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क्या प्रतिबंध हटाकर ईरान परमाणु करार को पुनर्जीवित करेंगे बाइडन?

क्या प्रतिबंध हटाकर ईरान परमाणु करार को पुनर्जीवित करेंगे बाइडन?
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तेहरान। अमेरिका में जो बाइडन के राष्ट्रपति पद संभालने की तारीख करीब आने के साथ ही ईरान के साथ परमाणु समझौते को दोबारा प्रभावी बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैँ। ऐसी खबर है कि इस सिलसिले में ईरान और समझौते में शामिल दूसरे देशों के राजनयिकों के बीच संपर्क बना है। ये समझौता जुलाई 2015 में ईरान और छह दूसरे देशों के बीच हुआ था।

समझौते पर दूसरी तरफ से दस्तखत करने वाले देशों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के अलावा जर्मनी शामिल था। अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैँ। यूरोपियन यूनियन ने भी इस समझौते पर अपनी मुहर लगाई थी।

ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए) नाम के इस समझौते को बोलचाल में ईरान परमाणु समझौता कहा जाता है। इस करार का मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना था। 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने मई 2018 में इस समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया। उसके बाद ईरान भी इस समझौते से हट गया। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक समझौते से हटने के बाद ईरान ने फिर से अपने यहां यूरेनियम का संवर्धन शुरू कर दिया। आज उसके पास संवर्धित यूरेनियम का भंडार 2018 की तुलना में बहुत ज्यादा है।

बताया जाता है कि ईरान और यूरोपीय राजनयिकों की ऑनलाइन बातचीत दो दिन पहले हुई। इसमें समझौते में शामिल देशों के विदेश मंत्रियों की होने वाली बैठक के एजेंडे पर विचार किया गया। अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि वे अमेरिका को ईरान परमाणु समझौते में वापस ले जाना चाहते हैं। लेकिन इसके लिए वे क्या कदम उठाएंगे, इस बारे में उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी है। साथ ही वे कब इसकी पहल करेंगे, यह भी साफ नहीं है।

लेकिन ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने गुरुवार को कहा कि उन्हें इसमें कोई शक नहीं है कि बाइडन प्रशासन ईरान परमाणु करार को पुनर्जीवित करेगा। साथ ही वह ईरान पर से तमाम प्रतिबंध हटा लेगा।

बुधवार को ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह खमेनई ने कहा था कि अगर अमेरिका प्रतिबंध हटाने को तैयार हुआ, तो ईरान को फिर से इस समझौते में शामिल होने पर कोई एतराज नहीं होगा। इससे पहले दिसंबर के आरंभ में हसन रुहानी ने कहा था कि समझौते को बिना किसी बातचीत के बहाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि इसके लिए बाइडन को सिर्फ कागज के एक पन्ने पर दस्तखत करना है। उस दस्तखत के साथ हम वहां पहुंच जाएंगे, जहां पहले मौजूद थे। रुहानी ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से स्थायी सदस्यों और जर्मनी को अपने वादे पर लौटना होगा और हम भी ऐसा ही करेंगे।

2015 के समझौते में परमाणु कार्यक्रम पर पाबंदियों को स्वीकार करने के बदले ईरान को आर्थिक प्रोत्साहन का वादा बाकी देशों ने किया था। लेकिन इस वादे को पूरा करने के लिए उन्होंने कोई खास प्रयास अब तक नहीं किया है। अब ईरान चाहता है कि अगर समझौता फिर से अमल में आता है, तो इसमें शामिल बाकी देश सिर्फ खोखले वायदे ना करें, बल्कि व्यवहार में कदम उठा कर दिखाएं।

इस बीच ईरान परमाणु करार के लिए रूसी प्रतिनिधि मिखाइल उलियानोव ने एक ट्विट में कहा है कि समझौते में शामिल देशों ने परमाणु करार के प्रति अपनी वचनबद्धता की फिर से पुष्टि कर दी है। इस समझौते पर पूरा अमल हो, इसके लिए वे राजनयिक प्रयास करने को तैयार हैं।

हालांकि हाल में पश्चिमी मीडिया में ऐसी खबरें छपी हैं कि ईरान ने संवर्धित यूरेनियम का भंडार काफी बढ़ा लिया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) का कहना है कि ईरान उसके निरीक्षकों को अपने देश में निरीक्षण करने इजाजत लगातार देता रहा है। इस बीच हाल में ईरान के मशहूर परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजाद की हत्या हो गई।

ईरान का आरोप है कि ये हत्या इस्राइल ने करवाई है, जिससे इस क्षेत्र में तनाव पैदा हुआ है। विश्लेषकों ने कयास लगाए हैं कि परमाणु समझौते पर दोबारा अमल की राह में रोड़े अटकाने के ही इस्राइल ने ये कदम उठाया होगा। इसके बावजूद दोनों पक्षों के राजनयिकों में संपर्क बनने की हुई शुरुआत से उम्मीदें जगी हैँ। जब ईरान परमाणु समझौता हुआ था, तब जो बाइडन उप राष्ट्रपति थे। अब आशा की जा रही है कि राष्ट्रपति रहते हुए वे इसमें नए सिरे से जान फूंकेंगे।

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