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गुल्लक से गुडलक कहने वाले एमपी के मासूमों ने दान किए अपनी चॉकलेट और खिलौनों के पैसे

कोरोना संकट के इस दौर में बच्चे भी अपनी तरफ से सहयोग कर रहे हैं। इन नन्हें-मुन्नों ने अपनी गुल्लक में जमा पैसे पीएम और सीएम राहत कोष के लिए दान दे दिए हैं।

भोपाल। कहते हैं अगर जज्बा हो और कुछ कर गुजरने का माद्दा हो तो उम्र कभी आड़े नहीं आती। ये कहानी गुल्लक से गुडलक कहने वाले मध्य प्रदेश के उन मासूम फरिश्तों की है, जिन्होंने अपनी हसरतों को कोरोना योद्धाओं के नाम कर इंसानियत की मिसाल पेश की है। इन बच्चों ने खेल-खिलौनों और चॉकलेट के लिए गुल्लक में जमा अपनी पाई-पाई कोरोना के खिलाफ जंग में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री राहत कोष के लिए दे दी।

मदद करते नन्हे फौजी

भिंड के कस्बा रौन इलाके में रहने वाला आठ साल का श्याम सोनी और उसका पांच वर्षीय छोटा भाई कार्तिक फौजी ड्रेस में अपनी गुल्लक लेकर अधिकारियों के पास जा पहुंचे। दोनों भाई कई महीनों से गुल्लक में पैसा जमा कर रहे थे। लेकिन इसी बीच कोरोना ने देश पर हमला बोल दिया तो इन दोनों बच्चों ने कोरोना को हराने के लिए अपने गुल्लक में जमा पैसा महामारी से लडऩे के लिए दान कर दिया।

नन्ना कबीर-बड़ा दान

सिर्फ भिंड ही नहीं पन्ना में रहने वाले मोहम्मद अल्फेज कबीर ने गरीब और जरूरतमंदों की मदद के लिए अपनी गुल्लक सीएम आपदा कोष में दे दी। लॉकडाउन की वजह से पन्ना की तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी खुद कबीर के घर गई और उसका दान अपने हाथ में लिया। कबीर की गुल्लक में से 4344 रूपए निकले।

करोना इतना परेशान करो ना

बच्चे अपने बर्थडे को लेकर कितने उत्साहित रहते हैं। पन्ना के धाम मोहल्ले का रहने वाला महेन्द्र नामदेव भी अपने जन्मदिन का कब से इंतजार कर रहा था। लॉकडाउन के कारण पार्टी तो हुई नहीं, बल्कि महेन्द्र ने रिटर्न गिफ्ट दे दिया। उसने अपने जन्मदिन पर मिले 2100 रुपए सीएम राहत कोष के लिए दे दिए। उसने एक कविता भी लिखी है। इसमें वो अपने जन्मदिन पर सबसे यही अपील कर रहा है कि लॉकडाउन का पालन करो। किसी से हाथ नहीं मिलाइए। बाहर नहीं जाना, घर में ही रहना। करोना इतना परेशान करो ना।

पुलिस अंकल मेरे पैसे ले लो

गुल्लक से गुडलक की इस कहानी का एक योद्धा रीवा का 12 साल का देव अग्रवाल भी है। वो अपने पापा के साथ रीवा के अमहिया थाने में गुल्लक लेकर पहुंच गया। पुलिस अंकल से कहने लगा- अंकल, मेरी गुल्लक ले लीजिए। पुलिसवाले भी संकट की इस घड़ी में ऐसे मासूम फरिश्ते को देखकर बेहद खुश हुए। दरअसल देव के पिता अशोक अग्रवाल और उनका परिवार कोरोना कमांडोज की भूमिका निभा रहे हैं। वो रोज गरीबों के लिए खाने का इंतजाम कर रहे हैं। इंसानियत का यही पाठ मासूम देव ने अपने परिवार से सीखा और उसने अपनी गुल्लक के पैसे प्रधानमंत्री राहत कोष में दान दे दिया। उसकी गुल्लक से 10 हजार रुपए निकले।

लैपटॉप का पैसा दान

मंदसौर में दसवीं क्लास में पढऩे वाले यशराज सिंह देवड़ा चार साल से गुल्लक में अपनी सारी पॉकेट मनी जमा कर रहा था। इन रुपयों से वो एक लैपटॉप खरीदना चाहता था। लेकिन जब यश को कोरोना की आपदा का पता चला तो उसने अपने पापा से कहा, लेपटॉप तो बाद में भी आ जाएगा। इस रुपए से किसी को नई जिंदगी मिल जाए, बस मैं यहीं चाहता हूं। यश ने 15,638 रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष में भेंट कर दी। दसवीं कक्षा के छात्र यशराज सिंह के पिता अनिल सिंह एक किसान हैं और उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के पैसे भी कोरोनावायरस पीडि़तों की सेवा के लिए दान दे दिए।

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