Top
undefined

पिता कोरोना कंट्रोल के मैनेजमेंट में लगे थे और बेटा कॉल सेंटर पर काउंसिलिंग में, दोनों के साथ मां भी हुई संक्रमित

स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. उपेन्द्र दुबे के बेटे डॉ. पल्लव दुबे ने बयां किया अपना दर्द

पिता कोरोना कंट्रोल के मैनेजमेंट में लगे थे और बेटा कॉल सेंटर पर काउंसिलिंग में, दोनों के साथ मां भी हुई संक्रमित
X

भोपाल, कोरोना के कारण दुनियां भर में हाहाकार मचा हुआ है। डॉक्टर्स, पुलिस सहित निगम और कई सरकारी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर इसे रोकने में लगे हैं। इन्हें लोग योद्धा, भारत के रक्षक, कोरोना वारियर्स जैसी उपाधि दे रहे हैं। लेकिन दु:ख की बात ये है कि जब कोई व्यक्ति और कोरोना कंट्रोल में ड्यूटी करने वाला कर्मचारी पाजिटिव आ जाता है तो समाज और मीडिया का नजरिया बदल जाता है। मेरे पिता और में स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ हैं पिता संयुक्त संचालक और में जेपी अस्पताल में बतौर मेडिकल आफिसर सेवा दे रहा हूँ। हफ्ते भर पहले तक सब लोग हमारे काम और जज्बे की तारीफ करते थे लेकिन जैसे ही मेरे पिता की रिपोर्ट पाजिटिव आई लोगों का नजरिया एकदम से बदल गया। मीडिया ने भी हमारे परिवार के बारे गलत जानकारी प्रकाशित की। इससे बहुत दु:ख हुआ आज हम पिता पुत्र के साथ मेरी मां भी कोरोना पाजिटिव हैं। मेरी पत्नी अकेली घर में रह रही है। ये बात स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. उपेन्द्र दुबे के बेटे डॉ. पल्लव दुबे ने अपना दर्द बयां करते हुए कही।

लोगों के दोहरे व्यवहार से लोगों का मनोबल टूटता है

डॉ. पल्लव ने कहा कि ये मेरे व्यक्तिगत विचार हैं कि कोरोना कंट्रोल के काम में प्रत्यक्ष रूप से काम कर रहे डॉक्टर्स अधिकारी-कर्मचारी, पुलिसकर्मी दिन रात संक्रमित क्षेत्रों में ड्यूटी कर रहे हैं। इस दौरान यदि वे खुद संक्रमित हो जाते हैं। और लोगों का उनके प्रति बदला हुआ व्यवहार और नजरिया मनोबल कम करता है। ऐसे समय में हौसला बढ़ाना चाहिए।

क्लिनिक के स्टाफ की रिपोर्ट आई निगेटिव

डॉ. पल्लव दुबे ने बताया कि उनके पाजिटिव आने के बाद पंचशील नगर स्थित क्लिनिक पर काम करने वाले कर्मचारियों की जांच कराई थी। सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

बुखार आया तो पापा तुरंत हुए आइसोलेट

कोरोना संक्रमण की चपेट में आये डॉ. पल्लव दुबे ने बताया कि पापा पिछले कई दिनों से देर रात आफिस से घर लौटते थे। 30 मार्च को जैसे ही उन्हें बुखार आया वे घर के एक कमरे में सेल्फ आइसोलेट हो गए। 2 अप्रैल को विजय कुमार सर की रिपोर्ट पाजिटिव आई तो फिर कोरोना टेस्ट कराया गया। 4 तारीख को पापा की भी रिपोर्ट पाजिटिव आई। मुझे भी बुखार आ रहा था तो मैंने 2 अप्रैल के बाद आना-जाना बंद कर दिया। 5 तारिख को मेरे परिवार में मां और पत्नी का भी सेम्पल लिया गया। लेकिन रिपोर्ट 10 तारिख को आई। जिसमे मां और मेरा रिजल्ट पाजिटिव आया। जबकि मेरी पत्नी का निगेटिव आया। पत्नी घबरा गई लेकिन सबने हौसला और हिम्मत दी। फिर में और मां अस्पताल में भर्ती हुए। पापा का सेम्पल जिस दिन पाजिटिव आया उस दिन मां ने ये कहा कि पल्लव की रिपोर्ट आ जाने दो और यदि रिजल्ट पाजिटिव आता तो दोनों साथ में भर्ती हो जाना। लेकिन जब अधिकारीयों ने अस्पताल भर्ती होने के लिए कहा तो पापा भर्ती हो गए। हमने डॉक्टर होने के नाते अपने आसपास के लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए सेल्फ आइसोलेशन कर एहतियात बरता। लेकिन लोगों ने अफवाह उड़ा दी कि मेरा नौकर कुत्ता घुमा रहा है। जबकि मेरे घर में न नौकर है और न कुत्ता।

Next Story
Share it