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सुशांत के लिए शोक जताने वाले कई डायरेक्टर्स ऐसे, जो साथ सोने को तैयार न होने पर फिल्म में एक्ट्रेस बदल देते हैं: ऋचा चड्ढा

सुशांत के लिए शोक जताने वाले कई डायरेक्टर्स ऐसे, जो साथ सोने को तैयार न होने पर फिल्म में एक्ट्रेस बदल देते हैं: ऋचा चड्ढा
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सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर बहस जारी है। कई इसका विरोध कर रहे हैं तो कई सपोर्ट में हैं। लेकिन ऋचा चड्ढा ने इस बारे में कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी थी। इस वजह से वे सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर थीं। अब एक्ट्रेस ने ब्लॉग के जरिए अपनी बात रखी है। साथ ही सुशांत के लिए शोक जताने वाले कई डायरेक्टर्स पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा है कि ये वही लोग हैं, जो साथ सोने के लिए तैयार न होने पर एक्ट्रेस को फिल्म से निकाल देते हैं।

बिना नाम लिए ऋचा लिखती हैं- कई डायरेक्टर्स को पिछले महीने सांत्वना मैसेज भेजते देखा गया। इनमें से कई ने अपने साथियों की फिल्मों को रिलीज से पहले ही बर्बाद कर दिया। ऐन मौके पर एक्ट्रेस को सिर्फ इसलिए रिप्लेस कर दिया, क्योंकि उसने उनके साथ सोने से इनकार कर दिया था।

कई बार-बार यह भविष्यवाणी कर चुके हैं कि इसका कुछ नहीं होगा। दूसरों का भविष्य देखने वाले ऐसे ही लोग अंत में अपने चेहरे पर अंडे की भुर्जी बनाकर बैठते हैं। आप भगवान नहीं हैं। दुनिया को अपनी जद्दोजहद और सनक से संक्रमित करना बंद करो।

साहिर लुधियानवी के शब्दों से शुरू किया ब्लॉग

ऋचा ने अपने ब्लॉग की शुरुआत साहिर लुधियानवी के शब्दों से की है। वे लिखती हैं:-

यहां एक खिलौना है

इंसान की हस्ती

ये बस्ती है मुर्दा-परस्तों की बस्ती

यहां पर तो जीवन से है मौत सस्ती

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है

साहिर लुधियानवी के ये शब्द मेरे कानों में कई दिनों से गूंज रहे हैं। नेपोटिज्म पर बकबक हो रही है, जबकि इस बारे में कम ही बात की जा रही है कि मानसिक स्थिति से जूझ रहे किसी इंसान के लिए कैसा वातावरण तैयार किया जाए। यह सब एक खूबसूरत एक्टर के सुसाइड के बाद शुरू हुआ, जो मेरा पुराना दोस्त था।

आउटसाइडर्स बनाम इनसाइडर्स पर रखी बात

ऋचा ने लिखा है कि उनकी नजर में बॉलीवुड आउटसाइडर्स और इनसाइडर्स में नहीं बंटा है। बल्कि फिल्म इंडस्ट्री और इसका पूरा ईको सिस्टम अच्छे और बुरे व्यव्हार करने वाले लोगों में बंटा हुआ है। ऋचा की मानें तो इनसाइडर्स भी अच्छे हो सकते हैं तो वहीं आउटसाइडर्स भी एरोगेंट हो सकते हैं।

'नेपोटिज्म के बारे में सुन कर हंसी आती है'

नेपोटिज्म पर अपनी बात रखते हुए ऋचा ने लिखा है- जहां तक नेपोटिज्म की बात है तो इसके बारे में सुनकर मुझे हंसी आती है। मैं स्टार किड्स से नफरत नहीं करती। अगर किसी के पिता स्टार हैं तो वह भी तो उस घर में उसी तरह पैदा होता है, जैसे हम अपने लोगों के बीच आते हैं। क्या हम अपने पैरेंट्स से शर्मिंदा होते हैं? क्या हम उससे शर्मिंदा होते हैं, जो हमें विरासत में मिला है यह नफरत भरी बेवजह की बहस है।

सुशांत के साथ अपना कनेक्शन भी बताया

ऋचा ने ब्लॉग में सुशांत और उनका कनेक्शन भी बताया। उन्होंने लिखा है- सुशांत और मैंने एक थिएटर ग्रुप में साथ वर्कशॉप शुरू की थी। मैं अंधेरी वेस्ट में दिल्ली की एक दोस्त के साथ 700 वर्गफीट का अपार्टमेंट शेयर करती थी। सुशांत अपनी बाइक से मुझे पिक करते थे और हम साथ रिहर्सल के लिए जाया करते थे। इसके लिए मैं हमेशा उनकी आभारी रहूंगी।

ऐसा नहीं था कि मैं गरीब थी। लेकिन मैं यह भी नहीं कह सकती कि एक स्किन ब्रांड के ऑडिशन के लिए निकलते समय पैसा मायने नहीं रखता। मुझे डर लगता था कि ऑटो-रिक्शा से जाने पर कहीं पहुंचने से पहले ही मेरा मेकअप मेल्ट न हो जाए।

यह स्टार किड्स के साथ कभी नहीं हुआ। और अगर ऐसा होता भी है तो ऑटो-रिक्शा से जाने के लिए उनकी सराहना की जाएगी। लेकिन मैं उनके विशेषाधिकार पर नाराजगी नहीं जताती।

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