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सेना प्रमुख शीर्ष कमांडरों के साथ बैठक कर रहे, चीन के साथ सीमा पर तनाव के अलावा अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को हाईलेवल मीटिंग बुलाई थी, इसमें रक्षा मंत्री, एनएसए, सीडीएस और तीनों सेना प्रमुख शामिल हुए

सेना प्रमुख शीर्ष कमांडरों के साथ बैठक कर रहे, चीन के साथ सीमा पर तनाव के अलावा अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
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नई दिल्ली. आर्मी के टॉप कमांडर्स की दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस बुधवार से शुरू गई है। इसमें सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे भी मौजूद रहेंगे। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इसमें भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव के साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। यह बैठक ऐसे वक्त हो रही है जब लद्दाख सेक्टर में चीन और भारत की सेना आमने-सामने हैं। चीन ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) की विभिन्न लोकेशन पर अपने 5 हजार सैनिक तैनात किए हैं। भारत भी इतनी संख्या में जवानों की तैनाती बढ़ा रहा है।

मोदी ने सीडीएस और तीनों सेना प्रमुख के साथ बैठक की थी

चीन की हरकतों के बीच भारत में भी हालात से निपटने की तैयारियां शुरू हो गईं। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाईलेवल मीटिंग बुलाई। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुख शामिल हुए। इसके बाद, मोदी ने विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला से भी चर्चा की। इससे पहले लद्दाख में तनाव पर रक्षा मंत्री की सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों से करीब एक घंटे मीटिंग हुई थी। सूत्रों के हवाले से कहा कि दोनों बैठकों में मोदी और राजनाथ को चीन की हरकतों पर भारतीय सेना के जवाब की जानकारी दी गई। मीटिंग में दो अहम फैसले लिए गए। पहला- इस क्षेत्र में सड़क निर्माण जारी रहेगा। दूसरा- भारतीय सैनिकों की तैनाती उतनी ही रहेगी जितनी चीन की है।

डोकलाम के बाद सबसे बड़ा टकराव

अगर भारत और चीन की सेनाएं लद्दाख में आमने-सामने हुईं तो 2017 के डोकलाम विवाद के बाद ये सबसे बड़ा विवाद होगा। न्यूज एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, भारत ने पेंगोंग त्सो झील और गालवान वैली में सैनिक बढ़ा दिए हैं। इन दोनों इलाकों में चीन ने दो हजार से ढाई हजार सैनिक तैनात किए हैं, साथ ही अस्थाई सुविधाएं भी बढ़ा रहा है। चीन लद्दाख के कई इलाकों पर अपना दावा करता रहा है।

डोकलाम पर 73 दिन टकराव चला था

भारत-चीन बॉर्डर पर डोकलाम इलाके में दोनों देशों के बीच 2017 में 16 जून से 28 अगस्त के बीच तक टकराव चला था। हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। के आखिर में दोनों देशों में सेनाएं वापस बुलाने पर सहमति बनी थी।

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