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पुणे के एक अस्पताल की नर्स छाया से बातचीत में पीएम मोदी ने उनकी चिंताएं जानीं

नर्स छाया ने प्रधानमंत्री को अपना अनुभव बताया और बातचीत के लिए शुक्रिया कहा

पुणे के एक अस्पताल की नर्स छाया से बातचीत में पीएम मोदी ने उनकी चिंताएं जानीं
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नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना वॉरियर्स का मनोबल और ऊंचा करने के लिए व्यक्तिगत रूप से फोन कर रहे हैं। देशभर के अस्पतालों के उन स्वास्थयकर्मियों को प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन जा रहा है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने नायडू अस्पताल, पुणे की नर्स छाया को फोन कर उनका हालचाल लिया। बातचीत के आखिर में नर्स छाया बेहद भावुक हो गईं और प्रधानमंत्री को भगवान बता दिया। छाया ने कहा, 'हमारे लिए तो आप भी देवता हैं। पूरे देश को आपके जैसा प्रधानमंत्री मिलना चाहिए।' बातचीत की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने छाया से पूछा, 'बताइए अपने परिवार को अपने सेवाभाव के प्रति कैसे आश्वस्त कर पाईं क्योंकि आप तो बिल्कुल जी-जान से इन दिनों सबकी सेवा में लगी हुई हैं। परिवार को भी चिंता होती होगी।' इस पर छाया ने कहा कि चिंता तो होती है, लेकिन काम तो करना पड़ता है, सर। सेवा देनी होती है, हो जाता है सर। फिर प्रधानमंत्री ने पूछा, 'मरीज आते होंगे तो बहुत डरे हुए होते होंगे?' इस पर नर्स छाया ने बताया, 'हां, बहुत डरे हुए रहते हैं। लेकिन हम उनसे बात करते हैं और बताते हैं कि डरने की कोई बात नहीं है।' जब छाया ने इस फोन कॉल के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया तो मोदी ने कहा कि यह तो उनका कर्तव्य है और सबको मिलकर यह लड़ाई जीतनी है। इस पर नर्स ने कहा, 'हां, वो तो है। मैं तो अपनी ड्यूटी कर रही हूं, आप तो चौबिसों घंटे देश की सेवा कर रहे हैं।' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को कोरोना संकट से उबारने के लिए बिल्कुल फ्रंटफुट पर ऐक्टिव हैं। वह न केवल सरकारी प्रयासों की दिशा तय कर रहे हैं, बल्कि आम जनता और स्वास्थ्य कर्मियों को भरोसे में लेने की भी एक के बाद एक लगातार पहल कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधनों के जरिए आम जनता से सीधा संपर्क किया तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राजनीति, प्रशासन, उद्योग, चिकित्सा, मीडिया समेत विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से बात की। अब कोरोना मरीजों को समर्पित अस्पतालों के स्टाफ से बात कर उनका मनोबल बढ़ाने में जुट गए हैं। ऐसा करना जरूरी भी है क्योंकि कोरोना मरीजों के इलाज में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमित होने का खतरा होता है। ऊपर से उन पर परिवार वालों का भी दबाव होता है। ऐसे में स्वास्थयकर्मियों के अंदर डर और निराशा की भावना पनप सकती है। इस आशंका को खारिज करने के लिए ही प्रधानमंत्री मोदी फोन पर बातचीत के जरिए मेडिकल फ्रैटर्निटी को बड़ा संदेश दे रहे हैं कि सरकार और खुद पीएम उनके साथ हैं। ध्यान रहे कि सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 50 लाख रुपये के बीमा की घोषणा भी की है।

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