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श्मशानघाट पर एंबुलेंस में डेढ़ घंटे रहा कोरोना संक्रमित का शव, चार कंधे भी नसीब नहीं हुए

श्मशानघाट पर एंबुलेंस में डेढ़ घंटे रहा कोरोना संक्रमित का शव, चार कंधे भी नसीब नहीं हुए
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मोहाली . मोहाली के नयागांव में रहने वाले 65 साल के बुजुर्ग की कोरोना संक्रमण के चलते मंगलवार को मौत हो गई थी। मंगलवार शाम करीब 5 बजे चंडीगढ़ पीजीआई की एंबुलेंस से श्मशानघाट लाया गया। कुछ अधिकारी भी साथ थे। मृतक का बेटा अपनी गाड़ी में आया। श्मशानघाट में अफसर गाड़ी में ही बैठे रहे। बेटा शव अकेले नहीं उतार सकता था। उसने श्मशानघाट में काम करने वाले लोगों से मिन्नतें कीं। लेकिन, कोई भी तैयार नहीं हुआ।

15 कदम दूरी लेकिन साथ देने कोई तैयार नहीं

एंबुलेंस से श्मशानघाट इलेक्ट्रिक यूनिट महज 15 कदम दूर थी। लेकिन, इस फासले को पूरा कराने के लिए न तो नगर काउंसिल के कर्मचारी आगे आए और न स्वास्थ्य विभाग का अमला। डेढ़ घंटे बाद निगम कमिश्नर ने जूनियर इंजीनियर को भेजा। उन्होंने पहले शव को सेनेटाइज कराया। फिर श्मशानघाट के दो कर्मचारियों को किट पहनाकर शव को इलेक्ट्रिक यूनिट तक पहुंचाया।

बेटे की मजबूरी

पिता का संस्कार करने के लिए परिवार से अकेला बेटा आया था। मास्क और एप्रेन पहनकर वो श्मशान के कर्मचारियों के पास गया। सभी का एक ही जवाब था- अधिकारियों के कहने और सेफ्टी किट पहनकर ही काम करेंगे। बेटे की लाचारी देखिए कि उसके पिता को अंतिम सफर में चार कंधे भी नहीं मिल सके।

निगम कमिश्नर ने दिखाए सक्रियता

श्मशान के पंडित ने मोहाली निगम कमिश्नर कमल कुमार गर्ग को फोन पर जानकारी दी। कुछ देर में निगम के जेई नंदन बंसल पहुंचे। इसके बाद एंबुलेंस में बैठी टीम बाहर आई। तीन लोगों ने सेफ्टी किट पहनकर शव उठाया। शाम साढ़े 6 बजे संस्कार हुआ।

स्वास्थ्य विभाग की टीम श्मशान के बाहर ही दे गई सेफ्टी किट

कोरोना पेशेंट्स का संस्कार कैसे होगा। इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अमले के पास नहीं थी। नयागांव के एसडीओ शव के साथ आए थे। उन्होंने कहा कि विभाग की टीम आई थी, लेकिन श्मशान के बाहर से ही सेफ्टी किट पकड़ाकर चलती बनी। हमें नहीं पता था कि अंतिम संस्कार कैसे करना है।

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