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कोरोना के बीच पहला चुनाव ... दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति मून जे इन की पार्टी ने जीता चुनाव

कोरोना के बीच पहला चुनाव ... दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति मून जे इन की पार्टी ने जीता चुनाव
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सियोल. कोरोनावायरस के साए में दक्षिण कोरिया में बुधवार को हुए संसदीय चुनावों में राष्ट्रपति मून जे इन ने जीत हासिल कर ली है। 300 सीट वाली दक्षिण कोरिया की संसद में मून जे इन की डेमोक्रेटिक पार्टी ने 163 सीट हासिल की हैं। साथ ही उनकी सहयोगी 'प्लेटफार्म पार्टी' को 17 सीटें मिली हैं। इसके साथ ही सत्ताधारी डेमोक्रेटिक गठबंधन को 300 सीट में से180 सीटें हासिल हुई हैं। वहीं, विपक्षी यूनाइटेड फ्यूचर पार्टी के गठबंधन को 103 सीटें मिली हैं। इस चुनाव में करीब 35 पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे थे, मगर असल टक्कर लेफ्ट झुकाव वाली डेमोक्रेटिक पार्टी और कंजर्वेटिव विपक्ष, यूनाइटेड फ्यूचर पार्टी के बीच ही देखने को मिली।

28 साल में सबसे ज्यादा मतदान

बुधवार को हुए मतदान में रिकॉर्ड 62.6 फीसदी वोट पड़े, जो 28 साल में सर्वाधिक है। एक करोड़ 18 लाख लोगों ने मतदान के शुरुआती चरण में या ईमेल के जरिये मतदान किया था। 1992 के चुनाव के बाद हुए मतदान का यह सर्वाधिक आंकड़ा है। देशभर में बनाए गए करीब 14 हजार मतदान केंद्रों पर वोटरों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिली थीं। कतार में 1-1 मीटर की दूरी पर खड़े होने के लिए निशान बनाए गए थे। सैनिटाइजर के साथ मास्क और ग्लव्ज भी दिए गए।

कोरोनावायरस पर बेहतर रणनीति

इन चुनावों को राष्ट्रपति मून जे इन के आधे कार्यकाल और कोरोना से निपटने के लिए उठाए गए कदमों के जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा है। न्यूज एजेंसी योंहाप ने बताया कि कोरोना वायरस पर सरकार की बेहतर रणनीति, ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग और ट्रेसिंग ने मून जे इन की लोकप्रियता को 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। इसके साथ ही उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बातचीत शुरू करवाने में मून जे इन की भूमिका भी काम आई। मून जे इन की वजह से ही उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच बातचीत शुरू हुई। हालांकि, अभी इस बातचीत के बहुत ज्यादा सकारात्मक परिणाम नहीं सामने आए हैं।

'यूनाइटेड फ्यूचर पार्टी' की ओर से थाई योंग-हो ने सियोल में गंगनम सीट से जीत हासिल की है। थाई योंग-हो नार्थ कोरिया से साउथ कोरिया आए हैं। वे 2016 में लंदन में नार्थ कोरिया के सीनियर डिप्लोमैट भी रह चुके हैं। चुनाव में उन्हें 58 प्रतिशत वोट हासिल हुए। थाई योंग-हो को चुनाव लड़ने पर उत्तर कोरिया से जान का खतरा था। इसलिए उन्होंने अपना नाम बदलकर चुनाव लड़ा।

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