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प्रधानमंत्री मोदी की चेतावनी से टेंशन में चीन, सालों बाद चीनी विदेश मंत्री ने किया तिब्बत का दौरा

प्रधानमंत्री मोदी की चेतावनी से टेंशन में चीन, सालों बाद चीनी विदेश मंत्री ने किया तिब्बत का दौरा
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बीजिंग। तिब्बत प्राचीन काल से ही योगियों और सिद्धों का घर माना जाता रहा है तथा अपने पर्वतीय सौंदर्य के लिए भी यह प्रसिद्ध है। संसार में सबसे अधिक ऊंचाई पर बसा हुआ प्रदेश तिब्बत मध्य एशिया का सबसे ऊंचा प्रमुख पठार है। वर्तमान में यह बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र है। भारत की सीमा तिब्बत से लगती है न की चीन से। चीन ने 1951 में इस पर कब्जा कर अपने नियंत्रण में ले लिया था तभी से तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने भारत में शरण ले रखी है। चीन में तिब्बत का दर्जा एक स्वायत्तशासी क्षेत्र के तौर पर है। चीन का कहना है कि इस इलाके पर सदियों से उसकी संप्रभुता रही है जबकि बहुत से तिब्बती लोग अपनी वफादारी अपने निर्वासित आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के प्रति रखते हैं। आधिकारिक मीडिया के अनुसार चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तिब्बत और सीमावर्ती इलाकों का पिछले सप्ताह दौरा किया। उन्होंने देश के सर्वांगीण विकास के लिए क्षेत्र की सुरक्षा एवं स्थिरता पर जोर दिया।

बता दें कि भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चेतावनी के एक दिन बाद चीन के विदेश मंत्री का तिब्बत दौरा बेहद खास माना जा रहा है । इस दौरान चीनी विदेश मंत्री ने भारत के खिलाफ खुलकर तो कोई बयान नहीं दिया, लेकिन इशारों में सीमा पर जारी तनाव के बीच तिब्बत की सुरक्षा को लेकर बात की। बताया जा रहा है कि वांग यी 5 साल बाद तिब्बत के दौरे पर पहुंचे हैं। जानकारी के अनुसार चीन के शीर्ष नेता एवं अधिकारी तिब्बत का सालाना दौरा करते हैं, लेकिन चीनी विदेश मंत्री का इस क्षेत्र का दौरा कभी-कभार ही करते हैं। वांग, देश में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के स्टेट काउंसलर भी हैं। उन्होंने शुक्रवार (14 अगस्त) को तिब्बत की कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव वु यिंगजी और तिब्बत क्षेत्रीय सरकार के अध्यक्ष छिझाला तथा अन्य अधिकारियों से मुलाकात की।

वांग को उद्धृत करते हुए तिब्बत डेली में प्रकाशित खबर के हवाले से ग्लोबल टाइमस ने कहा है कि चीन के सर्वांगीण विकास के लिए क्षेत्र की सुरक्षा एवं स्थिरता महत्वपूर्ण है। वांग ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति, संभवत चीन-अमेरिका कूटनीतिक, राजनीतिक एवं व्यापार तनाव का भी जिक्र किया, जिसने हाल के हफ्तों में दोनों देशों के संबंधों को और ज्यादा खराब कर दिया है। उल्लेखनीय है कि चीन ने अमेरिका को तिब्बत के नजदीक स्थित चेंगदु में वाणिज्यिक दूतावास बंद करने को कहा था, जिसके जवाब में अमेरिका ने ह्यूस्टन में उसका वाणिज्यिक दूतावास बंद करा दिया।

वांग ने गरीबी उन्मूलन और बुनियादी ढांचे के निर्माण की स्थिति के बारे में जानने के लिये सीमावर्ती इलाकों का भी दौरा किया। खबर में कहा गया है कि वांग हर साल चीन के कई क्षेत्रों में विशेष अनुसंधान दौरे पर जाते हैं। वांग ने कहा कि सरकार क्षेत्रीय स्थिरता, चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और तिब्बत को खोलने तथा बाहरी दुनिया के साथ सहयोग के लिए, आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए तिब्बत में लोगों के साथ काम करेगी।

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