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सरकार और किसानों के बीच वार्ता, किसान नेता बोले- कानून लेने ही होंगे वापस

सरकार और किसानों के बीच होने वाली वार्ता पर वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने कहा हमें उम्मीद है कि वार्ता निर्णायक होगी। किसानों से एमएसपी सहित सभी मुद्दों पर खुले दिल से बात की जाएगी।

सरकार और किसानों के बीच वार्ता, किसान नेता बोले- कानून लेने ही होंगे वापस
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नई दिल्ली । केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक महीने से ज्यादा समय से दिल्ली की सीमाओं पर धरने पर बैठे किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की केंद्र सरकार के साथ अगले दौर की बातचीत आज राजधानी के विज्ञान भवन में हो रही है। केंद्र सरकार से बातचीत के लिए किसान नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल विज्ञान भवन पहुंच गया है। वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि वार्ता निर्णायक होगी। हालांकि, इस वार्ता के नतीजों को लेकर संशय है, क्योंकि किसान संगठन इन कानूनों को वापस लिए जाने से कम पर मानने को तैयार नहीं हैं। वहीं, सरकार कह चुकी है कि इन कानूनों में संशोधन तो हो सकता है, लेकिन उन्हें रद नहीं किया जाएगा।

- भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत, जो कि कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं, किसानों और सरकार के बीच आज की वार्ता के लिए गाजीपुर बॉर्डर (यूपी-दिल्ली बॉर्डर) से दिल्ली में विज्ञान भवन के लिए रवाना हो गए हैं।

- केंद्र सरकार से बातचीत के लिए किसान नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल विज्ञान भवन पहुंच गया है। इस बीच एक किसान नेता ने कहा, 'हमारा रुख स्पष्ट है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए।'

- किसान नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल तीन कृषि कानूनों पर केंद्र के साथ बातचीत करने के लिए सिंघू बॉर्डर से विज्ञान भवन के लिए हुए रवाना। केंद्र सरकार आज प्रदर्शनकारी किसानों के साथ छठे दौर की वार्ता करने जा रही है।

- सरकार और किसानों के बीच होने वाली वार्ता पर वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि वार्ता निर्णायक होगी। किसानों से एमएसपी सहित सभी मुद्दों पर खुले दिल से बात की जाएगी। मुझे उम्मीद है कि किसानों का आंदोलन आज समाप्त हो रहा है।

- दिल्‍ली के गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने कहा, 'देखिए यह जरूरी है कि देश में मजबूत विपक्ष हो, जिससे सरकार को डर हो, लेकिन यहां वो नहीं है। इसी कारण किसानों को सड़कों पर आना पड़ा। विपक्ष को अपने टेंट में बैठने के बजाए कृषि कानूनों के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन करना चाहिए।

- किसान मजदूर संघर्ष समिति पंजाब के संयुक्त सचिव सुखविंदर सिंह साबरा का कहना है कि किसानों और सरकार के बीच पांच दौर की बातचीत अभी तक हो चुकी है। हमें नहीं लगता कि हम आज भी किसी समाधान तक पहुंचेंगे। तीनों कृषि कानूनों को निरस्त किया जाना चाहिए।

वार्ता पर संकट के बादल

वार्ता से पहले संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को पत्र लिखकर अपनी मंशा जाहिर कर दी है। उनका कहना है कि वे तीनों नए कृषि कानूनों को रद करने और एमएसपी की लीगल गारंटी के एजेंडे पर ही बातचीत करेंगे। सरकार को कृषि कानून रद करने के तौर तरीके पर ही चर्चा करनी होगी। वार्ता की पूर्व संध्या पर किसान संगठनों के अपनाए गए इस रख से वार्ता की सफलता पर संदेह के बादल एक बार फिर छाने लगे हैं। बता दें कि वार्ता से पूर्व केंद्रीय कृषिष मंत्री नरेंद्र तोमर, रेल, वाणिज्य व खाद्य मंत्री पीयूष गोयल ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर वार्ता में उठने वाले मुद्दों और उनके समाधान के बारे में चर्चा की। सरकार किसानों की शंकाओं के समाधान को लेकर गंभीर है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने किया नए कृषि कानूनों का समर्थन

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) ने नए कृषि कानूनों का समर्थन किया है। आइसीएआर ने अपनी वेबसाइट पर संदेश लिखा है कि कृषि विज्ञानी, शोधकर्ता, विद्यार्थी और रिसर्च इंस्टीट्यूट नए कृषि कानूनों के समर्थन में हैं। यह कानून कृषि और किसानों के लिए लाभदायक हैं। गौरतलब है कि आइसीएआर कृषि मंत्रालय के तहत एक स्वायत्तशासी संस्था है। देश में बागवानी, मत्स्य व पशु विज्ञान सहित कृषि के क्षेत्र में समन्वयन, मार्गदर्शन, अनुसंधान प्रबंधन व शिक्षा के लिए आइसीएआर सर्वोच्च निकाय है।

मोदी बोले- आंदोलन के नाम पर इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाना गलत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को पांच हजार करोड़ रुपए की लागत से तैयार बहुप्रतीक्षित डेडिकेटेड ईस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर के 351 किमी लंबाई के एक खंड का उद्घाटन किया। इस मौके पर पीएम आंदोलन के नाम पर सरकारी संपत्तियों खासकर रेलवे, सड़क आदि इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने वालों पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि यह संपत्ति किसी राजनीतिक दल, सरकार या नेता की नहीं है। यह देश की संपत्ति है। इसमें गरीबों और आम लोगों की जेब का पैसा और पसीना लगा है।

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