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1975 के बाद चीन के साथ हिंसक झड़प में पहली बार हुई सैनिकों की शहादत

भारत और चीन के बीच इतनी हिंसक झड़प हुई है। साल 1975 में अरुणाचल प्रदेश के तुलुंग ला में पेट्रोलिंग के दौरान असम राइफल्स के चार जवान शहीद हो गए थे। हालांकि, दोनों देशों के बीच कोई बड़ा संघर्ष 1967 में सिक्किम में हुआ था।

1975 के बाद चीन के साथ हिंसक झड़प में पहली बार हुई सैनिकों की शहादत
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नई दिल्ली, पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पिछले महीनेभर से ज्यादा समय से जारी तनाव और अधिक बढ़ गया है। गलवान घाटी में सोमवार रात चीनी सैनिकों के साथ 'हिंसक टकराव' के दौरान एक अफसर और दो सैनिक शहीद हो गए। इसके अलावा चीन के भी सैनिक मारे गए हैं। साल 1975 के बाद पहली बार ऐसा मौका है, भारत और चीन के बीच इतनी हिंसक झड़प हुई है। साल 1975 में अरुणाचल प्रदेश के तुलुंग ला में पेट्रोलिंग के दौरान असम राइफल्स के चार जवान शहीद हो गए थे। हालांकि, दोनों देशों के बीच कोई बड़ा संघर्ष 1967 में सिक्किम में हुआ था। साल 1962 में भारत-चीन के बीच युद्ध के पांच साल बाद भारत ने बदला लेते हुए सिक्किम में तकरीबन 400 सैनिकों को मार गिराया था। हालांकि, इस संघर्ष में भारत ने भी अपने 80 सैनिक खो दिए थे। भारत और चीन के बीच तनाव तब शुरू हुआ था, जब पांच मई को दोनों देशों के सैनिक गत पांच और छह मई को पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग सो क्षेत्र में आपस में भिड़ गए थे। पांच मई की शाम को चीन और भारत के 250 सैनिकों के बीच हुई यह हिंसा अगले दिन भी जारी रही थी। इसके बाद नौ मई को उत्तर सिक्किम सेक्टर में भी इस तरह की घटना हुई थी। भारत-चीन सीमा विवाद 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी को लेकर है। इसके बाद दोनों सेनाओं ने बातचीत के जरिए से सीमा विवाद हल करने की कोशिश की थी।

हाल ही में डेढ़ किलोमीटर तक वापस हुई थी चीनी सेना

पिछले दिनों चीनी सेना ने कुछ इलाकों से अपने कदम पीछे खींचे थे। सूत्रों के हवाले से सामने आया था कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत के दौरान पूर्वी लद्दाख के कई क्षेत्र से चीन की सेना डेढ़ किलोमीटर पर वापस लौट गई थी। वहीं, चीनी सेना पैंगोंग सो, दौलत बेग ओल्डी, डेमचोक जैसे क्षेत्रों में तो अपने मोर्चे पर डटी थीं।

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