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नॉर्थ ईस्‍ट में तनावपूर्ण शांति लेकिन पश्चिम बंगाल में भड़की विरोध की आग

असम के डिब्रूगढ़ और मेघालय की राजधानी शिलॉन्‍ग में कर्फ्यू में छूट दी गई, लेकिन नागरिकता कानून का विरोध करने वालों ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा रेलवे स्टेशन परिसर को आग के हवाले कर दिया।

गुवाहाटी . असम और नॉर्थ ईस्‍ट के राज्‍यों में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को कुछ शांत होते दिखाई दिए। यहां कर्फ्यू में ढील भी दी गई लेकिन पड़ोसी राज्‍य पश्चिम बंगाल में प्रदर्शनकारी हिंसा पर उतारू हो गए। उन्‍होंने कई जगह सार्वजनिक संपत्ति को आग लगा दी, प्रदर्शनकारियों की पुलिस से भी कई जगह हिंसक झड़पें हुईं।

असम के डिब्रूगढ़ और मेघालय की राजधानी शिलॉन्‍ग में कर्फ्यू में छूट दी गई, लेकिन नागरिकता कानून का विरोध करने वालों ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा रेलवे स्टेशन परिसर को आग के हवाले कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरपीएफ कर्मियों से भी मारपीट की। ग्रामीण हावड़ा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, बर्दवान के इलाके ओर उत्‍तरी बंगाल जैसे पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों में जबर्दस्‍त प्रदर्शन हुए।

असम में सेना, असम राईफल्स की आठ टुकड़ियां तैनात

असम में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए राजधानी गुवाहाटी और अन्य स्थानों पर सेना और असम राइफल्स की आठ टुकड़ियां तैनात की गई हैं। रक्षा जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल पी खोंगसाई ने बताया कि बिगड़ती कानून व्यवस्था को नियंत्रण में लाने के लिए गुवाहाटी के अलावा मोरीगांव, सोनितपुर और डिब्रूगढ़ जिलों के नागरिक प्रशासन ने सेना और असम राइफल्स की मांग की है। हर टुकड़ी में करीब 70 जवान होते हैं। खोंगसाई ने बताया कि कि जहां भी सेना और असम राइफल्स की टुकड़ियां तैनात की गयी है, वे वहां सामान्य स्थिति बहाल करने में सक्षम रही हैं और वे नागरिक प्रशासन को सहयोग करने में लगी हैं।

ममता बोलीं- हम इसे चुनौती देते हैं

नागरिकता कानून की मुखर विरोधी और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी कह चुकी हैं कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक को संसद में पारित करके और इसके कानून बना कर केंद्र सरकार हमें इसे मानने के लिए बाध्य नहीं कर सकती है। उन्‍होंने कहा, 'आपके (बीजेपी) मैनिफेस्टो में विकास के मुद्दों की जगह आपने देश को बांटने का वादा किया है। नागरिकता मिलने का आधार धर्म क्यों होना चाहिए? मैं इसे स्वीकार नहीं करूंगी। मैं इसे चुनौती देती हूं...। क्योंकि आपके पास नंबर हैं, इसलिए आप लोकसभा और राज्यसभा में बिल पास करा सकते हैं, लेकिन हम आपको देश को बांटने नहीं देंगे।'

पंजाब, मध्‍य प्रदेश और केरल भी विरोध में

मध्‍य प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी जो भी स्टैंड नागरिकता कानून पर लेगी, हमलोग उसका पालन करेंगे। हमलोग उस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होना चाहते, जिसका बीज भेदभाव हो।' इससे पहले पंजाब के सीएम कैप्टन सिंह के ऑफिस की ओर से गुरुवार को यह ऐलान किया गया कि राज्य में इसे लागू नहीं किया जाएगा। वहीं, केरल के सीएम पिनरई विजयन ने भी कहा है कि उन्हें भी यह स्वीकार नहीं है। विजयन ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार भारत को धार्मिक आधारों पर बांटने की कोशिश कर रही है।

महाराष्‍ट्र ने भी लागू न करने के संकेत दिए

महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष और उद्धव सरकार में मंत्री बाला साहेब थोराट ने कहा, 'हम पार्टी नेतृत्व की नीति का पालन करेंगे।' गौरतलब है कि कांग्रेस ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है। उधर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी कहा है कि इस कानून पर पार्टी नेतृत्व का निर्णय ही उनका भी निर्णय है।

राज्‍यों को नहीं नकारने का अधिकार: गृह मंत्रालय

वहीं गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकारों को नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 को लागू करने से रोकने का कोई अधिकार नहीं है। गृह मंत्रालय के एक उच्च अधिकारी ने बताया कि क्योंकि इसे संविधान की 7वीं अनुसूचि के तहत सूचिबद्ध किया गया है, इसलिए राज्य सरकारों के पास इसे अस्वीकार करने का अधिकार नहीं है।

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