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मोदी ने कहा- 3-4 साल के विमर्श और लाखों सुझावों के बाद नई शिक्षा नीति तैयार की; इसे बनाने में भेदभाव हुआ, यह बात कहीं नहीं उठी

सरकार ने 30 जुलाई को नई शिक्षा नीति का ऐलान किया था

मोदी ने कहा- 3-4 साल के विमर्श और लाखों सुझावों के बाद नई शिक्षा नीति तैयार की; इसे बनाने में भेदभाव हुआ, यह बात कहीं नहीं उठी
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नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज हायर एजुकेशन पर हो रहे कॉन्क्लेव में संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 3-4 साल के व्यापक विचार-विमर्श और लाखों सुझावों के बाद एजुकेशन पॉलिसी मंजूर की गई है। अलग-अलग क्षेत्र और विचारधाराओं के लोग अपनी राय दे रहे हैं। ये हेल्दी डिबेट है, ये जितनी ज्यादा होगी उतना ही लाभ मिलेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश के किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि किसी तरह का भेदभाव है। ये एक इंडिकेटर भी है कि लोग वर्षों से चली आ रही शिक्षा व्यवस्था में जो बदलाव चाहते थे, वो उन्हें मिले हैं। कार्यक्रम में एचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और कई यूनिवर्सिटीज के वाइस चांसलर भी शामिल हुए। 'ट्रांसफॉर्मेशनल रिफॉर्म्स इन हायर एजुकेशन अंडर नेशनल एजुकेशन पॉलिसी' की थीम वाले इस इवेंट को यूजीसी और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लाइव टेलीकास्ट भी किया गया।

मोदी के संबोधन की मुख्य बातें

मैं पूरी तरह से आपके साथ

यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतना बड़ा रिफॉर्म जमीन पर कैसे उतारा जाएगा। इस चैलेंज को देखते हुए व्यवस्थाओं को बनाने में जहां कहीं कुछ सुधार की जरूरत है, वह हम सभी को मिलकर करना है। आप सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में सीधे तौर पर जुड़े हैं। इसलिए आप सब की भूमिका बहुत अहम है। जहां तक पॉलिटिकल विल की बात है, मैं पूरी तरह कमिटेड हूं, आपके साथ हूं।

नेशनल वैल्यूज के साथ गोल्स तय किए

हर देश अपनी शिक्षा व्यवस्था को नेशनल वैल्यूज के साथ जोड़ते हुए, नेशनल गोल्स के अनुसार रिफॉर्म्स करते हुए आगे बढ़ता है, ताकि देश का एजुकेशन सिस्टम अपनी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों का फ्यूचर तैयार करे। भारत की पॉलिसी का आधार भी यही सोच है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 21वीं सदी के भारत की फाउंडेशन तैयार करने वाली है।

नई नीति में स्किल्स पर फोकस

21वीं सदी के भारत में हमारे युवाओं को जो स्किल्स चाहिए, राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इस पर विशेष फोकस है। भारत को ताकतवर बनाने के लिए, विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाने के लिए इस एजुकेशन पॉलिसी में खास जोर दिया गया है। जब भारत का स्टूडेंट चाहे वो नर्सरी में हो या फिर कॉलेज में, तेजी से बदलते हुए समय और जरूरतों के हिसाब से पढ़ेगा तो नेशन बिल्डिंग में कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभा पाएगा।

अब इनोवेटिव थिंकिंग पर जोर

बीते कई साल से हमारे एजुकेशन सिस्टम में बदलाव नहीं हुए, जिससे समाज में क्यूरोसिटी और इमेजिनेशन की वैल्यू को प्रमोट करने के बजाय भेड़ चाल को प्रोत्साहन मिलने लगा था। कभी डॉक्टर तो कभी इंजीनियर तो कभी वकील बनाने की होड़ लगने लगी। इससे बाहर निकलना जरूरी था। हमारे युवाओं में क्रिटिकल और इनोवेटिव थिंकिंग विकसित कैसे हो सकती है, जब तक शिक्षा में पैशन न हो, परपज ऑफ एजुकेशन न हो

नई शिक्षा नीति क्या है?

सरकार ने 30 जुलाई को नई शिक्षा नीति घोषित की थी। इसमें स्कूलों के एडमिनिस्ट्रेशन को लेकर बड़े बदलाव किए गए हैं। जैसे कॉम्प्लेक्स या क्लस्टर के तौर पर स्कूलों का मैनेजमेंट किया जाएगा। इलाके का सैकंडरी स्कूल आस-पास के सभी छोटे स्कूलों का प्रमुख बनाया जाएगा। देशभर में एक सरकारी और एक निजी स्कूल को साथ जोड़ने की बात भी कही गई है। ऑनलाइन एजुकेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। पढ़ाई के पैटर्न में 10 साल के अंदर धीरे-धीरे बदलाव किए जाएंगे।

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