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सोनू निगम के बाद अदनान और अलिशा ने किया म्यूजिक माफिया का जिक्र

सोनू निगम के बाद अदनान और अलिशा ने किया म्यूजिक माफिया का जिक्र
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नई दिल्ली. सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद फिल्म इंडस्ट्री में नेपोटिज्म, कैंपबाजी और बुलिंग को लेकर शुरू हुई बहस अब म्यूजिक माफिया तक पहुंच गई है। सोनू निगम के बाद सिंगर अदनान सामी और अलिशा चिनॉय ने भी इंडस्ट्री के म्यूजिक माफिया के खिलाफ आवाज उठाई है। अदनान ने सोमवार रात को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए भारतीय फिल्म और म्यूजिक इंडस्ट्री में गंभीर आमूलचूल परिवर्तन को जरूरी बताया।

अदनान सामी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'भारतीय फिल्म और संगीत उद्योग को गंभीरता के साथ एक बहुत बड़े उठापटक की जरूरत है। विशेषकर संगीत, नए गायकों, वरिष्ठ गायकों, म्यूजिक कंपोजर्स और म्यूजिक प्रोड्यूसर्स के मामले में, जिनका बुरी तरह शोषण हो रहा है। या तो उनकी तानाशाही सहो, या फिर तुम बाहर... 'रचनात्मकता' को वे लोग नियंत्रित कर रहे हैं, जिनके पास ना तो 'रचनात्मकता' का कोई सुराग है, फिर भी वे भगवान बनने की कोशिश कर रहे हैं??'

हम लोगों को क्या दे रहे हैं सिर्फ रीमेक और रीमिक्स

आगे उन्होंने लिखा, 'ईश्वर की कृपा से भारत में हमारे पास 1.33 अरब लोग हैं, क्या उन्हें देने के लिए हमारे पास सिर्फ रीमेक और रीमिक्स ही हैं? भगवान की खातिर इसे रोकें और वास्तव में प्रतिभाशाली नए और अनुभवी कलाकारों को सांस लेने दें और खुद को संगीतमयी और सिनेमाई रचनात्मकता से शांति दें।'

कुछ लोगों ने खुद को स्वयंभू भगवान मान लिया

'आपके पास ऐसे मूवी और म्यूजिक 'माफिया' हैं, जिन्होंने बड़े घमंड के साथ अपने आप को स्वयंभू और स्व-नियुक्त भगवान मान लिया है, जिन्होंने इतिहास से कुछ भी नहीं सीखा कि आप कला और किसी भी क्षेत्र में रचनात्मकता के पारिस्थितिक तंत्र को कभी नियंत्रित नहीं कर सकते हैं।'

आप कुछ वक्त के लिए ही मूर्ख बना सकते हो

'बस अब बहुत हुआ, अब यहां से खिसकना होगा, परिवर्तन यहां है और वो आपके दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। तैयार हो या नहीं, वो अंदर आ रहा है। अपने आपको संभालो। जैसा कि अब्राहम लिंकन ने कहा था, आप कुछ लोगों को कुछ समय के लिए मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन आप सभी लोगों को हर समय मूर्ख नहीं बना सकते हैं।'

अलिशा चिनॉय ने इंडस्ट्री को जहरीली बताया

अलिशा चिनॉय ने भी म्यूजिक माफिया कि खिलाफ आवाज उठाते हुए अदनान सामी की पोस्ट को शेयर किया। इसके साथ उन्होंने अपनी ओर से लिखा, 'ये एक जहरीली इंडस्ट्री है... जहां मूवी और म्यूजिक माफिया आपको डर और ताकत से नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं... यहां बिना किसी नैतिकता के काम लिया जाता है और कोई निष्पक्ष व्यवहार भी नहीं होता। यहां बेहद छल-कपट से भरे अनुबंधों के साथ काम कराया जाता है और फिर ऐसे जताते हैं, जैसे उन्होंने बहुत बड़ा अहसान कर दिया हो। एक्सक्यूज मी??'

आगे अलिशा ने लिखा, 'कृपया कलाकारों को बड़ा मानना और उनका सम्मान करना सीखें, जो आपका पेट भरते हैं... लेकिन अगर आप उनके तलवे नहीं चाटते हैं, और उनके असुरक्षित अहम की मसाज नहीं करते हैं तो वे आपका बहिष्कार कर देंगे और हमेशा के लिए बर्बाद करने की कोशिश करेंगे... ये पूरा सिस्टम ही बेकार है... लेकिन बुलबुला बस फूटने ही वाला है। मैं बस चुपचाप बैठकर कर्मा को रीसेट होते हुए देखने वाली हूं... किसी को पॉपकॉर्न चाहिए क्या..???'

सोनू ने कहा था- 'फिल्मों से बड़ा माफिया म्यूजिक इंडस्ट्री में है'

बीते कुछ दिनों में सोनू ने दो वीडियो शेयर करते हुए म्यूजिक इंडस्ट्री में काबिज म्यूजिक माफिया का मुद्दा उठा चुके हैं। 18 जून को शेयर किए अपने पहले वीडियो में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि आने वाले वक्त में म्यूजिक इंडस्ट्री से भी सुसाइड की खबरें सुनने को मिल सकती हैं।

उन्होंने कहा था, 'मैं इस वीडियो के जरिए म्यूजिक इंडस्ट्री से एक निवेदन करना चाहता हूं, क्योंकि आज सुशांत सिंह राजपूत मरा है। एक एक्टर मरा है। कल को आप किसी सिंगर के बारे में भी ऐसा सुन सकते हैं या फिर किसी म्यूजिक कंपोजर के बारे में भी। या किसी गीतकार के बारे में सुन सकते हैं। क्योंकि हमारे देश में म्यूजिक इंडस्ट्री का जो माहौल है, दुर्भाग्य से फिल्मों से बड़ा माफिया म्यूजिक इंडस्ट्री में है।'

म्यूजिक इंडस्ट्री पर दो कंपनियों का राज

सोनू ने आगे कहा था, 'मैं सबसे बात करता हूं। कितने लड़के-लड़कियां मुझसे इस बारे में बात करते हैं। वो बच्चे हैं, परेशान हैं वो कि निर्माता काम करना चाहते हैं, निर्देशक काम करना चाहते हैं, म्यूजिक कंपोजर काम करना चाहते हैं लेकिन म्यूजिक कंपनी बोलेगी कि ये हमारा आर्टिस्ट नहीं है।'

'मैं समझ सकता हूं कि आप लोग बहुत बड़े हैं, आपलोग म्यूजिक इंडस्ट्री को कंट्रोल करते हैं कि रेडियो में क्या बजेगा, फिल्मों में। लेकिन ऐसा मत कीजिए। दुआ-बद्दुआ बहुत बड़ी चीज होती है। ये ठीक नहीं है। ये जो दो लोगों के हाथों में ताकत है ना, दो लोग हैं बस म्यूजिक इंडस्ट्री के, दो कंपनी हैं। उनके हाथों में ताकत है कि वो तय करें कि कौन गाना गाएगा, और कौन नहीं गाएगा।'

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