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लाहौर में तुर्की फर्म पर छापा: तुर्की कंपनी ने इमरान सरकार से माफी मांगने को कहा, अगली नीलामी में हिस्सा लेने से भी इनकार

लाहौर में तुर्की फर्म पर छापा: तुर्की कंपनी ने इमरान सरकार से माफी मांगने को कहा, अगली नीलामी में हिस्सा लेने से भी इनकार
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लाहौर। पाकिस्तान सरकार की हरकत से तुर्की की एक बड़ी कंपनी नाराज हो गई है। लाहौर में मौजूद इस कंपनी के ऑफिस पर पुलिस ने रेड की थी। कुछ कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया था और इनसे मारपीट भी की गई थी। कंपनी का नाम अल्बायर्क एंड ओज्पैक ग्रुप है। कंपनी पर रेड के बाद इसके प्रोजेक्ट मैनेजर केग्री ओजेल ने पाकिस्तान सरकार को खत लिखकर माफी मांगने को कहा है। कंपनी ने अगली नीलामी में हिस्सा लेने से भी इनकार कर दिया।

पुलिस की रेड क्यों हुई, किसी को नहीं पता

अल्बायर्क एंड ओज्पैक ग्रुप ने लाहौर में कचरा प्रबंधन (क्लीनिंग सर्विस) करने का ठेका लिया था। इसकी 760 गाड़ियां और हजारों कर्मचारी इस काम को अंजाम दे रहे हैं। मंगलवार को अचानक लाहौर की एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड ने इसके ऑफिस पर छापा मारा। कंपनी का आरोप है कि कई घंटे तक उसके कर्मचारियों को मैदान में खड़ा रहने को कहा गया। कुछ लोगों से मारपीट भी की गई। बाद में पुलिस कुछ कर्मचारियों को लेकर लौट गई।

अब तक लाहौर पुलिस ने इस मामले पर न तो कोई बयान जारी किया है और न ये बताया है कि यह छापे क्यों मारे गए। पाकिस्तान सरकार ने अब तक इस मामले पर चुप्पी साध रखी है।

तुर्की में भी चर्चा

पाकिस्तानी पुलिस की इस हरकत पर तुर्की में भी हलचल है। वहां की सरकारी एजेंसी एनादोलू ने मामले से संबंधित खबरें भी जारी की हैं। कंपनी ने ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी कर कहा- हमारी टीम से बदलूकी और मारपीट हुई। कर्मचारियों से कहा गया कि वे गाड़ियां और क्लीनिंग टूल्स पुलिस थाने लेकर आएं। हमारा कॉन्ट्रैक्ट अब भी खत्म नहीं हुआ है। लेकिन, हम इन हालात में काम नहीं करेंगे।

कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट 31 दिसंबर तक है। लेकिन, इस मामले के बाद उसने साफ कर दिया है कि वो आगे ठेका लेने के लिए नीलामी में हिस्सा नहीं लेगी। कंपनी ने कहा है कि उसने पाकिस्तान में 15 लाख डॉलर इन्वेस्ट किए हैं।

खराब हो सकते हैं रिश्ते

पाकिस्तान सरकार और लाहौर पुलिस की चुप्पी हैरान करने वाली है। पाकिस्तान और तुर्की के रिश्ते हालिया कुछ साल में मजबूत हुए हैं। कश्मीर मुद्दे पर यूएन और दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर तुर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया है। अगर उसकी कंपनियों से इमरान खान सरकार इस तरह का बर्ताव करेगी तो तुर्की भी जवाब देगा और रिश्तों में तनाव आएगा।

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