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भोपाल के मशहूर डॉक्टर्स बोले .... कोरोना वायरस से भयभीत बिल्कुल न हों, सावधानी रखें, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढायें, संक्रमित लोगों से दूर रहें

स्वदेश समाचार-पत्र समूह भोपाल द्वारा कोरोना वायरस से बचाव के विषय पर परिचर्चा आयोजित, ऐलोपैथी, होम्योपैथी, यूनानी और आयुर्वेद के चिकित्सकों ने बताये बचाव के उपाय

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भोपाल। दुनिया भर में फैल रहे कोरोना वायरस से आम लोगों में बढ़ रहे डर को दूर करने के लिए स्वदेश समाचार-पत्र समूह भोपाल द्वारा परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस परिचर्चा में भारत में प्रचलित चिकित्सा पद्धतियों एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी के वरिष्ठ चिकित्सकों ने अपने विचार व्यक्त किये। सभी पैथी के चिकित्सा विशेषज्ञों ने एक सुर में कहा कि इस वायरस से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है कि खुद की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का प्रयास किया जाए। सावधानी बरतें और संक्रमित लोगों से दूर रहें। इस वायरस की अब तक कोई प्रमाणिक दवा नहीं बनी है। इससे डरने की जरूरत नहीं हैं। बल्कि व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान देते हुए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने के दौरान एहतियात बरतने की आवश्यकता है।

लक्षणों के आधार पर होम्योपैथी चिकित्सा कारगर : डॉ. ताजवर

परिचर्चा में होम्योपैथी चिकित्सक डा. मोहम्मद ताजवर खान ने बताया कि होम्योपैथी में बीमारी के लक्षणों के आधार पर दवायें दी जातीं हैं। इस पैथी की दवायें रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) बढ़ातीं हैं। बीमारी कोई भी हो हर मरीज को वर्गीकृत किया जाना चाहिए, तभी दवायें कारगर तरीके से असर करतीं हैं। भोपाल गैस त्रासदी के समय निकली मिथाइल आइसोसाइनाइट (मिक) से प्रभावित मरीजों में लक्षणों की पहचान के आधार पर होम्योपैथी दवाओं से उपचार किया गया था, इससे मरीजों को काफी राहत मिली थी। कोरोना में भी होम्योपैथी की दवाएं काफी कारगर हैं।

कोरोना से बचने आर्सेनिकम एल्बम-30 दवा का सेवन करें : मिश्रा

शासकीय होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालय के प्राचार्य डा. एसके मिश्रा ने कहा कि कोरोना जैसी संक्रामक बीमारियों का आम लोगों में ज्यादा डर फैल जाता है। गत वर्ष शहर के 14 वार्ड डेंगू से ज्यादा प्रभावित थे। इनमें लगभग ढाई लाख लोगों को इफिटोरियम पर्फ 2 नाम की होम्योपैथी दवा का नि:शुल्क वितरण कराया गया था। इसके परिणाम स्वरूप डेंगू के मामले कम सामने आ रहे हैं। केन्द्रीय आयुष मंत्रालय के निर्देश अनुसार कोरोना से बचाव के लिए आर्सेनिकम एल्बम-30 नाम की होम्योपैथी दवा खाली पेट तीन दिनों तक सेवन करें। ये दवा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का काम करती है। और लगभग एक महीने तक इस दवा का शरीर में असर रहता है।

बचाव के लिए जागरुक रहना जरूरी : डा. विवेक शर्मा

पं. खुशीलाल आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. विवेक शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद दो सिद्धांतों पर काम करता है पहला स्वस्थ्य से स्वास्थ्य रक्षा और दूसरा बीमार की चिकित्सा। कोरोना वायरस जानवरों से इंसानों में फैलने वाला वायरस है। इससे बचाव के लिए बच्चे से लेकर बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना जरूरी है। डेंगू से बचाव के लिए गिलोय धनवटी का सेवन करने पर फायदा होता है। इस प्रजाति का वायरस 2003 में चीन में फैला था, लेकिन 2004 में पूरी तरह से खत्म हो गया था। आर्युेव की गुरुचि धनबटी दवा को दिन में दो बार लेने से वायरस से काफी बचाव होगा। 10 ग्राम दालचीनी, कालीमिर्च और पीपर को एक लीट पानी में मिलाकर उबालें, पानी आधा लीटर बचे तो उसे छानकर रखे लें और गला सूखने पर पीएं, बहुत कारगर दवा है।

इम्यूनिटी इतनी अधिक बढ़ाएं .. वायरस असर न करे : डॉ. आजम

शासकीय यूनानी फार्मेसी के अधीक्षक डा. मोहम्मद आजम ने कहा कि आयुष में इससे बचाव के कई कारगर उपचार उपलब्ध हैं। लोग अपनी इम्यूनिटी इतनी अधिक बढ़ाएं कि कोरोना वायरस असर ही न करे। हैबिट में ज्यादा ध्यान देना जरूरी है। यूनानी की दवाएं इस तरह की वायरस जनित बीमारियों में फायदा की हैं। इस वायरस के कंपोजीशन का पता नहीं, तो उपचार कैसे होगा। ऐसा नहीं है। उपचार से पहले उससे बचाव की कई कारगर दवाएं आयुष में हैं। रोगने हयात या रोगने अजीब दवाएं खाने से वायरस असर प्रभावित नहीं कर पाएगा। कोरोना वायरस नहीं, एक फैमिली है। यूनानी चिकित्सा में दिये जाने वाले शरबत उन्नाव को 10-20 मिली दिन में दो बार लें या तिर्याक नजला 5 ग्राम दिन में दो बार सेवन कर सकते हैं।

दवाओं के असर का आकड़ा रखना जरूरी : डॉ. पीएस श्रीवास्तव

प्राइवेट होम्योपैथी चिकत्सक डॉ. पीएस श्रीवास्तव ने कहा कि होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी चिकित्सा पद्धति की रोग प्रतिरोधक दवाओं से समुदाय को हुए फायदे का रिकॉर्ड रखना आवश्यक है। डाटा होने की वजह से आम लोगों को ये समझाया जा सकें कि इस पैथी की दवा का सेवन करने की वजह से बीमारी से बचाव हुआ है या उसका असर कम हुआ है। कोरोना के फैलने में चमगाढ़ का रोह है। यह वायरस डायरेक्ट कांटेक्ट करता है। हर मरीज के लक्षण अलग-अलग होते हैं। होम्योपैथी की दवा लक्षण के आधार पर दी जाती है, लेकिन बड़ी बीमारियों में अधिकांश के लक्षण एक जैसे होते हैं, इसलिए कुछ दवाएं हैं जो सभी को देकर वायरस के प्रभाव से बचाया जा सकता है

सोशल मीडिया के ज्ञान के बजाय डॉक्टर को दिखाएं : डेहरिया

भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुधीर डेहरिया ने बताया कि भोपाल एयरपोर्ट पर विदेश यात्रा से आने वाले 132 यात्रियों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें से कोई भी पॉजीटिव नहीं पाया गया। कोरोना से निपटने के लिए विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर अस्पतालों मे आइसोलेशन वार्ड तैयार किये गये हैं। सोशल मीडिया पर कोरोना को लेकर फैल रहीं अफवाहों और ज्ञान पर ध्यान देने के बजाय चिकित्सक को दिखायें। विदेश यात्रा से लौटे यात्रियों से मिलने से बचें। साबुन से 5-6 बार रोजाना हाथ धोयें। रेल्वे स्टेशन , अस्पताल, जैसी भीड भाड वाली जगहों की सीढिय़ों पर लगीं रैलिंग को छूने के बाद सेनेटाइजर से हाथों को साफ करें। शहर से दूर एक आइसोलेशन सेंटर तैयार किया जा रहा है, ताकि पॉजीटिव मरीजों को आबादी से दूर आइसोलेशन में रखकर उपचार किया जा सके।

अनुलोम-विलोम से बढ़ाएं इम्यूनिटी सिस्टम : डॉ. लता

योग चिकित्सक डॉ. आर एच लता ने बताया कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए इम्यूनिटी सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाना जरूरी है। डॉ. लता ने बताया कि योग में अनुलोम-विलोम को इम्यूनिटी सिस्टम बढ़ाने के लिए रामबाण तकनीक भी कहा जाता है। अनुलोम-विलोम करने से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी अधिक बढ़ जाती है, जिससे कोरोना या कोई अन्य घातक वायरस जल्दी असर नहीं कर पाता। प्रतिदिन 27 राउंड अनुलोम-विलोम प्रतिदिन करना चाहिए। यह अन्य आसन से अधिक कारगर है। इस पद्धति को विदेशी रिसर्चर भी सिद्ध कर चुके हैं। कोरोना से बचाव ही इसका उपचार है। पुरानी पद्धतियां व दवाएं नए जमाने के वायरस से लडऩे में लोगों को काफी सहायक सिद्ध होंगी।

बीमारों की पहचान करना बहुत जरूरी : डॉ. पीके भागवत

पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के अतिरिक्त निदेशक के पद से रिटायर्ड डॉ. पीके भागवत ने कहा कि इस तरह की बीमारियों के हिडन मरीज अधिक होते हैं। सामान्य शर्दी, खांसी और बुखार होने पर लोग उसे सामान्य बीमारी मानते हैं। जब वायरस लंग्स तक पहुंच जाता है तब इसका पता लगता है। लंग्स में कोरोके वायरस के पहुंचने से आदमी बीमार हो जाता है। उसे बचाव वाली दवाएं असर कम करती हैं। ऐसे में लोगों को पानी अधिक पीना चाहिए, ताकि वायरस नाक व मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश करता है तो पानी के साथ वह अंदर चला जाए। जब तक वायरस लंग्स में नहीं पहुंचेगा, वह लोगों को बीमार नहीं कर सकता। इसलिए कोरोना से बचने एलर्ट रहना पड़ेगा। इसके एकदम से मरीज बढ़े हैं, 60 वर्ष से ऊपर के लोगों, बीमारों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को प्रभाव से बचाने के लिए लोगों को जागरुक रहने के साथ बचाव के उपाय करने चाहिए।

लोगों में जागृति लाकर बचा जा सकता है

स्वदेश समाचार-पत्र समूह भोपाल के प्रधान संपादक राजेंद्र शर्मा ने कहा कि शरीर को स्वस्थ रखें, जिससे बड़ी से बड़ी बीमारी का सामना कर सकते हैं। लोगों में कोरोना वायरस के प्रति जागृति करने और उससे बचाव के बारे में जानकारी देकर बचा जा सकता है। अभी लोगों में इस बीमारी के बारे में जागृति का अभाव है। केरल में कुछ लोग प्रभावित हुए थे, जिन्हें चिकित्सकों ने ठीक कर घर भेज दिया। इस वाकये से भारत में बड़ी उम्मीद व आशा जगी है। भारत में प्रकृति साथ देने को तैयार है। दिनचर्या में नियंत्रण लाकर हम पूरी तरह से स्वस्थ रह सकते हैं। भारत में इससे पहले भी कई ब्याधियां आई हैं, उनके साथ उनका उपचार भी हुआ। भारत में उनमें सफलता प्राप्त की है। कोरोना में से भी भारत पूरी तरह सफलता पाएगा।

परिचर्चा का सञ्चालन मोटिवेशनल स्पीकर शैलेन्द्र ओझा ने किया. कार्यक्रम में सबसे पहले स्वदेश ग्रुप भोपाल के प्रबंध सम्पादक अक्षत शर्मा ने परिचर्चा के उद्देश्य पर प्रकाश डाला . कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता जीके छिब्बर ने भी संबोधित किया. आभार स्वदेश के समूह सम्पादक लाजपत आहूजा ने व्यक्त किया .


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