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अयोध्या के रामजन्मभूमि परिसर में आज रुद्राभिषेक, मोदी को शिलान्यास के लिए न्यौता

महंत कमल नयन दास भगवान शिव रुद्राभिषेक करेंगे। इसी बीच पीएम नरेंद्र मोदी को श्रीराम मंदिर के निर्माण कार्य के शिलान्यास का न्यौता भी दिया जा चुका है

अयोध्या के रामजन्मभूमि परिसर में आज रुद्राभिषेक,  मोदी को शिलान्यास के लिए न्यौता
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अयोध्या, लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद भगवान राम की नगरी अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। श्री रामजन्मभूमि परिसर में कुबेर टीले पर बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास भगवान शिव रुद्राभिषेक करेंगे। इसी बीच पीएम नरेंद्र मोदी को श्रीराम मंदिर के निर्माण कार्य के शिलान्यास का न्यौता भी दिया जा चुका है । ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय के पहले रामेश्वरम में शिव की आराधना की थी, उसी विरासत के अनुरूप रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण से पूर्व शिव की आराधना की जाएगी। बीते गत दिनों यह विचार श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयनदास के मन में आया। तब वह रामजन्मभूमि परिसर का जायजा ले रहे थे और इसी दौरान कुबेर टीला पर विराजे शिवलिंग के सम्मुख पहुंचे। श्रद्धावनत होने के साथ उनके मन में विचार आया कि मंदिर निर्माण शुरू होने की पावन बेला में वह कुबेर टीला पर विराजे भगवान शशांक शेखर का अभिषेक करें। आज के इस शिवलिंग पूजन को लेकर उत्साहित कमलनयनदास के अनुसार इसके पीछे मकसद भव्य राममंदिर निर्माण से पूर्व भूतभावन भगवान शिव को प्रसन्न करना है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण से पहले बुधवार को भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाएगा। श्रीरामजन्मभूमि परिसर में कुबेर टीले पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास रुद्राभिषेक करेंगे। श्रीराम मंदिर निर्माण में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए शिव की आराधना होगी।

जल्द ही तय होगी शिलान्यास की तारीख

अयोध्या में जल्द राम मंदिर का निर्माण तो नहीं लेकिन शिलान्यास समारोह की तारीख तय हो सकती है। ऐसे में माना जा रहा है देश में कोरोना संक्रमण के हालातों को ध्यान में रखते हुए इस पखवाड़े तो श्रीराम लला के नवल मंदिर निर्माण के शिलान्यास के आसार तो नहीं हैं। माना जा रहा देवशयन एकादशी के मुहूर्त पर शिलान्यास समारोह हो सकता है। ऐसे में बहुत मुमकिन है कि देवताओं के शयन से ऐन पहले अयोध्या में शिलान्यास का सूर्य उदित होगा। श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास से जुड़े लोगों ने बताया कि दो जुलाई को देव शयनी एकादशी है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के मुहूर्त में देवताओं की निशा शुरू हो जाती है। इसके बाद फिर चार माह के लिए देवता सो जाते हैं। ऐसे में आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक देवशयन काल होने से विवाहादि शुभ और नूतन निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किए जाते। ऐसे में यहां पर शिलान्यास कार्यक्रम देव शयनी एकादशी में कार्यक्रम रखने की संभावना प्रबल दिखाई दे रही है। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी उपस्थित रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

पीएमओ से लगातार सम्पर्क

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आला अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएमओ के साथ लगातार संपर्क में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक न्योता दिया जा चुका है और वह इसे स्वीकार भी चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यक्रम के मुताबिक, एक दो दिन का अंतर पड़ सकता है, लेकिन अगर ये मुहूर्त निकला तो फिर दीपावली के 11 दिन बाद ही अगला मुहूर्त आएगा।

तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय का उद्घाटन

रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कैंप कार्यालय का उद्घाटन सोमवार को किया गया। यह कार्यालय रामजन्मभूमि परिसर के मुख्य गेट के पास में रामकचेहरी मंदिर से लगा है। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कार्यालय का उद्घाटन विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज ने किया। उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण से संबंधित जानकारी ट्रस्ट के कैंप कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि राममंदिर निर्माण के जिस लक्ष्य के लिए पांच सौ वर्षों तक सुदीर्घ संघर्ष चला और लाखों हिंदुओं ने बलिदान दिया, उस लक्ष्य को फलीभूत होते देखना अत्यंत गौरवमय है और आज मंदिर निर्माण की दिशा में एक-एक कदम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का परिचायक है। उन्होंने कहा, ट्रस्ट का यह कार्यलय मंदिर निर्माण के अभियान का अहम केंद्र होगा और इसकी प्रासंगिकता लंबे समय तक बनी रहेगी। तीर्थ क्षेत्र के कार्यलय के लिए भवन-भूमि रामकचहरी मंदिर के महंत शशिकांतदास की ओर से निश्शुल्क प्रदान की गयी है। शशिकांतदास के अनुसार जिस स्वप्न को लेकर करोड़ों-करोड़ भारतीयों ने स्वयं को दांव पर लगाये रखा, उसे साकार करने की दिशा में इस तरह के सहयोग का अवसर हमें गौरवांवित कर रहा है।

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