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संकट के दौर में भी लोगों की जेब काट रहे हैं व्यवसायी

जो आलू प्याज कुछ दिन पहले तक 25 से ?30 प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा था वह अब ?80 किलो में बिक रहा है। आम लोगों की मजबूरी यह है कि उनके पास ज्यादा दाम देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है।

संकट के दौर में भी लोगों की जेब काट रहे हैं  व्यवसायी
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भोपाल। कोरोना की इस भीषण आपदा को भी कुछ स्वार्थी लोगों ने लूट का अवसर बना लिया है। लॉक डाउन का हवाला देकर बाजार में सब्जियों से लेकर किराना स्टोर पर मिलने वाले सामान के दाम आसमान पर पहुंच रहे हैं। दुकानदार लॉक डाउन का हवाला देकर आम लोगों से मनमर्जी के दाम वसूल रहे हैं। आलम यह है कि जो आलू प्याज कुछ दिन पहले तक 25 से 30 प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा था वह अब ?80 किलो में बिक रहा है। आम लोगों की मजबूरी यह है कि उनके पास ज्यादा दाम देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। राजधानी भोपाल में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की बढ़ती संख्या देखते हुए सरकार ने टोटल लॉक डाउन कर दिया है। यही वजह है कि लोगों की मजबूरी का फायदा व्यवसायी उठा रहे हैं। वो लोगों ेस मनमाने दाम वसूल रहे हैं। सब्जी और किराना व्यवसायी मनमर्जी के दाम वसूल रहे हैं। किराना स्टोर पर आम दिनों में 38 से 40 रुपए प्रति किलो मिलने वाली चीनी 45 से 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है।

हेल्पलाइन नंबर से मदद नहीं

सरकार की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि जरूरी चीजों की सप्लाई को बाधित नहीं होने दी जाएगी। ऐसे में अगर कोई तय कीमत से ज्यादा रुपए वसूलता है तो फिर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। लेकिन आम लोगों की मजबूरी यह है कि यह हेल्पलाइन नंबर उनकी मदद नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि या तो यह नंबर रिसीव नहीं होते या फिर लंबे समय तक इंगेज बताते हैं।ऐसे में लोग थक हार कर और ज्यादा कीमत पर सामान खरीदने को मजबूर हैं।

क्या मददगार होंगे सांची पार्लर ?

प्रशासन ने लोगों की परेशानी का एक समाधान सांची पार्लर के जरिए तलाशने की कोशिश की है। प्रशासन की ओर से सांची पार्लर पर राशन के पैकेट कुछ तय कीमत पर देने की तैयारी की गई है। मसलन भोपाल के 103 सांची पार्लर में 300, 500 और 700 रुपए में राशन के पैकेट बांटने की तैयारी है जो सुबह 9:00 से शाम 7:00 बजे तक खरीदे जा सकेंगे। राशन पैकेट में आटा दाल चावल चीनी चायपत्ती तेल मसाला शामिल होगा। देखना यह होगा कि क्या यह आम लोगों की जरूरत को पूरा कर पाएंगे ?

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