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पति- पत्नी की लड़ाई का बच्चों पर पड़ता है ऐसा प्रभाव, भूलकर भी न करें ये गलती

पति- पत्नी की लड़ाई का बच्चों पर पड़ता है ऐसा प्रभाव, भूलकर भी न करें ये गलती
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जिन घरों में पति-पत्नी बहुत अधिक लड़ाई करते हैं, उन घरों में खुशहाली नहीं रहती है। उन घरों में बच्चे अपना बचपन खो देते हैं। पति-पत्नी तो गुस्से में एकदूजे को न जाने क्या-क्या कह देते हैं लेकिन वे भूल जाते हैं कि उनकी लड़ाई का प्रभाव किस कदर उनके बच्चों एवं भविष्य पर पड़ रहा है। जिन घरों में आए दिन किचकिच चल रही होती है उन घरों के बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में थोड़े अलग होते हैं। वे अधिक गुस्सैल, चिढ़चिढ़े एवं अक्सर गुमसुम रहते हैं जिससे कि बड़े हो जाने पर भी उनकी मानसिक सेहत प्रभावित रहती है।

जानिए मम्मी- पापा की लड़ाई का बच्चों पर किस तरह पड़ता है प्रभाव।

बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं

बच्चों को अपने मम्मी और पापा दोनों से ही समान रूप से प्यार होता है। ऐसे में वे जब मम्मी- पापा को एक दूसरे से लड़ाई करते हुए देखते हैं तो वे यह पीड़ा सहन नहीं कर पाते हैं। कई सारे बच्चे रोने लग जाते हैं, कई बच्चे इस कदर तनाव में चले जाते हैं कि गुमसुम रहने लगते हैं, स्कूल में भी अपने दोस्तों व टीचर्स से बात करना बंद कर देते हैं। घर में भी किसी एक कोने में बैठकर घंटों बीता देते हैं।

बच्चे चिढ़चिढ़े हो जाते हैं

जिन घरों में मम्मी-पापा बात- बात पर लड़ाई करते हैं। उन घरों में बच्चे दिन-ब-दिन चिढ़ने लगते हैं। वे किसी भी बात का जवाब सीधे नहीं दे पाते हैं। बिना बात के चिल्लाना उनका स्वभाव बन जाता है। जब उनके मन मुताबिक कोई बात नहीं होती है तो वे घर का सामान फेंकने लगते हैं। छोटे भाई- बहन एवं दोस्तो के साथ कभी- कभी हाथापाई भी कर लेते हैं।

बच्चे मम्मी-पापा से दूर हो जाते हैं

जब पति-पत्नी बहुत अधिक लड़ते हैं तो उनका ध्यान बच्चों पर बिल्कुल नहीं होता। वे उनकी मनोस्थिति के विषय में नहीं सोच पाते हैं। ऐसे में यदि बच्चे मम्मी या पापा के पास जाते हैं तो मम्मी- पापा उनपर भी अपना गुस्सा निकालते हैं। बच्चों को जब इस तरह का व्यवहार देखने मिलता है तो वे डर जाते हैं औैर धीरे- धीरे मम्मी- पापा से दूर होने लगते हैं। वे अपना ज्यादा से ज्यादा समय टीवी और मोबाइल के साथ बिताने लगते हैं।

बच्चे आक्रमक हो जाते हैं

बच्चे बड़ों को जैसा करते हुए देखते हैं, वे भी वैसा ही करने की सोचते हैं। ऐसे में जब दोस्तों के साथ खेलते वक्त उनकी मर्जी की कोई बात नहीं होती है तो वे चिल्लाने लगते हैं, अपशब्द कह देते हैं और जो उनके हाथ में होता है उससे मारने- पीटने लगते हैं। आगे चलकर यह स्वभाव उनके और माता-पिता दोनों के लिए दुखदायी बन जाता है।

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