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'विज्ञान वर्ष' के रूप में साल 2020

आईआईएसएफ इस वर्ष वर्चुअली 22 दिसम्बर से 25 दिसम्बर तक मनाया जा रहा है

विज्ञान वर्ष के रूप में साल 2020
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डॉ. हर्षवर्धन

मानव जाति 2020 की शायद केवल एक ही घटना को याद करेगी और वह उस घातक और अज्ञात वायरस को जिसने दुनिया भर में कहर बरपाया, जिससे पन्द्रह लाख लोगों की मौत हो गई और अभूतपूर्व आर्थिक तबाही हुई। इतिहास यह भी याद करेगा कि किस प्रकार विज्ञान ने मनुष्य को बचाने का काम किया और वैश्विक सहयोग के साथ अनुसंधान और विकास पर ध्यान कैसे केन्द्रित हुआ। वर्ष 2020 'विज्ञान का वर्ष' रहा है जब कोविड-19 महामारी के अचानक हुए हमले के कारण उत्पन्न निराशा के बीच इंसानियत का श्रेष्ठ पहलू दिखाई दिया। यह रिकॉर्ड करने लायक है कि जैसे-जैसे बीमारी तेजी से फैलती गई, वैसे-वैसे इसे कम करने के लिए शोध के प्रयास शुरू हुए। प्रमुख वैश्विक सहयोग स्थापित किए गए ताकि वैज्ञानिक अपनी विशेषज्ञता को साझा कर सकें। सुरक्षा के साथ समझौता किए बिना नैदानिक परीक्षणों को गति देने के लिए योजनाएं लागू की गईं ताकि उपचार, टीके और निदान तेजी से हो सके। इस सारे काम के लिए, सरकारें, व्यवसाय और परोपकारी संगठन एकजुट हो गए और संसाधनों की मदद से काम शुरू कर दिया। यही कारण है कि मैं कहता हूं कि यह केवल विज्ञान नहीं है जो इस वर्ष उल्लेखनीय रहा है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग भी है।

वास्तव में, दुनिया भर के वैज्ञानिकों की समर्पण की भावना प्रशंसनीय रही है, न केवल लोगों के जीवन की डोर उनके हाथ में थी जिसे बचाने के लिए उन्होंने भरसक प्रयास किया बल्कि इस कार्य को अभूतपूर्व गति से किया। मैं कोविड-19 अनुसंधान प्रतिक्रिया का समर्थन करने वाले और हमें गौरवान्वित करने वाले प्रत्येक संगठन की सराहना करता हूं।

इस महामारी की सबसे बड़ी सफलता टीमवर्क और वैज्ञानिक समुदाय रहा जिसने व्यक्तिगत पहचान हासिल करने की होड़ में न पड़ते हुए नतीजों को अंजाम तक पहुंचाया। वैज्ञानिकों और संगठनों ने वास्तव में एक सार्थक लक्ष्य हासिल करने पर ध्यान केन्द्रित किया, चाहे वह देश भर में, एक महाद्वीप में या दुनिया भर के लिए रहा हो।

महामारी के दौरान, वैज्ञानिकों ने दिखा दिया है कि हम किसी भी गति से काम कर सकते हैं, अपनी नैदानिक और देखभाल की गुणवत्ता को बनाए रख सकते हैं, इस तरह का आत्मविश्वास और विश्वास पैदा कर सकते हैं कि गति का मतलब गुणवत्ता से समझौता नहीं है।

मेरा व्यक्तिगत रूप से हमेशा मानना रहा है कि विज्ञान और स्वास्थ्य सेवा पर हमारे सहयोग का लाभ सभी को समान रुप से देने की आवश्यकता है। हमें इसे दुनिया में हर किसी तक पहुंचाना चाहिए, और एक समान दुनिया बनानी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में, मैं इस बारे में देशों, फंडिंग एजेंसियों, वैज्ञानिकों और परोपकारी लोगों से बात कर रहा हूं। सभी की प्रतिबद्धता है और मैं इसे 2020 के सबसे महत्वपूर्ण नतीजों में से एक मानता हूं। महामारी के परिप्रेक्ष्य में, एक बार फिर यह इस बात का प्रतीक है कि विज्ञान समुदाय ने सामाजिक समस्याओं को दूर करने के लिए लगातार और अथक प्रयास किए हैं। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पिछले साढ़े छह वर्षों में हमारी सरकार ने जो विकास संबंधी कार्य किए हैं, वह हमारे वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और नवप्रवर्तकों द्वारा किए गए प्रयासों का प्रतीक है। 2015 से इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ) आयोजित करने का प्रयास वास्तव में इस पहलू की सराहना करने के लिए ही किया गया है। आईआईएसएफ का उद्देश्य जनता को विज्ञान से जोडऩा और यह दिखाना है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) किस प्रकार हमें अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए समाधान प्रदान करते हैं। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, विज्ञान भारती (वीआईबीएचए) के सहयोग से आईआईएसएफ नाम का यह अनूठा मंच बनाया है जो जिज्ञासा को प्रेरित करने और विज्ञान के अध्ययन को अधिक लाभप्रद करने का इरादा रखता है।

महोत्सव का उद्देश्य विशेष रूप से छात्र समुदाय तक पहुंच बनाना है ताकि उनकी वैज्ञानिक भावना को जागृत किया जा सके। एक छोटी सी घटना के रूप में शुरू किया गया, महोत्सव अब छात्रों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, मीडिया और आम जनता को शामिल करते हुए एक बहुप्रतीक्षित वार्षिक वैज्ञानिक समागम में तब्दील हो गया है।

आईआईएसएफ समाज के सभी वर्गों और विविधपृष्ठभूमि से आनेवाले लोगों के लिए खुला मंच है जो जीवन के सभी क्षेत्रों में विज्ञान की गतिविधियों, उपलब्धियों और नवाचारों का अनुभव और आनंद लेना चाहते हैं। मुझे यह देखकर खुशी हुई कि आईआईएसएफ का हर संस्करण बड़ा और बेहतर होता जा रहा है और बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित कर रहा है। कार्यक्रम विज्ञान के एक उत्सुकता से प्रतीक्षित उत्सव के रूप में उभरा है। आईआईएसएफ में वैज्ञानिक घटनाओं ने वैश्विक रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं जिन्हें प्रतिष्ठित गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड के पन्नों में दर्ज किया गया है। आईआईएसएफ इस वर्ष वर्चुअली 22 दिसम्बर से 25 दिसम्बर तक मनाया जा रहा है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), अपने राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विकास अध्ययन संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएसटीएडीएस) के माध्यम से इस जबरदस्त वर्चुअल कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है।

आईआईएसएफ 2020 का विषय 'साइंस फॉर सैल्फ-रिलायंट इंडिया एंड ग्लोबल वेलफेअर' है, जो वैश्विक स्तर पर अच्छा योगदान दे सकने वाले आत्मनिर्भर भारत के निर्माण केलिए माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान पर आधारित है। इस चार दिवसीय विज्ञान महोत्सव का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर अन्य देशों को आकर्षित करने के लिए देश की ताकत को मजबूती देना और उसका विस्तार करना है। आईआईएसएफ 2020 में युवाओं और नये नये अविष्कार करने वालों को आकर्षित करने के लिए एसटीईएम शिक्षा को कवर करने वाले 41 विभिन्न कार्यक्रमों को शामिल किया गया है।

अगर 2020 कोविड-19 के टीके की खोज का वर्ष रहा है, तो 2021 वह वर्ष होगा जब हम इसे दुनिया भर में ऐसे लोगों तक पहुँचाने की चुनौती का सामना करेंगे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

आइए, इसआईआईएसएफ 2020 में हम वर्तमान महामारी को समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोगुना करें और सहयोग को और बढ़ाएं ताकि विज्ञान को जीवन रक्षक बनाना संभव हो सके।

वर्ष 2020 विनाश के साथ, एक महान वैज्ञानिक सफलता की कहानी लेकर आया। मेरे लिए महत्वपूर्ण यह है कि सबसे पहले वैज्ञानिकों ने ही आगे बढ़कर इस गंभीर मानवीय खतरे का सामना किया। एक ही समय में, सभी निम्न और मध्यम-आय वाले देशों को सुरक्षित और प्रभावी कोविड-19 जांच, उपचार और टीके की पहुंच सुनिश्चित करना प्रमुख चुनौती है।

इस वर्ष जिन वैज्ञानिकों ने टीके, जांच और उपचार के लिए अपना सब कुछ दे दिया, उनके कार्यों की उच्च स्वर में सराहना और उन्हें एक बड़ा

(लेखक केन्द्रीय विज्ञान और प्रोद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हैं। )

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