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अब संदिग्धों की पुरानी बीमारियों की हिस्ट्री भी दर्ज करेंगे हेल्थ वर्कर्स

जांच और लैब टेस्टिंग की गाइडलाइन में हुआ बदलाव, स्टॉफ को दिए आदेश

भोपाल, कोरोना के बढ़ते पाजिटिव मामलों और मौतों को देखते हुए राज्य स्तर पर कुछ जरुरी बदलाव किये गए हैं। इनमे सेम्पल टेस्टिंग से लेकर कोरोना के संदिग्ध मरीजों के सर्वे के दौरान जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था में कुछ अहम बातें जोड़ी गईं हैं। आईसीएमआर (इन्डियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च) से मिले दिशानिर्देशों के बाद प्रदेश में भी रणनीति में बदलाव किया गया है। ताकि कोरोना के संक्रमण और मौतों को रोका जा सके। स्वास्थ्य आयुक्त द्वारा जारी आदेश के मुताबिक अब रेपिड रिस्पांस टीमों और अस्पतालों में सेम्पल लेने वाले स्टाफ को ये आदेश दिए गए हैं। कि वे संदिग्ध का सेम्पल लेते समय उसकी पुराणी बीमारियों की जानकारी भी फार्म में दर्ज करें क्योंकि अब तक हुई मौतों में अधिकांश मरीज मोरबिडिटी जैसे ओबेसिटी, डाईबिटीज, हाइपरटेंशन, अस्थमा जैसी बीमारियों से पीडि़त थे। इसके अलावा पाजिटिव मरीज के कोंटेक्ट में आने वाले लोगों की जानकारी के साथ ही विदेश यात्रा की जानकारी आईसीएमआर के नए रेफरल फॉर्म में भरी जायेगी।

हाईरिस्क पेशेंट की 5 से 14 दिन के बीच में होगी जांच

आईसीएमआर द्वारा गाइडलाइन में किये गए बदलावों के बाद अब लैब टेस्टिंग की व्यवस्था में कूछ बदलाव किये गए हैं। इनमे पिछले 14 दिनों के भीतर विदेश यात्रा करने वाले सभी लक्षणों वाले लोगों की जांच की जाएगी। लैब टेस्ट में कोरोना के कन्फर्म केस के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच कराई जाएगी। गंभीर सांस की बीमारी (बुखार, कफ और सांस लेने में तकलीफ वाले) सभी रोगियों के टेस्ट कराये जायेंगे। कन्फर्म कोरोना केस के डायरेक्ट कान्टेक्ट में आये हाईरिस्क पेशेंट्स का 5 से 14 दिन के भीतर एक बार परीक्षण कराया जायेगा।

सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने चार जगहों से सेवा देंगे 108 के कर्मचारी

कोरोना के कारण लाकडाउन का पालन करते हुए लोग अपने घरों में हैं. सरकारी और निजी कंपनियों के कर्मचारी घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) सेवा दे रहे हैं। लेकिन, 108 एंबुलेंस के कर्मचारी और दोनों कॉल सेंटर (108 एवं 104) के कर्मचारी लगातार अपनी सेवा दे रहे हैं। इस महामारी के समय उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए सरकार के निर्देश अनुसार जिगित्सा कंपनी कर रही है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए जिगित्सा कम्पनी ने 4 जगहों से कॉल सेंटर की सेवाए शुरू की हैं। इनमे पहला पहला सेंटर कैपिटल मॉल, दूसरा ईदगाह हिल्स, तीसरा आइडियल स्कूल गोविंदपुरा और चौथा सेंटर नंदन पैलेस होशंगाबाद रोड में बनाया गया है. जो कर्मचारी दूर से आते हैं उनके रहने खाने की भी व्यवस्था होटलों में की गई है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को सेवा मिल सके साथ ही साथ कंपनी का स्टाफ भी स्वस्थ रहें। वर्तमान में करीब 35000 से 40000 कॉल कॉल सेंटर द्वारा प्रतिदिन लिया जा रहा है और करीब 8000 लोगों को एंबुलेंस मुहैया कराई जा रही है।

एम्स की टीम ने रोकथाम के प्रशासनिक प्रयासों को सराहा

कोरोना के कारण हाईरिस्क कंडीशन में पहुँच चुके इंदौर की स्थिति का आंकलन करने एम्स भोपाल की केन्द्रीय रैपिड रेस्पांस टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है इसमें कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए किये गए प्रशासनिक प्रबंधन को सराहा है। लेकिन ज्यादा मौतों के लिए संदिग्धों की पहचान में देरी और कमजोर सूचना तंत्र को जिम्मेदार बताया है। इसमें मृतकों की बीमारियों की सही जानकारी समय से पता न लग पाने के कारण ट्रीटमेंट की दिशा समय पर तय नहीं हो पाई। 9 बिन्दुओं पर टीम ने अपनी रिपोर्ट दी है। जिसमे कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। गौरतलब है कि कन्फर्म केसों को एपीसेंटर मानते हुए 2 अप्रैल तक 23 क्षेत्रों को कन्टेंनमेंट एरिया चिन्हित कर प्रतिबंधित किये गए. कोंटेक्ट ट्रेसिंग में मेडिकल आफिसर्स, के साथ डेंटल डॉक्टर, आशा, आंगनबाड़ी और दूसरे विभागों के फील्ड वर्कर्स को तैनात कर मोबाईल मेडिकल यूनिट बनाकर संदिग्धों के सेम्पल लेकर अस्पताल रेफर किये गए। डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए डेंटल डॉक्टर्स को पीपीई किट और जरुरी संसाधन मुहैया कराकर सेम्पल कलेक्शन कराया इस प्रयास को एम्स की टीम ने सराहा है। जिला प्रशासन ने 1200 लोगों को क्वारेंटाईन करने के लिए मैरिज हाल चिन्हित किये। संक्रमित मरीजों के प्राइमरी और सेकेंडरी कोंटेक्ट की ट्रेसिंग कर लगभग 7 लोगों को प्राइमरी कान्टेक्ट में चिन्हित किया गया। 24 मार्च को पहले 4 केस कन्फर्म हुए लेकिन टीम को मिले तथ्यों के अनुसार संक्रमण की शुरुआत 8 से 11 मार्च के बीच हो गई थी। लेकिन प्रशासन ने कंट्रोल के लिए कई जरुरी और सख्त कदम उठाये।

लोगों को ये दिए सुझाव

लोगों को जागरूक कर सर्दी खांसी और सांस लेने में तकलीफ वाले मरीजों को तत्काल डॉक्टरी एडवाईज मुहैया कराई जाए। संक्रमित व्यक्तियों की कान्टेक्ट ट्रेसिंग सुनिश्चित कर संक्रमण को रोका जाए. मरीजो के लक्षणों और पहले की बीमारियों को चिन्हित कर इलाज की व्यवस्था की जाए ताकि मौतों को रोका जा सके। कोरोना के सम्बन्ध में लोगों को लक्षणों की सही जानकारी न होने के कारण संक्रमित मरीजों के अस्पताल आने में देरी हुई जिससे समय पर ट्रीटमेंट नहीं हो पाया. इसके लिए व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। संदिग्ध के सेम्पल लेने और सम्बंधित मरीज को रिपोर्ट की जानकारी देने में हुई देरी को रोकने के लिए सेम्पल लेने से लेकर लैब भेजने और आईडीएसपी शाखा से जिला प्रशासन के माध्यम से सम्बंधित तक त्वरित सूचना पहचानी चाहिये।

प्रयोगशालाओं मेें पैंडेंसी न रहे

रिपोर्ट में कहा गया है कि सेम्पल टेस्टिंग में देरी को कम करने के लिए चिन्हित लैब की मैपिंग की जाए ताकि एक प्रयोगशाला में सेम्पल की ज्यादा पेंडेंसी न रहे। इसके साथ ही संदिग्ध लोगों के लिए एनसीडीसी द्वारा जारी सीआईएफ फार्म को फील्ड लेवल पर सही तरीके से नहीं भरा जा रहा है इसे आइसोलेशन और ट्रीटमेंट सेंटर्स पर जरुरी तौर पर भरा जाए। वहीं मौतों के हर केस की सूचना 24 घंटे के भीतर स्टेट लेवल आईडीएसपी ब्रांच को दी जाए ताकि डेथ ऑडिट किया जा सके।

लोगों को ये दिए सुझाव

लोगों को जागरूक कर सर्दी खांसी और सांस लेने में तकलीफ वाले मरीजों को तत्काल डॉक्टरी एडवाईज मुहैया कराई जाए। संक्रमित व्यक्तियों की कान्टेक्ट ट्रेसिंग सुनिश्चित कर संक्रमण को रोका जाए. मरीजो के लक्षणों और पहले की बीमारियों को चिन्हित कर इलाज की व्यवस्था की जाए ताकि मौतों को रोका जा सके। कोरोना के सम्बन्ध में लोगों को लक्षणों की सही जानकारी न होने के कारण संक्रमित मरीजों के अस्पताल आने में देरी हुई जिससे समय पर ट्रीटमेंट नहीं हो पाया. इसके लिए व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए।

प्रयोगशालाओं मेें पैंडेंसी न रहे

रिपोर्ट में कहा गया है कि सेम्पल टेस्टिंग में देरी को कम करने के लिए चिन्हित लैब की मैपिंग की जाए ताकि एक प्रयोगशाला में सेम्पल की ज्यादा पेंडेंसी न रहे। इसके साथ ही संदिग्ध लोगों के लिए एनसीडीसी द्वारा जारी सीआईएफ फार्म को फील्ड लेवल पर सही तरीके से नहीं भरा जा रहा है इसे आइसोलेशन और ट्रीटमेंट सेंटर्स पर जरुरी तौर पर भरा जाए। वहीं मौतों के हर केस की सूचना 24 घंटे के भीतर स्टेट लेवल आईडीएसपी ब्रांच को दी जाए ताकि डेथ ऑडिट किया जा सके।

इन बातों का भी रखा जा रहा ख्याल

> लगातार कॉल सेंटर एवं गाडिय़ों को संक्रमण मुक्त (फ्युमिगेशन) किया जा रहा है।

> एंबुलेंस कर्मचारियों को जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराये गए है।

> कॉल सेंटर के कर्मचारियों की आने-जाने की व्यवस्था भी की गई है।

> दिन में करीब 3 बार कॉल सेंटर के सारे बार-बार टच किए जाने वाले उपकरणों जैसे कि कीबोर्ड, माउस हेडफोन को सैनिटाइज किया जा रहा है।

> हाल ही में सारे कॉल सेंटर स्टाफ का डॉक्टर द्वारा जांच भी की गई थी जिसमें सभी लोग स्वस्थ पाए।

> इसी को ध्यान में रखते हुए कॉल सेंटर को चार भागों में बांटा गया है जिससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो सके।

> सरकार द्वारा बताए गए नियम और सावधानियों का भी पालन हो रहा है।

जय प्रकाश अस्पताल में सेनेटाइज शावर मशीन लगी

कोरोना वायरस महामारी के समय 24 घंटे अस्पतालों में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों को वायरस से बचाव के लिए पूर्व मंत्री पीसी शर्मा जयप्रकाश अस्पताल (1250) में सेनेटाइज शावर (मशीन) लगवाई है। मशीन लगने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, पूर्व जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा जेपी अस्पताल पहुंचे उन्होने अस्पताल की सिविल सर्जन और डॉक्टरों के साथ मशीन का अवलोकन कर इससे होने वाले सेनेटाइज का तरीका समझा वे इस दौरान मशीन के बीच से निकलकर सेनटाइज भी हुए। इस मशीन के बीच से निकलने पर मशीन आटोमैटिक शुरु हो जाती है और 20 सेकंड में पूरे शरीर को सेनेटाइज कर देती है इससे सेनेटाइज होने वाला व्यक्ति 24 घंटे तक वायरस के प्रभाव से मुक्त रहता है। पूर्व मंत्री शर्मा ने यह मशीन अस्पताल में काम कर रहे डॉक्टर, यहां आने वाले हजारों मरीजो और उनके परिजनों को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिये लगवाई है।

पीसी शर्मा ने बताया कि वे इससे पहले पुलिस को कोरोना वायरस से बचाने के लिए पुलिस लाइन नेहरु नगर और 23 वी बटालियन सुपर बाजार के पास मशीन लगवा चुके है यह तीसरी मशीन है जो डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए लगाई गई है उन्होन बताया कि वे जल्द ही एक और मशीन कर्मचारियों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए कर्मचारियों के आवाजाही वाले क्षेत्र में लगवायेंगे। इस मौके पर पार्षद गुड्डू चौहान भी मौजूद रहे।

प्रयोगशालाओं मेें पैंडेंसी न रहे

रिपोर्ट में कहा गया है कि सेम्पल टेस्टिंग में देरी को कम करने के लिए चिन्हित लैब की मैपिंग की जाए ताकि एक प्रयोगशाला में सेम्पल की ज्यादा पेंडेंसी न रहे। इसके साथ ही संदिग्ध लोगों के लिए एनसीडीसी द्वारा जारी सीआईएफ फार्म को फील्ड लेवल पर सही तरीके से नहीं भरा जा रहा है इसे आइसोलेशन और ट्रीटमेंट सेंटर्स पर जरुरी तौर पर भरा जाए। वहीं मौतों के हर केस की सूचना 24 घंटे के भीतर स्टेट लेवल आईडीएसपी ब्रांच को दी जाए ताकि डेथ ऑडिट किया जा सके।

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