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चीन ने नेपाल से 512 प्रोडक्ट्स इम्पोर्ट करने का समझौता किया था, अब सिर्फ 188 वस्तुएं आयात करने की लिस्ट थमाई

चीन ने नेपाल से 512 प्रोडक्ट्स इम्पोर्ट करने का समझौता किया था, अब सिर्फ 188 वस्तुएं आयात करने की लिस्ट थमाई
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काठमांडू। चीन और नेपाल के बीच ट्रेड डील पर भी विवाद शुरू हो गया है। दो साल पहले हुई डील के मुताबिक, चीन को नेपाल से 512 वस्तुओं का आयात करना था। लेकिन, अब चीन की शी जिनपिंग सरकार इससे पलट गई है। चीन ने नेपाल को इम्पोर्ट लिस्ट भेजी है। लेकिन, इसमें 512 की बजाए सिर्फ 188 वस्तुओं के आयात का भरोसा दिलाया गया है। छोटे और गरीब देश नेपाल के लिए यह आर्थिक तौर पर बहुत बड़ा घाटा होगा।

नेपाल के कारोबारियों को भारी घाटा

नेपाल के अखबार 'माय रिपब्लिका' ने चीन की इस वादाखिलाफी और धोखाधड़ी को एक रिपोर्ट में उजागर किया है। अखबार के मुताबिक, चीन नेपाल के खिलाफ अजीब तरह की रणनीति अपना रहा है। चीन की नीतियों से नेपाल के कारोबारियों के भारी घाटा हो रहा है। चीन ने 512 वस्तुओं के आयात का करार किया था। अब सिर्फ 188 प्रोडक्ट्स की इम्पोर्ट लिस्ट भेजी है। इनके निर्यात में भी चीन की तरफ से कई अड़ंगे लगाए जाते हैं। ड्यूटी फ्री और कोटा फ्री इम्पोर्ट का वादा किया गया था। अब हेवी ड्यूटी लगाई जा रही है।

खत्म हो गई इम्पोर्ट लिस्ट

रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली चीन गए थे। तब दोनों देशों की ट्रेड डील हुई थी। चीन ने 8030 वस्तुओं के आयात का भरोसा दिलाया था। इनमें कपड़े, बर्तन, फुटवियर, टूथपेस्ट और ब्रश, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, प्रिंटिंग पेपर और जानवरों की हड्डियों से बने बटन आदि शामिल थे। बाद में मेडिकल ऑयल, पेन, रोजमर्रा के इस्तेमाल की कुछ चीजें और प्लास्टिक प्रोडक्ट्स को इसमें जोड़ा गया।

डील को नेपाल को कोई फायदा नहीं हुआ। क्योंकि, ज्यादातर सामान मंगाया ही नहीं गया। इसके बाद नेपाल ने चीन सिर्फ 512 एक्सपोर्ट की जाने वाली वस्तुओं की लिस्ट भेजी। इन्हें कोटा और ड्यूटी फ्री करने को कहा। नेपाल के पूर्व इंडस्ट्री सेक्रेटरी रवि शंकर साइनजू ने हमने कई बार चीन से अपील की। लेकिन, कोई फायदा नहीं हुआ। मंगलवार को दोनों देशों के बीच इस बारे में बातचीत हुई। चीन ने 512 की लिस्ट में से 188 प्रोडक्ट्स को ही इम्पोर्ट करने की मंजूरी दी। हालांकि, ये भी ड्यूटी फ्री नहीं होंगे। नेपाल ट्रांस हिमालय बॉर्डर कॉमर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट बच्चू पौडेल ने कहा- हम अपने कारोबारी हितों की रक्षा के लिए चीन पर दबाव नहीं बना पाए।

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