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मानवता का शत्रु इस्लामी आतंकवाद: खोरासान इस्लामी राज्य

खोरासान भारत में मुसलमानों को ऑनलाइन भर्ती करने के साथ-साथ मुसलमानों को ऑनलाइन ट्रेनिंग स्ट्डी मटेरियल भी उपलब्ध करवा रहा है

मानवता का शत्रु इस्लामी आतंकवाद: खोरासान इस्लामी राज्य
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प्रो.रामदेव भारद्वाज

किसी भी प्रकार की हिंसात्मक गतिविधियों में संलग्नता ही आतंक और आतंकवाद है। अगर कोई व्यक्ति या संगठन अपने आर्थिक, राजनीतिक एवं विचारात्मक लक्ष्यों की प्रतिपूर्ति के लिए देश या देश के नागरिकों का दमन,उनका मर्दन लक्ष्य बनाता है तो यह आतंकवाद हैं। अत: गैर-राज्य कारकों द्वारा किये गए राजनीतिक,सांस्कृतिक एवं वैचारिक हिंसा भी आतंकवाद की ही श्रेणी में आती है। समसामयिक विश्व परिदृश्य में इस्लामी चरमपंथियों द्वारा हिंसा और आतंक को स्वायम्भू राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति का साधन निरुपित किया जा रहा है।

सम्पूर्ण विश्व में ऐसे ही अनेक आतंकी संगठनों का जाल फैला हुआ है। कई दशकों से मध्य पूर्व, अफ्रीका, यूरोप, दक्षिण पूर्व एशिया,भारत एवं अमेरिका में ये आतंकवादी संगठन सक्रिय है। विश्व में निम्नलिखित प्रमुख आतंकवादी जिनके साथ सैकड़ों सह-आतंकवादी संगठन सक्रिय है उनमें प्रमुख हैं, इस्लामिक स्टेट इन सीरिया एंड इराक, अल कायदा, तालिबान, लश्कर-ए-तैयबा,बोको हराम,पाकिस्तानी तालिबान,अल-नुसरा फ्रंट,जेमाह इस्लामिया,अल कायदा इन अरेबियन पेनिनसुला,अबू सय्याफ, हक्कनी नेटवर्क,जैश-ए-मोहम्म्द,लश्कर-ए-तैयबा,हिजबुल मुजाहिदीन, इंडियन मुजाहिदीन,अल कायदा,अल कायदा,जुनदुल्लाह,लश्कर-ए-झांगवी, इत्यादि इत्यादि...।

प्रस्तुत आलेख का उद्देश्य आतंकवादी संगठनों की सूची प्रस्तुत करना अथवा उनका वर्णन करना नहीं है अपितु इन आतंकवादी संगठनों के मकसद एवं गतिविधियों से जो मानवता के लिए घातक है, से अवगत करना है। यदि हम सभी जानते हंै कि इन आतंकवादी संगठनों में इस्लामी आतंकवादी संगठनों का एक ही लक्ष्य है, पूरी दुनिया में इस्लामी राज्य की स्थापना करना। इस संक्षिप्त लेख का मुख्य उद्देश्य इस्लामी आतंकवाद के घिनोने चहरे को और उनकी योजनाओं और घृणात्मक स्वरूप विशेषत: 'खोरासान इस्लामी राज्य' से सभी को अवगत करना है। साथ ही स्वयं की,एवं समाज की भूमिकाओं को पुन: निर्धारण की दिशा में जगरुक रहना, सक्रिय होना है।

इस्लामी आतंकवाद की दिशा और वस्तु स्थिति को पृथक दृष्टि से समझा जाना चाहिए। एक घटना से अपना विषय रख रहा हूं। 25 मार्च 2020 को अफगानिस्तान की राजधानी काबूल के एकमात्र सिख गुरुद्वारे पर एक जबरदस्त इस्लामिक आतंकी हमला हुआ, जिसमें 25 सिख मारे गये थे। वैसे अफगानिस्तान में गैर मुस्लिमों की हत्याएं और उनके पूजा स्थलों पर हमले कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान भी इस मामले हैं पीछे नहीं। पाकिस्तान में भी आए दिन हिन्दू धर्मियों की हत्याएं और हिन्दू धर्मिक स्थलों को जमीदमोश करने की नीति पर चल रहा है पाकिस्तान। पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वाह प्रांत में एक कृष्ण मंदिर को भीड़ ने ढहा दिया। उस भीड़ को भड़काया मौलाना मोहम्मद शरीफ ने, जिसका कहना था कि किसी मुस्लिम देश में मंदिरों को ढहाना तो पुण्य-कर्म है। पाकिस्तान जब बना था, वहां 480 मंदिर थे। अब 20 भी नहीं हैं। उसकी 15 प्रतिशत आबादी हिंदू थी। अब दो प्रतिशत भी नहीं है।

लेकिन 25 मार्च 20 को हुए इस हमले के बाद से दुनियाभर की और विशेषत: भारत की सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ी हुई है। कारण है कि इस हमले की जिम्मेेदारी इस्लामी राज्य खोरासान नाम के इस्लामिक आतंकी संगठन ने ली है। इस्लामिक स्टेइट ऑफ खोरासान क्या है यह भारतीय क्षेत्र के गैर मुस्लिमों के लिए क्यों गंभीर समस्या है, इसे समझने के लिए एक इस्लामिक स्टेट को समझना होगा। इस्लामिक स्टेट वर्तमान काल में मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। यह एक ग्लोबल इस्लामिक संगठन है, जो दुनिया में गैर मुस्लिमों को खत्म करके इस्लामिक शासन स्थापित करना चाहता है। इस संगठन के अनुसार गैर इस्लामिक शासन व्यवस्था और मान्यताएं नाजायज है। ये पूरी दुनियां में सरिया अर्थात इस्लामी कानून लागू करना चाहता है। आईएसआईएस अर्थात इस्लामिक स्टेट और इराक एंड सीरिया इस्लामी स्टेट की एक शाखा है। इस्लामी स्टेट एक शक्तिशाली, एक धन संपन्न संस्था है। जिसे दुनियाभर के मुसलमानों का समर्थन मिल रहा है। 1999 में शुरु में इस आतंकी संस्था ने 2014 में ग्लोबल कैलीफेट अर्थात वैश्विक खिलाफत की घोषणा करके दुनियाभर के मुसलमानों को इस्लामिक शासन लाने के लिए प्रेरित किया। इसके लिए इन्होंने दुनिया को 20 हिस्सों में बांटा है। जैसे इस्लामिक स्टेट ऑफ ख्वाजा, इस्लामिक स्टेंट ऑफ लीबिया इत्यादि। ऐसे ही एक हिस्से को इस्लामिक स्टेट ने नाम दिया है खोरासान। जिसमें इन्होंने ईरान का उत्तरीय पूर्वी भाग अफगानिस्तान, पाकिस्तान और मध्य एशिया के तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान आदि को रखा है। 2015 में इस्लामिक स्टेट ने ग्रेटर खोरासान का मेप जारी किया, जिसमें इन्होंने भारत, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश को भी रखा है। इनका उद्देश्य इस पूरे हिस्से में गैर मुस्लिमों को खत्म करके 'इस्लामिक सरिया' स्थापित करना है। इस्लामिक स्टेट ऑफ खोरासान दुनियाभर की सुरक्षा एजेन्सी के रेडार पर तब आया जब पता चला कि इस्लामिक स्टेट सीरिया और ईराक में अपनी जमीन खिसकने के बाद खोरासान को अपना केंद्र बना रहा है। इस्लामिक स्टेट की इस रणनीति के पीछे कई कारण है, जिसमें सबसे बड़ा कारण है इस हिस्से की बढ़ी मुस्लिम जनसंख्या। पाकिस्तान 96.5 प्रतिशत, बांग्लादेश 90.4 प्रतिशत, अफगानिस्तान 99.7 प्रतिशत, मालद्वीप शत् प्रतिशत, इण्डोानेशिया 87.2 प्रतिशत, ईरान 99.4 प्रतिशत ।

वर्तमान में भारत-इण्डोनेशिया के बाद सबसे ज्यादा मुस्लिम जनसंख्या वाला देश है और 2050 तक दुनिया में सबसे ज्यादा मुसलमान भारत में ही होंगे। वैसे तो मुसलमानों द्वारा इस्लाम के आरंभ से ही गैर मुस्लिमों को खत्म कर भारत में इस्लामिक सत्ता स्थापित करने के लगातार प्रयास किये जाते रहे हैं। लेकिन भारत ने गैर मुस्लिमों के लिए इस्लामिक स्टेट खोरासान का यह खतरा और भी अधिक बड़ा है। सीरिया में भारत के राजदूत रह चुके राजेन्द्र अभ्यंंकर के अनुसार इस्लामिक स्टेट के एजेण्डा में भारत भी शामिल है। हिन्दूू बाहुल्य भारत पर कब्जा कर इस्लामिक स्टेट खोरासान दुनिया के इस्लामिक देशों में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। आए दिन पूरे भारत से इस्लामिक स्टेट खोरासान से संबंध रखने वाले आतंकवादियों का पकड़ा जाना इस बात का प्रमाण है कि भारत में इस्लामिक स्टेट खोरासान को मुसलमानों का पूरा समर्थन मिल रहा है।

2019-20 में दिल्ली में सीएए और एनआरसी के विरोध में हुए प्रदर्शन और दंगों का इस्लामिक स्टेट से गहरा संबंध था। इसका पता तब चला जब दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के जामिया नगर से इस्लामिक स्टेट खोरासान के आतंकवादियों जहानजिर सामी और हिनाबसिर बेग को गिरफ्तार किया। बैंगलोर में एन.आई.ए. द्वारा गिरफ्तार आतंकवादियों कादिर और नासिर ने बताया कि भारत में इस्लामिक शासन लाने के लिए वे बैंगलोर में कुरान सर्कल नाम का एक समूह चला रहे थे।

इस्लामिक स्टेट के अलहिंद मॉड्यूल ने कर्नाटका, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश और केरला के जंगलों में आईएसएसआई प्रांत की स्थापना कर दी थी। इसका पता तब चला जब एन.आई.ए. ने 17 आतंकवादियों के खिलाफ 14 जुलाई को चार्जशीट दायर की। तमिलनाडू के एक मस्जिद में ईद पर बड़ी तायदात में मुसलमानों ने इस्लामिक स्टेट के समर्थन में टी-शर्ट पहनकर फोटो शूट कराया व नारे लगाए। आईएसके के न जाने कितने मौहूल भारत में सक्रिय है, जो भारत में इस्लामिक शासन लाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इनमें बड़े-बड़े मुसलमान व्यापारी, जीम ट्रेनर, स्टूडेंट, इंजीनियर, डॉक्टर आदि सभी शामिल हैं। जिहादी विचारधारा वाले मुसलमान या तो सीधे-सीधे इस्लामिक स्टेट में भर्ती हो रहे हैं या गुप्त रुप से इस्लामिक स्टेट के अपने एजेण्डा को आगे बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में मुसलमान इस्लामिक स्टेट के लिए फ्रीलांस के तौर पर काम कर रहे हैं।

इस्लामिक स्टेट खोरासान भारत में मुसलमानों को ऑनलाइन भर्ती करने के साथ-साथ मुसलमानों को ऑनलाइन ट्रेनिंग स्ट्डी मटेरियल भी उपलब्ध करवा रहा है। भारत में इस्लामिक स्टेट खोरासान की जड़े कितनी गहरी हो चुकी है, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि काबूल गुरुद्वारे हमले में भी भारत का मुसलमान मोसिम उर्फ खालिद अल हिंदी शामिल था। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी रहे रासल डार्वेस ने एक प्रश्न के जवाब में कहा था, इस्लामिक स्टेट खोरासान ने भारत में आत्माघाती हमले के प्रयास किए हैं। एक तरफ जहां इस्लामिक स्टेट सीधे-सीधे हिंदुओं को खत्म करने की धमकी दे रहा है। वहीं भारत सरकार इसे एक गंभीर खतरा मानने से भी इंकार कर रही है। कुछ समय पहले इसे इस्लामिक स्टेट की समाचार एजेंसी अमाक ने भारत में इस्लामिक स्टेट की एक नई शाखा विलाहा ऑफ हिंद स्थापित करने का आव्हान किया था। साथ ही साथ आईएस खोरासान लगातार हिंदू मंदिरों और हिंदू विचारधारा वाले नेताओं को भी टारगेट कर रहा है।

इस्लामिक स्टेट खोरासान भारत की क्षेत्रीय एवं सांस्कृतिक एकता के लिए गंभीर खतरा है। हालांकि भारत सरकार ने इस्लामिक स्टेट के गतिविधियों से निपटने के लिए ऑपरेशन चक्रव्यूह लाया था, लेकिन यह अधिक सफल नहीं हो सका। भारत में इस्लामिक स्टेट खोरासान के लगातार बढ़ते प्रभाव ने अन्य संस्कृतियों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर दिया है। इस्लामिक स्टेट खोरासान ने भारत में शताब्दियों से चल रहे सांस्कृतिक टकराव को एक नई गति दे दी है। अगर जल्द ही समाज इनके खिलाफ कड़ा रूख नहीं अपनाता है तो गैर इस्लामिक संस्कृतियों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

(लेखक : कुलपति अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय भोपाल)

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