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प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए काम की खबर, इन फूड्स और ड्रिंक्स के सेवन से बचना है जरूरी

प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए काम की खबर, इन फूड्स और ड्रिंक्स के सेवन से बचना है जरूरी
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प्रेगनेंट महिलाओं को खानपान के बारे में ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। मुंह में जानेवाला ड्रिंक विकसित हो रहे बच्चे के साथ शेयर होता है। सेहतमंद प्रेगनेन्सी के लिए, संभावित मां की डाइट का संतुलित और पोषण से भरपूर होना जरूरी होता है। डाइट को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, फैट्स और अन्य सूक्ष्म पोषण से भरपूर होना चाहिए।

कुछ फूड्स और ड्रिंक्स से करें परहेज

लेकिन कुछ ऐसे फूड्स हैं जिनका इस्तेमाल करने से प्रेगनेन्सी के दौरान जरूर बचना चाहिए क्योंकि उससे आपको या आपके बच्चे को खतरा हो सकता है। आपको जानना चाहिए किस तरह के फूड्स और ड्रिंक्स से परहेज करना है।

दूध और पनीर: कच्चा दूध और पनीर में बैक्टीरिया की श्रृंखला होती है। इन सभी बैक्टीरिया का नतीजा अजन्मे शिशु की जिंदगी के लिए खतरनाक हो सकता है।

कच्चे अंकुर: कच्चे अंकुरित साल्मोनेला बैक्टीरिया से दूषित हो सकते हैं और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। अंकुरित का सेवन उसी वक्त सुरक्षित हो सकता है जब उन्हें पका लिया जाए।

कॉफी: कैफीन बहुत जल्दी अवशोषित होता है और प्लेसेंटा में पहुंच जाता है। इसलिए, प्रेगनेन्सी के दौरान कैफीन का ज्यादा इस्तेमाल भ्रूण की वृद्धि को रोक सकता है और जन्म के वक्त शिशु के वजन में कमी का खतरा बढ़ाता है।

अंडे: कच्चा अंडा साल्मोनेला बैक्टीरिया से दूषित हो सकता है। जिसकी वजह से बुखार, उल्टी, पेट में ऐंठन, जी मिचलाने की समस्या हो सकती है। अपवाद मामलों में इससे यूटेरस में ऐंठन होने का भी डर रहता है और हो सकता है उसके चलते समय से पहले जन्म या मृत जन्म हो जाए।

कच्ची मछली: कच्ची मछली कई संक्रमण का कारण बन सकती है। उनमें से कुछ संक्रमण सिर्फ प्रेगनेन्ट महिलाओं को प्रभावित कर सकते हैं जबकि दूसरे संक्रमण आपके बच्चे तक ट्रांसफर हो सकते हैं।

पपीता: कच्चे पपीते में लेटेक्स नामक पदार्थ पाया जाता है जो गर्भाशय के संकुचन का कारण बनता है। प्रेगनेन्सी के दौरान पपीते का खाना गर्भपात का कारण बन सकता है या भ्रूण की वृद्धि को रोकता है।

अल्कोहल: प्रेगनेन्सी के दौरान महिलाओं को अल्कोहल के सेवन से बचने की सलाह दी जाती है। ये ड्रिंक मिसकैरेज का खतरा बढ़ाता है और नकारात्मक तरीके से आपके शिशु के दिमागी विकास को प्रभावित कर सकता है।

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