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उत्‍तर कोरिया दे रहा न्‍यूक्लियर प्रोग्राम को रफ्तार, अमेरिकी डिप्‍लोमेसी को बताया विफल

न्‍यूक्लियर प्रोग्राम को बढ़ाने की बात कही है। उत्‍तर कोरिया के विदेश मंत्री री सोन ग्‍वोन का कहना है कि कोरियाई प्रायद्वीप पर जो शांति औरसमृद्धि की एक हल्‍की सी किरण दिखाई दी थी अब वो धुंधली हो गई।

उत्‍तर कोरिया दे रहा न्‍यूक्लियर प्रोग्राम को रफ्तार, अमेरिकी डिप्‍लोमेसी को बताया विफल
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सियोल । उत्‍तर कोरिया ने कहा है कि उसकी और अमेरिका के बीच दो वर्ष पहले शुरू हुई डिप्‍लोमेसी अब भंवर में फंस चुकी है और इस पर अंधेरा छा गया है। अब उसने दोबारा से अपने न्‍यूक्लियर प्रोग्राम को बढ़ाने की बात कही है। उत्‍तर कोरिया के विदेश मंत्री री सोन ग्‍वोन का कहना है कि कोरियाई प्रायद्वीप पर जो शांति औरसमृद्धि की एक हल्‍की सी किरण दिखाई दी थी अब वो धुंधली हो गई। गौरतलब है कि उत्‍तर कोरिया और अमेरिका के बीच शुरू हुई शांति वार्ता को दो वर्ष पूरे हो गए हैं।

शिखर वार्ता से सीमा पर मुलाकात तक

12 जून 2018 को ही किम जोंग उन और अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के बीच पहली बार सिंगापुर में शांति वार्ता हुई थी। इसके बाद इन दोनों नेताओं के बीच 27-28 फरवरी 2019 को वियतनाम के हनोई शहर में दूसरी शिखरवार्ता हुई थी। 30 जून 2019 को राष्‍ट्रपति ट्रंप और किम की मुलाकात दक्षिण-उत्‍तर कोरिया की सीमा पर हुई थी। इस दौरान ट्रंन ने चंद कदम उत्‍तर कोरिया की सीमा के अंदर चले थे।

रिश्‍तों में गरमाहट खत्‍म होने की थी उम्‍मीद

जून 2018 में हुए शिखर वार्ता सम्‍मेलन के बाद माना जा रहा था कि अब दोनों देशों के रिश्‍ते सुधरेंगे और तनाव कम होगा। इस दौरान दोनों के बीच संबंधो को सुधारने और शांति के लिए साझा प्रयास करने पर सहमति बनी थी। इसमें अमेरिका की तरफ से कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह से परमाणु मुक्‍त बनाने की बात कही गई थी। वहीं उत्‍तर कोरिया की मांग थी कि उसपर लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाने चाहिएं। शुरुआत में ऐसा हुआ भी लेकिन हनोई शिखर वार्ता के बाद में इसमें बदलाव आने लगा। हनोई शिखर वार्ता बुरी तरह से विफल रही थी। इतना ही नहीं इस वार्ता के दौरान ही राष्‍ट्रपति ट्रंप वार्ता की टेबल से नाराज होकर उठ गए थे।

अमेरिका की तरफ से निरर्थक बयानबाजी

विदेश मंत्री री की तरफ से कहा गया है कि कोरियाई परमाणु कोरियाई प्रायद्वीप को लगातार परमाणु मुक्‍त बनाने को लेकर जो बयान दिए गए वो पूरी तरह से निरर्थक थे। उनके मुताबिक उत्‍तर कोरिया को अमेरिका से काफी लंबे समय से खतरा बना हुआ है। ऐसे में उसको अपनी सेनाओं की तातक बढ़ानी बेहद जरूरी है। यही उत्‍तर कोरिया का सामरिक दृष्टि से लक्ष्‍य भी है। इसके लिए परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाना जरूरी होगा। उनके मुताबिक मई में किम जोंग उन ने सेंट्रल मिलिट्री कमिशन की एक बैठक में इसके स्‍पष्‍ट संकेत दे दिए हैं। इसके बाद इसका पूरा खाका भी तैयार कर लिया गया है।

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