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सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, निर्भीकता एवं लोक-कल्याण पत्रकारिता के शाश्वत मूल्य

सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, निर्भीकता एवं लोक-कल्याण पत्रकारिता के शाश्वत मूल्य
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मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि प्रमुख हिन्दी दैनिक 'स्वदेश भोपाल' अपने प्रकाशन के 39 वर्षों की गौरवपूर्ण एवं गरिमामय यात्रा 25 अक्टूबर 2020 को पूर्ण कर विजयादशमी के पावन पर्व पर 40वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहा है। किसी भी मीडिया संस्थान के लिए 39 वर्षों की यात्रा की दीर्घ समयावधि का पुनर्विलोकन इतिहास के झरोखे से गुजरना है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। मीडिया को गणतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा गया है, और लोकतांत्रिक शासन प्रणाली की दृष्टि से यह उपयुक्त भी है। एक सशक्त निर्भीक एवं स्वतंत्र मीडिया का दायित्व है कि वह समाज की खामियों व प्रशासन की त्रुटियों को उजागर करें ताकि उन समस्याओं की ओर शासन का ध्यान आकर्षित हो और उनका निदान हो सकें। मीडिया समाज एवं व्यवस्था का दर्पण है न कि सस्ते मनोरंजन या आरोप प्रत्यारोप का माध्यम मीडिया का दायित्व है सही तथ्यों को उजागर करना न कि भ्रम फैलाना या व्यक्तिगत दुराग्रहों को प्रचारित करना प्रेस की स्वतंत्रता एवं निष्पक्षता एक दूसरे के पूरक है और तभी मीडिया सशक्त एवं प्रभावशील होकर गणतंत्र के चतुर्थ स्तंभ के रूप में मान्य हो सकता है मुझे प्रसन्नता है कि 'स्वदेश भोपाल' की 39 वर्षों की संघर्षपूर्ण यात्रा सफल रही है और नि:संदेह यह यात्रा उत्तरोत्तर गौरवशाली रहेगी। सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, निर्भीकता एवं लोक-कल्याण पत्रकारिता के शाश्वत मूल्य है और प्राण वायु भी। अपनी स्थापना के 39 वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष्य में इस प्रतिष्ठित दैनिक द्वारा 'स्वदेश भोपाल स्थापना का 40वां वर्ष' नामक एक बहुरंगी अंक का प्रकाशन किया जाना सराहनीय है। मुझे विश्वास है कि इस अंक में संस्था की स्थापना से लेकर अब तक की प्रगति तथा उपलब्धियों का भी समावेश होगाा। मैं 'स्वदेश भोपाल' को इस पुनीत अवसर पर अपनी हार्दिक शुभकामनाएं पे्रषित करता हूं और बहुरंगी अंक के सफल प्रकाशन की कामना करता हूं।

-रमेश पोखरियाल 'निशंक', शिक्षा मंत्री, भारत सरकार

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