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बिलावल के प्रवक्ता ने कहा- अयोध्या में मोदी राम मंदिर बनवा रहे हैं, इमरान इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर बनाकर इसका जवाब दें

बिलावल के प्रवक्ता ने कहा- अयोध्या में मोदी राम मंदिर बनवा रहे हैं, इमरान इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर बनाकर इसका जवाब दें
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स्लामाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन किया। इसके साथ ही रामलला के भव्यतम मंदिर निर्माण का काम शुरू होगा। पाकिस्तान इससे तिलमिला गया है। यहां पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने इमरान सरकार के सामने मोदी को जवाब देने की मांग रख दी है। मांग भी ऐसी है कि जिससे पाकिस्तान में बवाल हो सकता है। पीपीपी ने कहा- मोदी अयोध्या में राम मंदिर बनवा रहे हैं। अब इमरान को इसका माकूल जवाब देने के लिए इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर बनाना चाहिए।

इस्लामाबाद में एक महीने पहले कृष्ण मंदिर का निर्माण कार्य शुरू भी हुआ था। लेकिन, कट्टरपंथियों के दबाव में सरकार को इसे रोकना पड़ा।

अब देरी न करें इमरान

पीपीपी के सांसद मुस्तफा नवाज खोखर ने एक बयान जारी किया। खोखर पीपीपी चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी के भी प्रवक्ता हैं। खोखर ने कहा- मोदी को सटीक जवाब देना जरूरी है। लिहाजा, इमरान सरकार फौरन इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण शुरू कराए। इसके लिए सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए। उन तमाम दिक्कतों को फौरन दूर किया जाना चाहिए, जो राजधानी में मंदिर निर्माण में आ रही हैं। इस्लामाबाद में मंदिर बनाकर हम दुनिया को ये बता पाएंगे कि पाकिस्तान में सभी मजहबों का सम्मान होता है।

इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण क्यों रुका

पाकिस्तान की राजधानी में कृष्ण मंदिर बनाए जाने का प्रस्ताव था। इमरान सरकार ने एच-9/2 सेक्टर में जमीन अलॉट की थी। दो महीने पहले इसकी नींव का काम शुरू हुआ। कुछ लोगों ने इसकी नींव के पत्थर उखाड़ फेंके। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। कट्टरपंथियों ने कहा- पाकिस्तान इस्लामी मुल्क है। हम यहां टैक्स देते हैं। हमारे टैक्स के पैसे से मंदिर नहीं बनाया जा सकता।

हाईकोर्ट में है मामला

इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण रुकवाने के लिए तीन याचिकाएं दायर की गईं। इन तीनों को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा- मंदिर निर्माण के लिए जरूरी है कि संबंधित एजेंसियों की मंजूरी ली जाए। खास बात ये है कि मंदिर बनाने के लिए जमीन 2017 में ही अलॉट कर दी गई थी। अगले साल यानी 2018 में इसे हिंदू पंचायत को सौंप दिया गया था। लेकिन, इसके बावजूद मंदिर निर्माण शुरू नहीं हो सका। सरकार पर कट्टरपंथियों का दबाव है।

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