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अमेरिका का दावा, प्रशांत महासागर में पोतों की तैनाती के राजनीतिक कारण नहीं

अमेरिकी नौसेना के सातवें बेड़े की महिला प्रवक्ता कमांडर बताया कि प्रशांत में संचालित विमान वाहकों की तैनाती किसी भी राजनीतिक या विश्व घटनाओं के जवाब में नहीं है।

अमेरिका का दावा, प्रशांत महासागर में पोतों की तैनाती के राजनीतिक कारण नहीं
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वॉशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपने तीन परमाणु विमान वाहकों की तौनाती को लेकर कहा है कि यह विश्व या किसी राजनीतिक घटनाओं के जवाब में नहीं है। उसने बुधवार को कहा कि प्रशांत महासागर में अपने 11 परमाणु विमान वाहकों में से तीन की तैनाती किसी भी दुनिया या राजनीतिक घटनाओं के जवाब में नहीं है, बल्कि "पूरे भारत-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए" किया गया है। अमेरिकी नौसेना के सातवें बेड़े की महिला प्रवक्ता कमांडर रिएन मॉमसेन ने एक विशेष साक्षात्कार में एएनआइ को बताया कि "प्रशांत में तीन संचालित विमान वाहकों की तैनाती किसी भी राजनीतिक या विश्व की घटनाओं के जवाब में नहीं है।" बता दें कि ये तीनों एयरक्राफ्ट अमेरिका के मशहूर न्यूक्लियर कैरियर स्ट्राइक का हिस्सा हैं। अमेरिकी नौसेना की प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी नौसेना प्रशांत क्षेत्र में हर दिन सक्रिय रहती है। यह इस क्षेत्र में अपने साथियों और सहयोगियों की मदद के लिए मौजूद होती है। पिछले 75 साल से अमेरिकी पोत और जहाज दक्षिण चीन सागर, पूर्व चीन सागर और फिलीपिन सागर के आसपास नियमित गश्त करती है। यह प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने और शांति कायम करने के हमारे कई तरीकों में से एक है। वहीं दूसरी तरफ यहा माना जा रहा था कि कोरोना वायरस और साउथ चाइना सी में चीन के बढ़ते दखल को रोकने के लिए अमेरिका ने यह तैनाती की है।

चीन पर अमेरिकी तेवर तल्ख

बता दें कि इससे पहले अमेरिका कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को लेकर कई बार चीन को जिम्मेदार ठहरा चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ कई बार इस मामले में चीन पर सीधे तौर पर निशाना साधते नजर आए हैं। इतना ही नहीं ट्रंप कई प्रेस ब्रीफिंग में इस वैश्विक महामारी को लेकर चीन पर भड़कते देखे गए हैं। वहीं चीन ने भी इस मामले में अमेरिका पर पलटवार किया है।

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