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मद्रास हाईकोर्ट से रहमान को मिली राहत, सर्विस टैक्स न भरने की वजह से चुकाने थे 6.79 करोड़ रुपये

जीएसटी नहीं चुकाने का था आरोप, कॉपीराइट एक्ट ऑफ़ 1957 के सेक्शन 13(1)(a) के मुताबिक, किसी और की फिल्म में सॉन्ग देना सर्विस टैक्स के दायरे में नहीं आता

मद्रास हाईकोर्ट से रहमान को मिली राहत, सर्विस टैक्स न भरने की वजह से चुकाने थे 6.79 करोड़ रुपये
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नई दिल्ली. अपने संगीत और आवाज के जादू से सबके दिलों पर राज करने वाले एआर रहमान पर पिछले साल 7 अक्टूबर को जीएसटी कमिशनर ने सर्विस टैक्स भुगतान ना करने का आरोप लगाया था. मद्रास हाई कोर्ट की न्यायाधीश अनीता सुमंत ने एआर रहमान की याचिका पर सुनवाई करते हुए जीएसटी कमिश्नर के आदेश पर रोक लगा दी. इस रोक से रहमान को बड़ी राहत मिली है. जीएसटी कमिश्नर का कहना था कि उन्होंने अपनी कमाई के हिसाब से टैक्स नहीं भरा है.

टैक्स भरने का निर्देश

इंटेलिजेंस के महानिदेशालय की जांच के अनुसार, एआर रहमान को अप्रैल 2013 से जून 2017 तक के लिए 6.79 करोड़ रुपये के बकाया सर्विस टैक्स और पेनल्टी के तौर पर भी 6.79 करोड़ रुपये भरने का निर्देश दिया गया था. रहमान ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि कमिश्नर ने उनकी इनकम का सही हिसाब नहीं लगाया.

कॉपीराइट एक्ट का दिया हवाला

रहमान कॉपीराइट एक्ट ऑफ़ 1957 के सेक्शन 13(1)(a) का हवाला देते हुए बताया कि किसी और की फिल्म में सॉन्ग देना सर्विस टैक्स के दायरे में नहीं आता है क्योंकि उसका असल मालिक म्यूजिक कंपोजर ही होता है.

इससे पहले भी अपने शानदार म्यूजिक के लिए अक्सर सुर्खियां बटोरने वाले रहमान सोशल मीडिया पर पिछले हफ्ते ट्रोल हो गए थे. दरअसल हुआ ये था 'स्लम डॉग मिलेनियर' के 10 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित इवेंट पर रहमान की बेटी खतीजा रहमान बुर्का पहनकर स्टेज पर आई थीं. उस समय लोगों ने उन्हें रूढ़िवादी कहा था. कुछ ने कहा कि रहमान अपनी बेटी पर जबरदस्त बुर्का जैसी कुरीति थोप रहे हैं, तो किसी ने उन्हें धर्म से जुड़ी कई सलाहें दे डालीं. वहीं, किसी ने लिखा कि 'सर मुझे तो लगा कि संगीत ही आपका धर्म है, लेकिन मैं गलत था.'

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