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सुप्रीम कोर्ट का सरकार को आदेश- प्रवासी मजदूरों को 15 दिन में उनके घर भेजें

कोर्ट ने कहा- प्रवासियों के खिलाफ लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने पर दर्ज केस वापस लें

सुप्रीम कोर्ट का सरकार को आदेश- प्रवासी मजदूरों को 15 दिन में उनके घर भेजें
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नई दिल्ली. लॉकडाउन के कारण अलग-अलग राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को 15 दिन में उनके घर भेजा जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने पर दर्ज किए गए सभी केस वापस लें। केंद्र और राज्य सरकारें प्रवासी मजदूरों की पहचान के लिए एक सूची तैयार करें। कोर्ट ने यह भी कहा है कि सरकारें इन श्रमिकों के स्किल (कौशल) की मैपिंग करके उन्हें रोजगार के मुद्दे पर भी राहत दें।

पिछले आदेश में कहा था- मजदूरों से किराया न लिया जाए

प्रवासी मजदूरों के पलायन पर सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को अंतरिम आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रेनों और बसों से सफर कर रहे प्रवासी मजदूरों से किसी तरह का किराया न लिया जाए। यह खर्च राज्य सरकारें ही उठाएं। कोर्ट ने आदेश दिया कि फंसे हुए मजदूरों को खाना मुहैया कराने की व्यवस्था भी राज्य सरकारें ही करें।

कोर्ट ने 28 मई को 4 आदेश दिए थे

1. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रेन और बस से सफर कर रहे प्रवासी मजदूरों से कोई किराया ना लिया जाए। यह खर्च राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें उठाएं।

2. स्टेशनों पर खाना और पानी राज्य सरकारें मुहैया करवाएं और ट्रेनों के भीतर मजदूरों के लिए यह व्यवस्था रेलवे करे। बसों में भी उन्हें खाना और पानी दिया जाए।

3. देशभर में फंसे मजदूर जो अपने घर जाने के लिए बसों और ट्रेनों के इंतजार में हैं, उनके लिए भी खाना राज्य सरकारें ही मुहैया करवाएं। मजदूरों को खाना कहां मिलेगा और रजिस्ट्रेशन कहां होगा। इसकी जानकारी प्रसारित की जाए।

4. राज्य सरकार प्रवासी मजदूरों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को देखें और यह भी निश्चित करें कि उन्हें घर के सफर के लिए जल्द से जल्द ट्रेन या बस मिले। सारी जानकारियां इस मामले से संबंधित लोगों को दी जाएं।

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