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चीन ने तिब्बत की राजधानी को बना दिया किला, कोने-कोने में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई

चीन ने तिब्बत की राजधानी को बना दिया किला, कोने-कोने में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई
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बीजिंग। तिब्बती लोगों को नियंत्रित करने के लिए चीन ने तिब्बत की राजधानी ल्हासा में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी है। यहां कई 'सिक्यॉरिटी सेंटर' खोले गए हैं। तिब्बती सूत्रों ने बताया कि सिक्यॉरिटी सेंटर्स के जरिए स्थानीय जनता को सर्विलांस में रखा जाता है जिससे एक केंद्रीय स्टेट कंट्रोल कायम होता है। पिछले साल न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि ऐसे 700 पुलिस आउटपोस्ट तिब्बत और शिनजियांग उइगर ऑटोनॉमस रीजन कम्यूनिटी सेंटर का काम करते हैं। सूत्रों ने बताया कि सिक्यॉरिटी सेंटर ल्हासा और तिब्बत के दूसरे शहरों में सामने आ रहे हैं। इनके साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस ऑफिसर तैनात किए जा रहे हैं।

अभी तक ल्हासा में ऐसे 130 सेंटर खड़े कर दिए गए हैं। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी तिब्बत में पुलिस ऑफिसर तैनात कर रही है। पुलिस ऑफिसर बनने के योग्य ग्रैजुएट्स के लिए ल्हासा में नौकरी पाना आसान हो गया है। जानकारी के अनुसार राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नीति के मुताबिक देश की रक्षा के लिए देशा की सीमा की रक्षा जरूरी है। सीमा की रक्षा के लिए तिब्बत में शांति कायम रखना अहम है। हालांकि, असल में इतनी पुलिस इसलिए तैनात की गई है ताकि चीन की सरकार के खिलाफ तिब्बत में प्रदर्शन न हो सकें।

चीनी स्टेट मीडिया के मुताबिक ल्हासा में 'पहला युवा पुलिस स्कूल' 23 सितंबर को खोला गया था। न्यूयॉर्क में ह्यूमन राइट वॉच (HRW) ने इस पर चिंता जताई है। उसका कहना है कि तिब्बत में सिक्यॉरिटी सेंटर्स बढ़ते देखकर वह परेशान है। HRW के चीन में डायरेक्टर ने कहा कि ऐसी गतिविधियों से तिब्बत के अंदर तिब्बतियों की ही आजादी और मानवाधिकारों पर नियंत्रण होगा।

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