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सुबह से सुनसान मुंबई की सड़कों पर पुलिस की गश्त

कई कॉलोनियों में काम वाली, अखबार वाले, दूध-अंडे वालों को भी हटा दिया गया

सुबह से सुनसान मुंबई की सड़कों पर पुलिस की गश्त
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मुंबई. कभी न सोने वाली मुंबई की रफ्तार कोरोना ने रोक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर आज सुबह से ही मुंबई की सड़कें सुनसान हैं। बड़े-बड़े हादसों के कुछ घंटों बाद ही हमने मुंबई को हमेशा खड़े होते देखा है, उस मुंबई में कोरोना के डर ने सभी को घरों में बैठा दिया है। जुहू, अंधेरी लिंक रोड, अंधेरी-ओशिवारा-गोरेगांव रोड, अंधेरी-मलाड लिंक रोड पर सन्नाटा पसरा हुआ है। सड़कों पर आधे-आधे घंटे में लोकल बसें दौड़ रही हैं, जबकि लोकल ट्रेन बंद हैं। सुबह के वक्त हमेशा खचाखच भरी रहने वाली बसें पूरी तरह से खाली हैं। आमतौर पर यहां रविवार को भी भीड़ में कोई कमी नहीं होती है, लेकिन आज न तो कोई यात्री बस स्टॉप पर है और न ही बस के अंदर। ओशिवारा-अंधेरी लिंक रोड से गोरेगांव को जोड़ने वाली व्यस्ततम सड़क एकदम खाली है। गोरेगांव, भगतसिंह नगर, मोतीलाल नगर यानी पूरे इलाके में केवल एक दूध-अंडे की दुकान खुली है। यहां तक कि सुबह सात से 9 बजे के बीच जिन कॉलेनियों में चहल पहल रहा करती है, वहां लोग बाहर तक नहीं निकल रहे हैं। गोरेगांव की सबसे बड़ी बेस्ट कॉलोनी के गेटकीपर सुरेश बताते हैं कि अलसुबह चार बजे बहुत सारे लोगों का एक रेला पैदल पैदल अंधेरी की ओर जाते देखा। लेकिन उसे नहीं पता कि वे लोग कौन थे और इतनी बड़ी तादाद में कहां जा रहे थे। मुंबई में कल से ही बिहार के प्रवासियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल है। हर किसी को गांव वापिस जाना है। शनिवार को दादर और लोकमान्य स्टेशन पर बेहद मारा-मारी रही। सुबह के नौ बजने को है इक्का दुक्का लोग केवल दूध लेने निकल रहे हैं। राम मंदिर स्टेशन से कई लोग पैदल चले आ रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें गोरेगांव ईस्ट में जाना था लेकिन उसे पार करने वाले ब्रिज पर पुलिस का कड़ा पहरा है। सड़कों पर मोटरसाइकिल से पुलिस गश्त कर रही है। बेशक प्रधानमंत्री ने बंद का कॉल आज के लिए दिया हो, लेकिन मुंबई के कई इलाकों में कल से ही 50 फीसदी दुकानें बंद देखी गईं। अपार्टमेंट्स में सब्जी-भाजी वालों की व्यवस्था कॉलोनी के अंदर ही कर दी गई है। हालांकि हर सब्जी करीबन पांच रुपया मंहगी मिल रही है, लेकिन लोग ले रहे हैं। बहुत सारी कॉलोनियों में काम वाली, अखबार वाले, दूध-अंडे वालों को हटा दिया गया है, यहां तक कि कुछ कॉलोनियों ने तो यहां तक पाबंदी लगा दी है कि 31 मार्च तक किसी का कोई रिश्तेदार भी उनसे मिलने कॉलोनी में नहीं आएगा। लोग इस बात से वाकिफ हैं कि मुंबई में कोरोना के कहर के क्या नतीजे हो सकते हैं। लेकिन छोटा तबका परेशान है। सुरेश साठे का कहना है कि वह कई दिनों से कार्ड पर मिलने वाले चावल लेने के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं, लेकिन कोटे के चावल, तेल, दाल बहुत दिनों से खत्म हुए पड़े हैं। वह बोल रहे हैं कि कालाबाजारी हुई है। हालांकि लोग यहां मददगार हैं। कई लोगों ने उन्हें बोला कि वे उन्हें किसी नॉर्मल दुकान से पांच किलो चावल ले देते हैं, लेकिन स्वाभिमानी सुरेश नहीं माने।

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