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भारत के कृषि कानूनों के खिलाफ US में सिख-अमेरिकियों ने निकालीं रोष रैलियां

भारत के कृषि कानूनों के खिलाफ US में सिख-अमेरिकियों ने निकालीं रोष रैलियां
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लॉस एंजलिस। कनाडा और ब्रिटेन के बाद अब अमेरिका के लोग भी किसान आंदोलन के समर्थन में उतर आए हैं। अमेरिका के कई शहरों में भारत के नए कृषि कानूनों के खिलाफ सैकड़ों सिख अमेरिकियों ने शांतिपूर्वक विरोध रैलियां निकालीं। कैलिफोर्निया के विभिन्न हिस्सों के प्रदर्शनकारियों के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्यदूतावास की ओर बढ़ने वाली कारों के बड़े काफिले ने शनिवार को 'बे ब्रिज' पर यातायात बाधित कर दिया।

इसके अलावा सैकड़ों प्रदर्शनकारी इंडियानापोलिस में एकत्र हुए। इंडियाना निवासी प्रदर्शनकारी गुरिंदर सिंह खालसा ने कहा, किसान देश की आत्मा हैं। हमें अपनी आत्मा की रक्षा करनी चाहिए। अमेरिका और कनाडा के कई शहरों समेत दुनियाभर में लोग उन विधेयकों (कानूनों) के खिलाफ एकजुट हुए हैं, जो भारत के कृषि बाजार को निजी क्षेत्र के लिए खोल देंगे, जो बड़े कॉरपोरेट घरानों को स्वतंत्र कृषि समुदायों का अधिग्रहण करने की अनुमति देंगे और इससे फसलों के बाजार मूल्य में कमी आएगी।

इससे एक दिन पहले शिकागो में सिख-अमेरिकी समुदाय के लोग एकत्र हुए और वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के सामने विरोध रैली निकाली गई। रविवार को एक और रैली की योजना है। सिख-अमेरिकियों ने 'किसान नहीं, भोजन नहीं' और 'किसान बचाओ' जैसे पोस्टर थामकर प्रदर्शन किए। सिख नेता दर्शन सिंह दरार ने कहा, ''यह भारत सरकार से तीनों कानूनों को वापस लेने का आग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारी मांग है।'' उल्लेखनीय है कि हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों के किसान भारत सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 11 दिन से लगातार डटे हैं।

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