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प्रदेश की सीमा पर अटके सैकड़ों ट्रक, करोड़ों के कारोबार का नुक़सान

ट्रक उद्योग से करीब 5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष्र और 2 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है।

प्रदेश की सीमा पर अटके सैकड़ों ट्रक, करोड़ों के कारोबार का नुक़सान
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भोपाल। मध्यप्रदेश में ट्रकों के पहिए थमने से करोड़ों का कारोबार ठप्प पड़ गया है। यह नुकसान ट्रांसपोर्टर और उससे जुड़े कारोबारियों को हुआ है। लॉक डाउन होने की वजह से सिर्फ अति आवश्यक सामान लेकर आ रहे ट्रकों को ही शहर में एंट्री दी जा रही है। बाकी सामान से लदे सैकड़ों ट्रक शहर से बाहर रोक दिए गए हैं। गर्मी के इस मौसम में ट्रक वाले बीच रास्ते में फंसकर परेशान हो रहे हैं। सामान भी खराब हो रहा है। लॉक डाउन में भोपाल सहित प्रदेश से गुजरने वाले बायपास पर ट्रकों के पहिए थमे हुए हैं। लॉक डाउन शुरू होने के दौरान ये ट्रक जिस जगह थे वहीं उसी स्थिति में सड़क किनारे खड़े कर दिए गए। बायपास पर 19 दिन से माल से लदे हुए ट्रक और कंटेनर खड़े हुए हैं। अब इन्हें लॉक डाउन खुलने का इंतजार है।इससे ट्रांसपोर्ट और उससे जुड़े कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान होने का अनुमान है।

लोकल ढाई लाख ट्रक

मप्र में करीब 30,000 ऐसे ट्रक हैं, जिन्हें इंटरस्टेट परमिट मिला हुआ है। इस परमिट के कारण ट्रक माल को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जा सकते हैं।भोपाल में ऐसे ट्रकों की संख्या करीब 5000 है। हालांकि लोकल लेवल पर बात की जाए तो मप्र में करीब 2।5 लाख हैं, जिनका इस्तेमाल माल की ढुलाई जैसे काम में होता है।

भोपाल में फंसे 100 से ज्यादा ट्रक

भोपाल ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के सदस्य अशोक मालपानी ने बताया कि लॉक डाउन के कारण हमारे करीब 100 से ज्यादा ट्रक नेशनल हाइवे पर फंसे हुए हैं। इसमें भरा गया माल खराब हो रहा है। हम सरकार से उम्मीद करते हैं कि वह आवश्यक कदम उठाकर ऐसे ट्रकों के खाली होने का इंतजाम करें। भोपाल में ट्रकों के अंदर आने की व्यवस्था की जाए ताकि जरूरत की चीजें यहां आ सकें और बढती हुई महंगाई पर लगाम लगाई जा सके।

7 लाख लोगों पर रोजगार का संकट

मालपानी ने बताया कि मप्र के ट्रक उद्योग से करीब 5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष्र और 2 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। हमारें खर्चों में ज्यादा कमी नहीं आई है। हमें अपने स्टाफ का पूरा पेमेंट करना है। ट्रक ड्राइवर और क्लीनर का भी ख्याल रखना है। अगर यह स्थिति ज्यादा दिन रहती है तो हम किस प्रकार से खर्च उठाएंगे। इससे ये लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

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