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चालो-चालो वीर गुण गावा, प्रभु महावीर...

ज्ञानोदय तीर्थधाम में संगीतमय स्वर लहरियों के साथ अध्र्य किये समर्पित

चालो-चालो वीर गुण गावा, प्रभु महावीर...
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भोपाल, राजधानी के समीप ज्ञानोदय तीर्थधाम में 2 दिवसीय आध्यात्मिक शिविर एवं तीर्थधाम स्थापना के अवसर पर आयोजित मांगलिक कार्यक्रम में भक्ति गीतों की प्रस्तुति हुई। यहां पर प्रात: भगवान जिनेन्द्र का अभिषेक मंत्रोच्चारित शांति धारा के साथ संगीतमय स्वर लहरियों के बीच हुआ जहां श्रद्धालुओं ने भगवान शीतलनाथ की आराधना की तथा भक्तिभाव से ''चालो-चालो वीर गुण गावा, प्रभु महावीर गुण गावा..ÓÓ पंखिड़ा ओ पंखिड़ा उड़के जाना जा रे...आदि भजनों पर झूम-झूम कर भक्ति नृत्य किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे। इस अवसर पर तीर्थधाम परिसर में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया गया था, जिसमें राजधानी के प्रसिद्ध अनुभवी चिकित्सकों ने उचित परामर्श देकर प्रमुख जाँच भी की थी। प्रमुख चिकित्सक डॉ. संजय जैन एमडी हमीदिया, डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह एमडी मेडीसिन एम्स, डॉ. आर.के. जैन एमडी मेडीसिन विदिशा, डॉ. निशांत जैन एमएस आर्थोपेटिक्स, डॉ. आकाश जैन एमडी ने अपनी सेवाऐं दी। रात्रि में भगवान जिनेन्द्र की आरती की साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई। वीतराग विज्ञान पाठशाला के बच्चों द्वारा जिन शासन की महिमा का मंचन किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से वीरेन्द्र दलाल, अमरेश सिंघई, शैलेन्द्र सोगानी, सुरेन्द्र सोगानी, आदि गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

तन संवारने की जगह चेतन को संभालो

विधि विधान से धार्मिक अनुष्ठान करवाने के दौरान पंडित राजेन्द्र जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि 'जब आधात्म दृष्टि रहती है, तो साधक का चिंतन आत्मत्व की ओर हो जाता है। तन को सवारने में तो आप सबने जीवन गुजार दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म दुर्लभ है, संभालना है, तो चेतन का संभालो, क्योंकि कल्याण चेतन को संभालने से होगा। ज्ञान की ओर दृष्टि रखो, पर विवेक और विनय के साथ, क्योंकि ज्ञान ही सुख का मूल है और ज्ञान ही दुख का शूल है। केवल ज्ञानी रागद्वेष से रहित होता है और संसारी प्राणी रागद्वेष में ही लिप्त रहता है। सदैव अंदर की ओर झांको और स्वर को निहारो। आत्मा का काम जानना और देखना है। दोपहर को पं. टोडरमल जी की 300वीं जयंती के अवसर पर मोक्ष मार्ग प्रकाशक गं्रथ के आधार पर विद्वानों के विशेष व्याख्यान हुए।

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