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ऑक्सफर्ड की कोरोना वैक्सीन का ट्रायल फिर शुरू

ऑक्सफर्ड की कोरोना वैक्सीन का ट्रायल फिर शुरू
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लंदन। ऑक्सफर्ड और एस्ट्राजेनेका की कोरोना वायरस वैक्सीन के अंतिम चरण के ट्रायल को ब्रिटेन में फिर से शुरू कर दिया गया है। एस्ट्राजेनेका ने कहा कि ब्रिटेन की मेडिसिंस हेल्थ रेगुलेटरी अथॉरिटी ने पूरे मामले की जांच के बाद इसे सुरक्षित पाया है। जिसके बाद इसके क्लिनिकल ट्रायल को हरी झंडी दी गई है। वैक्सीन के ट्रायल को उस वरक्त रोक दिया गया था जब एक वॉलंटिअर पर इसका गंभीर असर दिखाई दिया था।

2020 के अंत तक आ सकती है यह वैक्सीन

AstraZeneca के सीईओ पास्कल सॉरियट को वैक्सीन के जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है। उनका कहना है कि यह वैक्सीन इस साल के अंत तक या अगले साल की शुरुआत तक आ सकती है। सॉयरिट ने कहा कि पूरी दुनिया की नजरें इस वैक्सीन के ट्रायल पर हैं, इसलिए इसकी इतनी चर्चा हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि साल के अंत तक रेग्युलेटरी अप्रूवल के लिए डेटा हासिल किया जा सकेगा।

क्यों रोका गया था इस वैक्सीन का ट्रायल

वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के दौरान एक वॉलंटिअर में ट्रांसवर्स मायलाइटिस की कंडीशन पैदा हो गई थी। इसमें रीढ़ की हड्डी में सूजन हो जाती है जो इन्फेक्शन की वजह से हो सकती है। इस चरण में दुनियाभर में 50 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए हैं। वैक्सीन अभी जिस ट्रायल में है इसे पार करने के बाद सुरक्षा और असर के डेटा को मंजूरी दिलाने का काम बचेगा।

ऐसे काम करती है वैक्सीन

यह वायरल वेक्टर पर आधारित वैक्सीन है। टीम ने SARS-CoV-2 के स्पाइक प्रोटीन को (जिसकी मदद से कोरोना वायरस सेल को इन्फेक्ट करता है), कमजोर adenovirus में (सामान्य जुकाम पैदा करने वाला वायरस) ट्रांसफर किया गया। जब इस adenovirus को इंसानों में इंजेक्ट किया गया तो प्रोटीन को पहचानकर इम्यून सिस्टम ने रिस्पॉन्स पैदा किया। पहले दो क्लिनिकल ट्रायल के नतीजों में इससे ऐंटीबॉडी और T-cell पैदा होते पाए गए और छोटे-मोटे साइड इफेक्ट देखे गए।

वैक्सीन की सफलता पर आश्वस्त ऑक्सफर्ड के वैज्ञानिक

ऑक्सफर्ड के वैज्ञानिक न सिर्फ वैक्सीन ChAdOx1 nCoV-19 (अब AZD1222) के पूरी तरह सफल होने को लेकर आश्वस्त हैं बल्कि उन्हें 80% तक भरोसा है कि सितंबर तक वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। ऑक्सफर्ड की वैक्सीन का उत्पादन AstraZeneca करेगी। यह वैक्सीन ChAdOx1 वायरस से बनी है जो सामान्‍य सर्दी पैदा करने वाले वायरस का एक कमजोर रूप है। इसे जेनेटिकली बदला गया है इसलिए इससे इंसानों में इन्‍फेक्‍शन नहीं होता है।

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