख से ऐतिहासिक पंद्रह हजार किमी 'गौ-सेवा सद्भावना पदयात्रा' सफलतापूर्वक संपन्न कर देश के 25 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 5 करोड़ लोगों से भी अधिक लोगों से संपर्क कर उन्हें गाय के महत्व के बारे में अवगत कराया। इस यात्रा का पहला चरण कन्याकुमारी में समाप्त हुआ और दूसरा चरण माता वैष्णोदेवी के मंदिर पर। इसके साथ जगह-जगह पर मुस्लिम गौसेवक सम्मेलनों का भी आयोजन किया गया।

जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर भी ऐसा ही एक संवेदनशील मुद्दा रहा हैं। पाकिस्तान ने आतंकी भेज-भेज कर दुनिया के इस नंदनवन को तबाह कर दिया था। उस पर भारत की कांग्रेस की सरकार ने कट्टरपंथी ताकतों के साथ नरमी से पेश आकर उनके हौसले बढ़ाये थे। ऐसी स्थिति में सरकार के द्वारा नियुक्त वार्ताकारों के त्रि-सदस्यीय समिति ने जम्मू-कश्मीर को 'अधिक स्वायतत्ता' देने की शिफारिश की जो कांग्रेस सरकार ने मान मान ली थी। इसके खिलाफ जनमत जागृत करने हेतु मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने 'हम हिन्दुस्तानी - जम्मू-कश्मीर हिंदुस्तान का' अभियान 2010 में प्रारंभ किया। जंतर-मंतर पर हुए धरना कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से 10000 से अधिक मुस्लिम महिला-पुरुष दिसंबर की ठण्ड में शामिल हुए थे। इसी अभियान की अगली कड़ी के रूप में एक हस्ताक्षर अभियान चलाया गया जिसमे जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली विभाजनकारी धारा 370 और 35ए को निरस्त करने की मांग की थी। देशभर इस हस्ताक्षर अभियान में मंच के कार्यकर्ताओं ने लाखों मुसलमानों से संपर्क किया और 8.5 लाख से अधिक हस्ताक्षर एकत्रित किये जिसमे 70,000 से अधिक हस्ताक्षर जम्मू-कश्मीर के मुस्लिमों ने दिए थे। इस अभियान के अंतर्गत जम्मू में एक दो-दिवसीय सेमिनार का आयोजन भी किया था और उसके बाद मंच के एक शिष्टमंडल ने आदरणीय डॉ. इन्द्रेश कुमारजी के नेतृत्व में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को इन हस्ताक्षरों के साथ एक निवेदन सादर किया। भारत के लाखों मुस्लिम धारा 370 और 35ए के खिलाफ हैं यह जानकारी उनके लिए भी आश्चर्य चकित कर देने वाली थी और राष्ट्रपति महोदय ने तत्कालीन यूपीए सरकार के पास मंच का इस विषय पर अभिमत पहुंचाने का आश्वासन भी दिया।

तीन तलाक: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने प्रारंभ से ही महिलाओं के प्रति इस्लाम का और रसूल का सही दृष्टिकोण सामने रखते हुए तीन तलाक जैसे अमानवीय प्रथा के खिलाफ आवाज उठाना शुरू किया था। सन् 2005 में पुणे में आयोजित प्रथम मुस्लिम महिला सम्मलेन से लेकर 2015 में अजमेर में संपन्न अखिल भारतीय मुस्लिम महिला सम्मलेन में 7500 मुस्लिम बहनों की उपस्थिति में तीन तलाक के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर इस प्रथा को तुरंत निरस्त करने की मांग की गयी। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसका विरोध किया था पर वह इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ गया और आखिर मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस अमानवीय प्रथा को निरस्त करते हुए कानून बनाया और 8.5 करोड़ मुस्लिम बहनों को सम्मान से जीवन जीने का रास्ता खोल दिया।

तीन तलाक निरस्त करने का कानून, संविधान की धारा 370 को हटाना, और अयोध्या विवाद पर न्यायालय का निर्णय ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर मुस्लिम मंच के हजारो कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम समुदाय में जाकर उनको सही जानकारी देकर किसी प्रकार की अप्रिय घटना ना हो इसका पूरा प्रयास किया और वह सफल भी रहा क्यों की मुस्लिम समाज ने इन सभी मुद्दों को सही परिप्रेक्ष्य में स्वीकार किया।

अयोध्या विवाद: श्रीराम जन्मस्थान अयोध्या विवाद यह भी एक बहुत ही संवेदनशील और स्फोटक विषय था। पिछले 400 से अधिक वर्षों से यह मामला अनिर्णय के स्थिति में था और इसके लिए कई हजारों हिन्दुस्तानियों ने कुर्बानियां दी। इस मामले को सुलझाने में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने एक अहम् भूमिका निभाई। अल्लामा इकबाल ने श्रीराम को 'इमाम-ए-हिन्द' ने नामसे नवाजा था। भारत का मुस्लिम समाज भी श्रीराम को उसी रूप में देखता हैं। कुरान भी यह कहता हैं की अल्लाह ने मानव जाति को सही रास्ता दिखने के लिए इन दुनिया में एक लाख चौबीस हजार नबी समय-समय पर भेजे और मोहम्मद यह आखरी रसूल हैं। इसका मतलब यह हुआ की श्रीराम, श्रीकृष्ण, गुरु नानक, गौतम बुद्ध, महावीर, ईसा मसीह ये सभी अल्लाह के भेजे हुए नबी हैं और उनका सम्मान करना चाहिए। यह भी सही हैं की बाबर और उसके सेनापति मीर बांकी आक्रान्ता थे और उन्होंने अयोध्या में स्थित श्रीराम के मंदिर को तोड़कर वहां मस्जिद बनायी। इस्लाम के अनुसार जो जमीन किसी विवाद में फंसी हो वह मस्जिद के लिए उपयुक्त नहीं समझी जाती, उसी प्रकार मस्जिद खुदा के नाम पर ही हो सकती हैं किसी व्यक्ति के नाम पर नहीं। इन बातों को मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने मुस्लिम समुदाय के बीच ले जाने का सफल प्रयास किया। 15 दिसंबर 2018 को दिल्ली में एक सम्मेलन आयोजित जिसमे हजारो मुस्लिम देश के विभिन्न प्रदेशों से आये थे और बड़ी संख्या में मौलाना, आलिम और अन्य विद्वान लोग भी शामिल थे। इस सम्मेलन में सभी ने नारा दिया 'कसम खुदा की खाते हैं इमाम-ए-हिन्द श्रीराम का मंदिर वहीं बनवायेंगे। यह एक ऐतिहासिक प्रसंग था। उसके बाद मंच के कार्यकर्ता देश के विभिन्न हिस्सों में गए और मुस्लिम समुदाय को श्रीराम जन्मस्थान का सच समझाया।

इसका परिणाम यह हुआ की मंदिर विवाद में 5 नवम्बर 2019 को सर्वोच्च न्यायालय का जो भी निर्णय आया उसको भारत के मुसलमानों ने सहर्ष और शांतिपूर्वक स्वीकार किया और श्रीराम मंदिर निर्माण में अपना योगदान भी दिया।

वतन के शहीदों को सलाम: सन 2007 में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को 150 साल पूर्ण हो रहे थे। इसका लाभ उठाते हुए मंच ने पूरे देश में शहीदों को सलाम के कार्यक्रम आयोजित किये। अब हर वर्ष 10 मई से 26 जनवरी तक स्कूलों में, मदरसों में और अन्य स्थानों पर तिरंगा लहराकर शहीदों को याद किया जाता हैं। उसी प्रकार आतंकवाद के विरोध में मंच ने तिरंगा यात्राओं का आयोजन कर जिहादी आतंकवाद का विरोध जताया था। मुंबई में 2009 में हज हाउस से गेटवे ऑफ इण्डिया तक तिरंगा यात्रा का समापन का कार्यक्रम हुआ जिस में देश भर से मौलाना, बुद्धिजीवी और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुई थी।

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