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ब्योरा सामने आते ही शुरू हुआ ब्रेग्जिट करार का विरोध

ब्योरा सामने आते ही शुरू हुआ ब्रेग्जिट करार का विरोध
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लंदन। ब्रिटेन में यूरोपियन यूनियन (ईयू) से हुए करार को लेकर ब्रेग्जिट समर्थकों को लोगों की भारी नाराजगी झेलनी पड़ रही है। इस समझौते का कई हलकों से जोरदार विरोध शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ब्रेग्जिट के लिए अभियान चलाने वाले समूह और सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी के कई सांसद खुलकर इस समझौते के खिलाफ आ गए हैं।

कई वरिष्ठ कंजरवेटिव सांसदों ने प्रधानमंत्री जॉनसन से कहा है कि वे जल्दबाजी में इस समझौते का संसद से अनुमोदन कराने की कोशिश ना करें। उधर मछली के कारोबार से जुड़े समूहों ने आरोप लगाया है कि समय सीमा के भीतर समझौता कर लेने की जल्दबाजी में जॉनसन झुक गए और देश के हितों से समझौता कर लिया।

ब्रिटेन और ईयू के बीच हुए समझौते का 2000 पेज का दस्तावेज शनिवार शाम जारी किया गया। उसके फौरन बाद कई कंजरवेटिव सांसदों ने कहा है कि उन्हें इस विशाल दस्तावेज का अध्ययन करने के लिए पूरा वक्त मिलना चाहिए। फिलहाल, प्रधानमंत्री जॉनसन के लिए राहत की बात यह है कि विपक्षी लेबर पार्टी ने करार का समर्थन किया है।

इसलिए संसद में इसका अनुमोदन कराने में उन्हें बहुत मुश्किल नहीं होगी। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अगर उन्होंने ऐसा अपनी पार्टी के सांसदों को नाराज करते हुए कराया, तो आगे चल कर इसकी राजनीतिक कीमत उन्हें चुकानी पड़ सकती है।

दस्तावेज जारी होने के बाद प्रधानमंत्री के मुख्य ब्रेग्जिट वार्ताकार लॉर्ड फ्रॉस्ट ने कहा कि यह ब्रिटेन के पुनरुद्धार का समझौता है। अब ब्रिटेन फिर से अपने कानून खुद बना सकेगा। लेकिन मछुआरों के संगठन ने तुरंत एक बयान में कहा कि उनसे जो वादा किया गया था, उसे तोड़ दिया गया है।

नेशनल फेडरशन ऑफ फिशरमेन्स ऑर्गनाइजेशन ने कहा कि तमाम आश्वासनों और बड़ी बातें करने के बावजूद असल मौके पर जॉनसन ने ईयू के आगे समर्पण कर दिया। यूके फिशरीज नामक संगठन के प्रमुख जेन सैंडल ने भी कहा कि मछली उद्योग से जो वादे किए गए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया है।

सरकारी एलान के मुताबिक ब्रिटिश संसद में अगले बुधवार को ब्रेग्जिट करार पर बहस होगी। बहस के लिए सिर्फ एक दिन का समय रखा गया है। इस बारे में सीनियर कंजरवेटिव सांसद डेविड डेविस ने ऑब्जर्वर अखबार से कहा कि वे पहले यह आश्वासन चाहते हैं कि मछली मारने के अधिकार को लेकर अगर भविष्य में असहमति हुई तो बदले में ईयू ब्रिटेन के उत्पादों पर अधिक शुल्क नहीं लगाएगा। उन्होंने कहा कि इतने अहम मुद्दे पर बहस और दस्तावेज की पूरी परख के लिए अधिक समय मिलना चाहिए।

ब्रिटेन ने इस साल 31 जनवरी को ईयू से अलग होने का एलान किया था। उसके बाद अलगाव की प्रक्रिया (ब्रेग्जिट) तय करने के लिए 11 महीने की ट्रांजिसन अवधि तय की गई थी। ये अवधि 31 दिसंबर को पूरी हो जाएगी। उसके बाद यूरोप के सिंगल मार्केट और कस्टम यूनियन के साथ ब्रिटेन का संबंध खत्म हो जाएगा। उसके बाद ब्रिटेन और ईयू के बीच कारोबार किन नियमों के तहत होगा, इसी बारे में ब्रेग्जिट समझौता हुआ है। लेकिन इसके दस्तावेज से साफ हुआ है कि समुद्र में मछली मारने के अधिकार को लेकर अंतिम शर्तें तय नहीं हुई हैं। बल्कि इसमें लिखा हुआ है कि अगर इस मामले में गंभीर असहमतियां पैदा हुईं, तो दोनों पक्ष एक दूसरे के मछली संबंधी निर्यातों पर शुल्क लगा सकेंगे।

थिंक टैंक सेंटर फॉर यूरोपियन रिफॉर्म के व्यापार विशेषज्ञ सैम लॉव ने व्यापार समझौतों में इस तरह के प्रावधान को "असामान्य" बताया है। कंजरवेटिव सांसदों को चिंता है कि ईयू भविष्य में न सिर्फ मछली से जुड़ उत्पादों, बल्कि ब्रिटेन के दूसरे प्रोडक्ट्स पर भी मनमाना शुल्क लगा सकता है।

संपन्न हुए ब्रेग्जिट करार के खिलाफ आवाज स्कॉटलैंड से भी उठी है। स्कॉटलैंड की फर्स्ट मिनिस्टर निकोला स्टरजॉन ने शनिवार को कहा कि देश के मछली उद्योग से जो वादे किए गए थे, उन्हें तोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि कंजरवेटिव सरकार किस तरह स्कॉटलैंड को गलत दिशा में ले जा रही है, उसकी यह एक और मिसाल है। स्टरजॉन स्कॉटलैंड को ब्रिटेन से आजाद कराने का अभियान चलाती रही हैं। ब्रेग्जिट के बाद उन्होंने अपनी मुहिम तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र स्कॉटलैंड ब्रिटेन और ईयू के बीच पुल बन सकता है।

ब्रिटिश मीडिया में ऐसी खबरें छपी हैं कि ब्रेग्जिट समर्थक समूह समझौते के दस्तावेज का गंभीर अध्ययन कर रहे हैं। अगर इसकी शर्तों से संतुष्ट नहीं हुए, तो वे प्रधानमंत्री जॉनसन के खिलाफ मुहिम शुरू कर सकते हैँ। पिछले साल संसदीय चुनाव में कंजरवेटिव पार्टी को मिली भारी जीत में ऐसे समूहों के समर्थन का बड़ा योगदान था। पर्यवेक्षकों का कहना है कि ब्रेग्जिट को लेकर देश में ऊंची आकांक्षाएं पैदा कर दी गई थीं। जबकि हकीकत वैसी नहीं है। बल्कि इस कारण कई क्षेत्रों में लोगों की जिंदगी मुश्किल हो सकती है। इसलिए आने वाले दिन जॉनसन के लिए मुश्किल भरे हो सकते हैं।

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