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सांवली रंगत के लिए बिपाशा बसु को बचपन से सुनने पड़े ताने, मेरी एक्टिंग से ज्यादा मेरे रंग की चर्चा होती थी

सांवली रंगत के लिए बिपाशा बसु को बचपन से सुनने पड़े ताने, मेरी एक्टिंग से ज्यादा मेरे रंग की चर्चा होती थी
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नई दिल्ली. अमेरिका में हुई जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद से ही पूरी दुनिया में ब्लैक लाइव्स मैटर का समर्थन किया जा रहा है। इसी बीच भारत में भी लगातार ब्यूटी क्रीम के उत्पाद को लेकर विवाद जारी हैं। कई सेलेब्स ऐसे भी थे जो ब्यूटी ब्रांड का हिस्सा होने पर ट्रोलर्स के शिकार भी हुए। विवाद बढ़ने के बाद अब हिंदुस्तान यूनिलिवर कंपनी ने पॉपुलर क्रीम फेयर एंड लवली के नाम से फेयर शब्द हटाने का फैसला किया है। इस खबर के सामने आते ही बिपाशा बसु ने भी सांवला रंग होने पर अपनी आपबीती शेयर की है।

बचपन से सुने ताने

बिपाशा ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से खबर शेयर करते हुए लिखा, 'जब मैं बड़ी हो रही थी तो मैंने अक्सर सुना कि बोनी, सोनी से ज्यादा काली है। वो थोड़ी सांवली है ना। जबकि मेरी मां भी डस्की ब्यूटी थीं और मैं काफी हद तक उनकी तरह ही लगती थी। मुझे कभी पता नहीं चला कि मेरे रिश्तेदार इस बारे में चर्चा क्यों करते थे'।

नाम के साथ जुड़ा सांवला रंग

जब में 15,16 साल की थी तब मॉडलिंग शुरू की। मैंने सुपरमॉडल कॉन्टेस्ट जीता था। हर न्यूजपेपर में खबर थी कि कोलकाता की सांवली लड़की विनर बनी। मैंने फिर सोचा कि मेरे नाम का पहला विश्लेषण सांवली क्यों है। फिर मैं न्यूयॉर्क और पेरिस गई मॉडलिंग करने के लिए और मुझे एहसास हुआ कि मेरे स्किन कलर के लिए मुझे यहां ज्यादा काम और ध्यान मिलता है। ये मेरी अलग खोज थी।

मेरे काम से ज्यादा हुई सांवलेपन की चर्चा

जब मैं वापस आई तो मुझे फिल्म के ऑफर मिलना शुरू हुए। आखिरकार मैंने अपनी पहली फिल्म की, मैं इंडस्ट्री से पूरी तरह अजनबी थी। अचानक ही मुझे अपना लिया गया और पसंद किया गया। मगर विश्लेषण जुड़ा रहा। सांवली लड़की ने अपनी डेब्यू फिल्म से ऑडियंस को इंप्रेस किया। मेरे ज्यादातर आर्टिकल में मैंने जितना काम किया उससे ज्यादा चर्चा मेरे रंग की थी। मैं इसे नहीं समझ पाई। मेरे ख्याल से सेक्सी एक पर्सनालिटी है ना कि रंग। क्यों मेरे सांवलेपन के चलते मुझे बाकी एक्ट्रेस से अलग समझा गया। मुझे ज्यादा फर्क नहीं समझ आता मगर लोग बनाते हैं।

मैं कभी नहीं रुकी

यहां एक मानसिकता है खूबसूरती की और कैसे एक एक्ट्रेस को दिखना और बिहेव करना चाहिए। मगर मैं अलग थी। इसने मुझे कभी वो करने से नहीं रोका जो मुझे पसंद है। मैं कॉन्फीडेंट थी जो मैं बचपन से हूं। मेरा स्किन कलर मुझे डिफाइन नहीं करता। मुझे ये पसंद है और मैं इसे नहीं बदलना चाहती।

कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स के ठुकराए ऑफर

पिछले 18 सालों में कई बड़े बजट के सारे स्किन केयर एंडोर्समेंट मुझे ऑफर हुए थे, मगर मैं अपने सिद्धांत पर अड़ी रही। इसे रोकने की जरुरत है। ये एक झूठा सपना है जिसे हम बेच रहे हैं। कि सिर्फ फेयर ही लवली है और खूबसूरत। जबकि देश की ज्यादातर जनसंख्या सांवली है। ये ब्रांड का बड़ा फैसला है और बाकियों को भी इसे अपनाना चाहिए।

बिपाशा बसु ने दो फिल्मों को ठुकराने के बाद साल 2001 में आई फिल्म 'अजनबी' से बॉलीवुड डेब्यू किया था। इस फिल्म में नेगेटिव रोल प्ले करने के बावजूद उन्हें काफी सराहना मिली। उन्हें फिल्मफेर बेस्ट डेब्यू अवॉर्ड से भी नवाजा गया था। साल 2002 में 'राज' एक ब्लॉकबस्टर हिट रही।

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